16  जुलाई  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : दुनियाभर में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) का बोझ लगातार बढ़ रहा है। द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया में CKD से प्रभावित अनुमानित 84.4 करोड़ लोगों में से करीब आधे मामलों का अब तक निदान नहीं हो पाया है

अध्ययन में बताया गया है कि CKD अक्सर शुरुआती चरणों में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती। इसी वजह से कई लोगों को बीमारी के बारे में तब पता चलता है, जब किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो चुकी होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मधुमेह और उच्च रक्तचाप CKD के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसके अलावा मोटापा, हृदय संबंधी समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ा सकती हैं।

CKD के बढ़ते वैश्विक बोझ को देखते हुए विशेषज्ञों ने समय पर जांच और शुरुआती पहचान की आवश्यकता पर जोर दिया है। नियमित रक्तचाप जांच, रक्त में क्रिएटिनिन की जांच और मूत्र परीक्षण से किडनी की कार्यक्षमता से जुड़ी कई समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

अध्ययन के अनुसार, बीमारी की शुरुआती पहचान से इलाज और जीवनशैली में बदलाव के जरिए इसके बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है। इससे किडनी फेल्योर और डायलिसिस जैसी गंभीर स्थितियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि CKD की रोकथाम और शुरुआती पहचान के लिए जागरूकता बढ़ाना, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और उच्च जोखिम वाले लोगों की नियमित जांच जरूरी है।

Bharat Baani Bureau

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