9 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें आगामी एशियन गेम्स 2026 में एक बार फिर अपनी पारंपरिक नीली जर्सी में नजर आएंगी। हॉकी इंडिया ने एशियाई खेलों के लिए किट के रंग को लेकर अपनी प्राथमिकता भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को भेज दी है, जिसमें नीले रंग को पहली पसंद और भगवा रंग को दूसरी पसंद रखा गया है। यह फैसला हाल ही में विश्व कप के दौरान भारतीय टीम की भगवा जर्सी को लेकर उठे विवाद और पूर्व खिलाड़ियों तथा हॉकी प्रशंसकों की आलोचनाओं के बीच आया है।
हालांकि, हॉकी इंडिया का यह फैसला भगवा रंग को हमेशा के लिए छोड़ने का संकेत नहीं है। संगठन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि एशियन गेम्स के लिए नीला प्राथमिक विकल्प है, जबकि भविष्य की प्रतियोगिताओं में जर्सी के रंग को लेकर अलग से फैसला लिया जाएगा। यानी मौजूदा बदलाव को एक टूर्नामेंट-विशिष्ट पसंद के तौर पर देखा जाना चाहिए।
विश्व कप में भगवा जर्सी बनी थी चर्चा का विषय
भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने हाल ही में नीदरलैंड्स और बेल्जियम में आयोजित हॉकी विश्व कप के दौरान भगवा और सफेद रंग की जर्सी पहनी थी। लंबे समय से भारतीय हॉकी टीम की पहचान रही नीली जर्सी से अचानक हुए इस बदलाव ने खिलाड़ियों, पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ियों और प्रशंसकों के बीच चर्चा छेड़ दी थी।
भारत की हॉकी टीम लंबे समय से नीले रंग से जुड़ी रही है। देश के 1928 में ओलंपिक हॉकी में पदार्पण के बाद से भारतीय टीम की पहचान मुख्य रूप से नीली जर्सी के साथ रही है। ऐसे में भगवा रंग को प्राथमिक जर्सी बनाए जाने के फैसले को लेकर कई हॉकी प्रेमियों ने सवाल उठाए।
पूर्व भारतीय कप्तान वीरेंद्र रसक्विन्हा ने भी सोशल मीडिया पर नीली जर्सी से जुड़े भावनात्मक जुड़ाव को व्यक्त करते हुए भगवा जर्सी के फैसले पर सवाल उठाया था। उनके अलावा कई प्रशंसकों ने भी कहा कि भारतीय हॉकी की पारंपरिक पहचान को बनाए रखना चाहिए।
जर्सी बदलने के पीछे दिया गया था तकनीकी कारण
भगवा जर्सी को लेकर विवाद के बीच हॉकी इंडिया की ओर से यह बताया गया था कि रंग बदलने का फैसला किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि तकनीकी कारणों से जुड़ा था।
हॉकी मैदान की नीली कृत्रिम सतह पर खिलाड़ियों की दृश्यता बेहतर रखने के लिए भगवा रंग को प्राथमिक किट के रूप में चुना गया था। संगठन का तर्क था कि नीली सतह पर नीली जर्सी खिलाड़ियों की पहचान और विजुअल ट्रैकिंग को प्रभावित कर सकती है।
लेकिन यह फैसला हॉकी जगत में पूरी तरह स्वीकार नहीं हुआ। खास तौर पर इसलिए क्योंकि नीला रंग भारतीय हॉकी की ऐतिहासिक पहचान माना जाता है।
दिलीप तिर्की ने स्पष्ट किया रुख
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप तिर्की ने एशियन गेम्स के लिए नीले रंग को प्राथमिकता दिए जाने की पुष्टि की है।
उन्होंने कहा कि भगवा जर्सी को कभी स्थायी बदलाव के तौर पर पेश नहीं किया गया था। उनके मुताबिक जर्सी के रंग को लेकर कई विकल्प उपलब्ध थे और एशियन गेम्स के लिए नीला रंग फिर से चुना गया है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य की प्रतियोगिताओं में रंग को लेकर कोई स्थायी नीति अभी तय नहीं हुई है।
हॉकी इंडिया के कोषाध्यक्ष सेकर जे. मनोहरन ने भी यही बात दोहराई कि एशियन गेम्स के लिए नीला पहला विकल्प और भगवा दूसरा विकल्प है।
एशियन गेम्स में दो किट का प्रावधान
एशियन गेम्स जैसे बहु-खेल आयोजनों में भारतीय टीमों की किट को लेकर प्रक्रिया हॉकी विश्व कप से कुछ अलग होती है। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय पुरुष और महिला टीमों के लिए दो जर्सी विकल्प होंगे। इनमें एक सफेद और स्काई ब्लू संयोजन वाली जर्सी होगी, जबकि दूसरी जर्सी भगवा रंग की होगी। स्काई ब्लू और सफेद जर्सी 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में इस्तेमाल की गई किट से मिलती-जुलती बताई गई है।
इससे साफ है कि भगवा रंग पूरी तरह किट से बाहर नहीं हुआ है। बदलाव मुख्य रूप से प्राथमिक रंग की पसंद को लेकर है।
अब नजर एशियन गेम्स पर
2026 एशियन गेम्स जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होंगे। भारतीय हॉकी टीमों के लिए यह प्रतियोगिता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा।
भारतीय महिला टीम हालिया विश्व कप में पांचवें स्थान पर रही और अब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरेगी। पुरुष टीम भी टूर्नामेंट में मजबूत प्रदर्शन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करना चाहेगी।
ऐसे में जर्सी को लेकर चली बहस अब धीरे-धीरे खत्म होती नजर आ रही है। पारंपरिक नीले रंग की वापसी से भारतीय हॉकी प्रशंसकों को निश्चित रूप से भावनात्मक जुड़ाव महसूस होगा, लेकिन टीम के लिए असली चुनौती मैदान पर प्रदर्शन की होगी।
एशियन गेम्स में जब भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें नीली जर्सी में उतरेंगी, तो यह सिर्फ रंग की वापसी नहीं बल्कि भारतीय हॉकी की लंबे समय से चली आ रही पहचान की वापसी के रूप में भी देखा जा सकता है। हालांकि भगवा रंग को पूरी तरह हटाया नहीं गया है और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए हॉकी इंडिया बाद में अलग फैसला ले सकती है।
