2 जून 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : वैश्विक तेल बाजार में मंगलवार को गिरावट देखने को मिली, जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि Iran के साथ बातचीत अभी भी जारी है। उनके बयान के बाद निवेशकों ने Middle East में संभावित तनाव-नरमी की उम्मीद जताई, जिससे crude oil prices पर दबाव बना।
रिपोर्ट्स के अनुसार, Brent crude लगभग 1.6% गिरकर 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि U.S. West Texas Intermediate (WTI) भी करीब 1.6% टूटकर 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। यह गिरावट सोमवार को दर्ज हुई तेज बढ़त के बाद आई है।
बाजार में यह प्रतिक्रिया इसलिए देखने को मिली क्योंकि हाल के दिनों में Iran और United States के बीच वार्ताओं को लेकर विरोधाभासी संकेत मिल रहे हैं। एक ओर Iranian मीडिया ने वार्ताएं निलंबित होने की बात कही, वहीं Trump ने दावा किया कि बातचीत जारी है और प्रगति हो रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि तेल बाजार फिलहाल किसी भी Iran-संबंधित खबर पर अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। निवेशक यह आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो सकता है जो क्षेत्रीय तनाव को कम करे।
Middle East में जारी तनाव के कारण पिछले कुछ महीनों से तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। विशेष रूप से Strait of Hormuz को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, क्योंकि वैश्विक तेल और LNG आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है।
यदि U.S.-Iran वार्ता आगे बढ़ती है और क्षेत्रीय हालात स्थिर होते हैं, तो तेल आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हो सकती हैं। यही कारण है कि Trump के बयान के बाद traders ने कुछ geopolitical risk premium को कम करना शुरू किया।
हालांकि कई market experts अभी भी सतर्क हैं। उनका कहना है कि केवल बयानबाजी के आधार पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी क्योंकि जमीन पर हालात अब भी अनिश्चित बने हुए हैं।
सोमवार को तेल कीमतों में 5% से अधिक की तेजी आई थी, जब Iran द्वारा वार्ता रोकने और Hormuz को लेकर सख्त रुख अपनाने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद Trump के ताजा बयान ने बाजार का रुख कुछ हद तक बदल दिया।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतों का भविष्य अब काफी हद तक U.S.-Iran वार्ताओं, Strait of Hormuz की स्थिति और Middle East में सुरक्षा हालात पर निर्भर करेगा।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए तेल कीमतों में गिरावट राहत की खबर हो सकती है। कम कीमतें आयात बिल, मुद्रास्फीति और ईंधन लागत पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि जब तक क्षेत्रीय संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं होता और आपूर्ति मार्ग सामान्य नहीं हो जाते, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
कुल मिलाकर, Trump द्वारा Iran के साथ बातचीत जारी रहने की बात कहे जाने के बाद तेल बाजार में नरमी आई है। लेकिन निवेशक अभी भी सतर्क हैं क्योंकि कूटनीतिक प्रगति और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर बना हुआ है।
