30 जून  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : पंजाब में लगातार गहराते बिजली संकट को लेकर किसान-मजदूर मोर्चा (केएमएम) ने राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों और आम लोगों को पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो राज्यभर में ‘चक्का जाम’ किया जाएगा। किसान नेताओं का कहना है कि बिजली की अनियमित आपूर्ति का सबसे अधिक असर धान की खेती पर पड़ रहा है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।

किसान-मजदूर मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा बिजली आपूर्ति को लेकर किए गए दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। कई जिलों में निर्धारित समय से कम बिजली मिलने के कारण किसानों को सिंचाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे फसलों की उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है।

संगठन का कहना है कि पंजाब की कृषि व्यवस्था काफी हद तक बिजली आधारित सिंचाई पर निर्भर है। ऐसे समय में जब धान की रोपाई का कार्य तेजी से चल रहा है, लंबे बिजली कट किसानों के लिए गंभीर समस्या बन गए हैं। किसानों का आरोप है कि कई इलाकों में घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है, जिससे उन्हें डीजल पंपों का सहारा लेना पड़ता है। इससे खेती की लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

किसान नेताओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा ट्रांसफार्मरों की खराब स्थिति, बिजली लाइनों की मरम्मत और बिजली विभाग में पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर भी तत्काल कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

किसान-मजदूर मोर्चा ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित ‘चक्का जाम’ पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। इस दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में प्रमुख सड़कों और राजमार्गों पर प्रदर्शन किए जाएंगे। संगठन ने किसानों, खेत मजदूरों और आम नागरिकों से इस आंदोलन में सहयोग करने की अपील भी की है।

उधर, बिजली संकट को लेकर विपक्षी दलों ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार बिजली प्रबंधन को लेकर प्रभावी रणनीति बनाने में असफल रही है, जिसका खामियाजा किसानों और आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। विपक्ष ने सरकार से तत्काल स्थिति की समीक्षा कर बिजली आपूर्ति में सुधार करने की मांग की है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम और कृषि क्षेत्र में बढ़ती बिजली मांग के कारण राज्य पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। यदि समय रहते उत्पादन और वितरण व्यवस्था को बेहतर नहीं बनाया गया तो आने वाले दिनों में बिजली संकट और गंभीर हो सकता है। विशेषज्ञों ने मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने पर भी जोर दिया है।

इस बीच राज्य सरकार का कहना है कि बिजली आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और जहां तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं, वहां तेजी से मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि धान की खेती के दौरान बिजली आपूर्ति में सुधार के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि जब तक ग्रामीण क्षेत्रों में तय समय के अनुसार निर्बाध बिजली उपलब्ध नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान-मजदूर मोर्चा ने सरकार से जल्द बातचीत कर ठोस समाधान निकालने की मांग की है ताकि किसानों को राहत मिल सके और राज्य में किसी बड़े आंदोलन की नौबत न आए।

पंजाब में बिजली संकट को लेकर बढ़ती नाराजगी अब आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो प्रस्तावित ‘चक्का जाम’ राज्य में यातायात और जनजीवन को प्रभावित कर सकता है।

Bharat Baani Bureau

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *