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17 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : आम धारणा है कि फलों का जूस हमेशा सॉफ्ट ड्रिंक से बेहतर विकल्प होता है। लेकिन लिवर विशेषज्ञों के अनुसार, यह तुलना इतनी सीधी नहीं है। खासकर बिना चीनी वाला डाइट सोडा और नियमित मीठे फ्रूट जूस की तुलना में तस्वीर अलग हो सकती है।

फ्रूट जूस में फल से मिलने वाले कुछ पोषक तत्व मौजूद हो सकते हैं, लेकिन पूरे फल के विपरीत जूस में फाइबर काफी कम हो जाता है। वहीं, कई पैकेज्ड या मीठे फलों के जूस में अतिरिक्त चीनी भी हो सकती है। अधिक मात्रा में शर्करा का सेवन वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है, जो लिवर की सेहत से भी जुड़ा है।

डाइट सोडा में आमतौर पर चीनी और कैलोरी की मात्रा नियमित शीतल पेय की तुलना में बहुत कम होती है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति मीठे जूस या शुगर-सweetened पेय की जगह सीमित मात्रा में डाइट सोडा चुनता है, तो कैलोरी और चीनी के सेवन को कम किया जा सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि डाइट सोडा लिवर के लिए स्वास्थ्यवर्धक पेय है या इसे पानी और पूरे फलों से बेहतर माना जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, पानी और साबुत फल आम तौर पर बेहतर विकल्प हैं।

लिवर की सेहत के लिए केवल एक पेय पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन और सीमित चीनी का सेवन अधिक महत्वपूर्ण है। जिन लोगों को पहले से लिवर संबंधी समस्या है, उन्हें अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार आहार चुनना चाहिए।

Bharat Baani Bureau

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