27 मई अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : Iran के एक वरिष्ठ Islamic Revolutionary Guard Corps अधिकारी ने कहा है कि United States के साथ दोबारा युद्ध की संभावना “कम” है, हालांकि Tehran किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब Middle East में तनाव और ceasefire वार्ताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है।
Iranian media reports के अनुसार, IRGC Navy के deputy political chief Mohammad Akbarzadeh ने कहा कि “युद्ध की संभावना कम है क्योंकि दुश्मन कमजोर है,” लेकिन Iranian armed forces पूरी तैयारी की स्थिति में हैं।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि Iran पर हमला हुआ तो देश के दक्षिणी तटीय क्षेत्र “हमलावरों की कब्रगाह” बन सकते हैं। उन्होंने Chabahar से Mahshahr तक के इलाके का उल्लेख करते हुए Iran की सैन्य तैयारी पर जोर दिया।
यह बयान हाल के हफ्तों में U.S.-Iran तनाव के बाद आया है। दोनों देशों के बीच Strait of Hormuz, nuclear negotiations और regional security को लेकर तनाव बना हुआ है। हालांकि हालिया संघर्ष के बाद ceasefire और diplomatic talks को लेकर भी प्रयास जारी हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि Iran की ओर से “war unlikely” जैसा संदेश देना क्षेत्रीय स्थिरता का संकेत देने की कोशिश हो सकती है, लेकिन साथ ही Tehran अपनी military deterrence capability भी दिखाना चाहता है।
हाल के दिनों में United States और Iran के बीच indirect negotiations की खबरें सामने आई थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वार्ताओं में Strait of Hormuz को दोबारा खोलने, sanctions relief और nuclear framework जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
हालांकि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी अब भी बड़ी चुनौती मानी जा रही है। Iran ने हालिया U.S. strikes को “bad faith” बताया था, जबकि Washington ने उन्हें defensive action कहा।
Middle East मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से युद्ध टालने की बात कर रहे हों, लेकिन क्षेत्रीय हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
Strait of Hormuz का मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दुनिया की बड़ी मात्रा में oil supply इसी मार्ग से गुजरती है। किसी भी सैन्य तनाव का असर वैश्विक energy markets पर तुरंत पड़ सकता है।
सोशल मीडिया और international political forums पर भी Iran अधिकारी के बयान को लेकर व्यापक चर्चा हुई। कुछ analysts ने इसे de-escalation signal बताया, जबकि अन्य ने इसे strategic messaging कहा।
इस बीच, China और Qatar जैसे देश लगातार diplomatic efforts के जरिए क्षेत्रीय तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया घटनाओं ने यह दिखाया है कि Middle East में किसी भी छोटी सैन्य कार्रवाई के बड़े geopolitical और economic consequences हो सकते हैं।
Iran के कई नेताओं ने हाल के दिनों में बार-बार यह संकेत दिया है कि देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन “national sovereignty” और सुरक्षा से समझौता भी नहीं करेगा।
अंतरराष्ट्रीय observers का मानना है कि आने वाले दिनों में U.S.-Iran talks की दिशा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।
यदि ceasefire talks सफल होती हैं, तो oil markets और global trade routes को राहत मिल सकती है। लेकिन बातचीत विफल होने की स्थिति में तनाव दोबारा बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।
कुल मिलाकर, Islamic Revolutionary Guard Corps अधिकारी का बयान संकेत देता है कि फिलहाल Iran और United States दोनों खुला युद्ध टालना चाहते हैं, लेकिन क्षेत्र में सैन्य और राजनीतिक सतर्कता अब भी बरकरार है।
