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9  जुलाई  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : मई 2026 में भारत के कच्चे तेल (Crude Oil) आयात में रूस की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। यह तब हुआ जब रूसी तेल पर प्रीमियम (Premium) कीमतें जारी रहीं, फिर भी भारतीय रिफाइनरियों ने बड़ी मात्रा में रूस से तेल खरीदना जारी रखा।

बाजार आंकड़ों के अनुसार, रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद भारत ने रियायती रूसी तेल की खरीद बढ़ाई थी, और अब प्रीमियम बढ़ने के बावजूद आयात का स्तर ऊंचा बना हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिफाइनरियां कीमत, उपलब्धता, परिवहन लागत और विभिन्न ग्रेड के कच्चे तेल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खरीदारी करती हैं। इसी कारण रूस भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

रूस के बाद इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं। हालांकि मई के दौरान रूस की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता बनाए रखने की नीति अपनाता है। इसके तहत वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न देशों से तेल खरीदा जाता है।

कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति में बदलाव का सीधा असर भारत के आयात बिल, ईंधन कीमतों और मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार और तेल कंपनियां वैश्विक ऊर्जा बाजार के घटनाक्रम पर लगातार नजर रखती हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां और कीमतें अनुकूल रहती हैं, तो आने वाले महीनों में भी रूस भारत के प्रमुख कच्चा तेल आपूर्तिकर्ताओं में बना रह सकता है।

Bharat Baani Bureau

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