3 जून 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने भारत सहित 54 देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम कथित तौर पर जबरन श्रम (Forced Labour) से जुड़े आयात नियमों के उल्लंघन को रोकने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
प्रस्ताव के अनुसार, उन देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है जहां आपूर्ति श्रृंखला में जबरन श्रम के उपयोग को लेकर पर्याप्त निगरानी या अनुपालन नहीं पाया जाता। अमेरिका लंबे समय से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता रहा है।
भारत उन देशों में शामिल है जिन पर यह प्रस्ताव लागू हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि किन विशेष उत्पाद श्रेणियों या उद्योगों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और अंतिम निर्णय से पहले संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जा सकती हैं।
व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत के कुछ निर्यात क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से वस्त्र, परिधान, कृषि उत्पाद और विनिर्माण क्षेत्र की कुछ श्रेणियां अतिरिक्त लागत का सामना कर सकती हैं।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध हाल के वर्षों में मजबूत हुए हैं। दोनों देश कई रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। ऐसे में इस तरह का प्रस्ताव द्विपक्षीय व्यापार चर्चाओं में एक नया मुद्दा बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कंपनियों और सरकारों पर अब यह दबाव बढ़ रहा है कि वे अपनी सप्लाई चेन में श्रम मानकों का पालन सुनिश्चित करें। कई पश्चिमी देशों ने हाल के वर्षों में जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों के खिलाफ कड़े नियम लागू किए हैं।
उद्योग जगत का कहना है कि भारतीय निर्यातकों ने श्रम मानकों और अनुपालन प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनका तर्क है कि किसी भी व्यापक शुल्क व्यवस्था को लागू करने से पहले उद्योग-विशेष परिस्थितियों का विस्तृत आकलन किया जाना चाहिए।
इस बीच, व्यापार विश्लेषक यह भी मानते हैं कि प्रस्तावित शुल्क अभी अंतिम नहीं हैं और आगे की बातचीत, समीक्षा और कूटनीतिक प्रयासों के बाद इनमें बदलाव संभव है।
कुल मिलाकर, USTR का यह प्रस्ताव वैश्विक व्यापार और श्रम मानकों को लेकर बढ़ती सख्ती को दर्शाता है। यदि इसे लागू किया जाता है, तो भारत सहित कई देशों के निर्यातकों को नई चुनौतियों और अनुपालन आवश्यकताओं का सामना करना पड़ सकता है।
