11 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक विवादित पोस्टर को लेकर सिख और पंजाबी समुदाय में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी इस पोस्टर पर कड़ा विरोध जताया है। पोस्टर में ‘Mr Singh’ को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक संदेश दिया गया, जिसके बाद इसे सिख और भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ नस्लीय प्रोफाइलिंग के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिकी DHS ने 9 सितंबर को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक एआई-जनरेटेड पोस्टर साझा किया था। यह पोस्टर लोकप्रिय ‘Transformers’ फिल्म फ्रेंचाइजी की शैली में तैयार किया गया था और इसका शीर्षक ‘Transformers: Age of Deportations’ रखा गया। इसमें एक DHS-ब्रांडेड ट्रांसफॉर्मर के सामने पगड़ी पहने और दाढ़ी वाले व्यक्ति को दिखाया गया। पोस्टर पर ‘Mr Singh’ को लेकर ऐसा संदेश लिखा गया, जिसे सिख समुदाय ने अपमानजनक और भेदभावपूर्ण बताया।
‘सिंह’ नाम के इस्तेमाल पर उठे सवाल
विवाद का सबसे प्रमुख कारण पोस्टर में ‘Singh’ उपनाम का इस्तेमाल है। सिंह सिख पुरुषों में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला नाम है और अमेरिका में पंजाबी तथा सिख समुदाय की पहचान से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
आलोचकों का कहना है कि किसी विशेष समुदाय से जुड़े आम उपनाम को नकारात्मक संदेश के साथ जोड़ना उस पूरे समुदाय को एक गलत रूढ़ छवि में पेश कर सकता है। भारतीय-अमेरिकी और सिख संगठनों ने भी पोस्टर की आलोचना करते हुए इसे भेदभावपूर्ण करार दिया है।
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की ओर से विरोध ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में सिख समुदाय पहले से ही धार्मिक पहचान और नस्लीय प्रोफाइलिंग से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं उठाता रहा है। धामी ने इससे पहले भी अमेरिका में सिखों के धार्मिक अधिकारों से संबंधित मामलों को लेकर आवाज उठाई है।
सिख पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा
सिख समुदाय के लिए पगड़ी, दाढ़ी और अन्य धार्मिक प्रतीक केवल बाहरी पहचान नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में किसी सरकारी अभियान में सिख पहचान से जुड़े प्रतीकों को नकारात्मक संदर्भ में दिखाए जाने पर समुदाय की ओर से गंभीर आपत्ति स्वाभाविक है।
SGPC पहले भी विदेशों में सिखों के धार्मिक अधिकारों और पहचान से जुड़े मामलों पर हस्तक्षेप की मांग करती रही है। संगठन ने अमेरिका में सिख पुलिस अधिकारियों को दाढ़ी रखने से संबंधित नीति पर भी आपत्ति जताई थी और इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए भारतीय अधिकारियों के हस्तक्षेप की मांग की थी।
पोस्टर का उद्देश्य आव्रजन नीति से जुड़ा
रिपोर्टों के मुताबिक DHS का यह अभियान अमेरिका में अवैध आव्रजन और बिना उचित लाइसेंस वाले वाणिज्यिक ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई के व्यापक संदेश का हिस्सा था। पोस्टर में लोगों से अमेरिकी सड़कों पर ‘illegal aliens’ की रिपोर्ट करने की अपील भी की गई थी।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि आव्रजन कानूनों को लागू करना एक अलग विषय है, लेकिन उसके लिए किसी विशेष जातीय या धार्मिक समुदाय की पहचान से जुड़े नाम और प्रतीकों को नकारात्मक संदेश के साथ इस्तेमाल करना उचित नहीं माना जा सकता।
सिख संगठनों ने जताई नाराजगी
पोस्टर सामने आने के बाद कई सिख और भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने अमेरिकी प्रशासन की आलोचना की। Sikh Coalition और Hindu American Foundation सहित संगठनों ने पोस्टर में इस्तेमाल भाषा और प्रस्तुति को लेकर चिंता जताई। आलोचकों ने कहा कि इस तरह की सामग्री से अमेरिका में रहने वाले मेहनती और कानून का पालन करने वाले भारतीय तथा सिख समुदाय के प्रति गलत धारणा बन सकती है।
कुछ आलोचकों ने यह भी सवाल उठाया कि सरकारी एजेंसी द्वारा प्रचार सामग्री में लोकप्रिय फिल्म पात्रों का इस्तेमाल किस तरह और किस अनुमति के तहत किया गया। इस मामले में ‘Transformers’ से जुड़े अधिकार रखने वाली कंपनी Hasbro ने भी कहा कि उसने इस इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी थी और अपनी असहमति जताई।
अमेरिका में पंजाबी समुदाय का योगदान
अमेरिका में पंजाबी और सिख समुदाय का कृषि, ट्रकिंग, कारोबार, तकनीक, चिकित्सा, सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बड़ी संख्या में पंजाबी मूल के लोग परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी काम करते हैं।
इसी कारण समुदाय से जुड़े संगठनों का मानना है कि किसी एक घटना या कुछ व्यक्तियों के आधार पर पूरे समुदाय को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि कानून तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के आधार पर होनी चाहिए, न कि उसकी धार्मिक या जातीय पहचान के आधार पर।
पोस्टर ने बढ़ाई संवेदनशीलता
यह विवाद अमेरिका में नस्लीय और धार्मिक पहचान को लेकर एक बार फिर बहस को सामने ले आया है। खासकर सिख समुदाय के लिए यह मुद्दा इसलिए संवेदनशील है क्योंकि पगड़ी और दाढ़ी के कारण सिखों की पहचान सार्वजनिक स्थानों पर आसानी से दिखाई देती है।
समुदाय का तर्क है कि सरकारी संचार में ऐसी भाषा और तस्वीरों से बचना चाहिए जो किसी धार्मिक या जातीय समूह के बारे में रूढ़ धारणाओं को मजबूत करती हों। धार्मिक स्वतंत्रता और समानता जैसे मूल्यों के संदर्भ में भी सरकारी संदेशों की भाषा को संवेदनशील बनाए रखना जरूरी है।
धामी के विरोध से मुद्दे को मिली प्रमुखता
SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी के विरोध से इस मामले को सिख धार्मिक संस्थाओं के स्तर पर भी प्रमुखता मिली है। SGPC सिख समुदाय के धार्मिक और सामुदायिक मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर समय-समय पर अपनी प्रतिक्रिया देती रही है।
अमेरिकी DHS के विवादित पोस्टर पर उठी आपत्ति अब केवल सोशल मीडिया विवाद तक सीमित नहीं रह गई है। इसने यह सवाल भी खड़ा किया है कि सरकारी संस्थाओं द्वारा आव्रजन या कानून-व्यवस्था से जुड़े अभियानों में धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं का कितना ध्यान रखा जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद के बीच सिख समुदाय की प्रमुख मांग यही है कि कानून-व्यवस्था या आव्रजन नीति को लागू करते समय किसी समुदाय की धार्मिक पहचान और सम्मान को निशाना न बनाया जाए। SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी का विरोध इसी व्यापक चिंता को सामने रखता है।
