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14 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): महिला एशिया कप 2026 का खिताब जीतने के बावजूद भारतीय महिला क्रिकेट टीम का ट्रॉफी लेने के लिए मंच पर नहीं पहुंचना अब विवाद का केंद्र बन गया है। श्रीलंका को 72 रन से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार एशिया कप चैंपियन बनी भारतीय टीम ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद BCCI ने स्पष्ट किया है कि यह खिलाड़ियों का व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि बोर्ड का सोचा-समझा संस्थागत निर्णय था।

BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने यह फैसला लिया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय टीम की नजर पूरी तरह टूर्नामेंट जीतने पर थी और खिलाड़ियों को अपने खिताब पर गर्व है।

BCCI ने पहले ही ACC को बता दिया था

सैकिया के अनुसार, BCCI ने टूर्नामेंट से पहले ही ACC को अपनी स्थिति से अवगत करा दिया था। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर मोहसिन नकवी पुरस्कार वितरण समारोह में मौजूद रहते हैं और विजेता टीम को ट्रॉफी सौंपते हैं, तो भारतीय टीम उनसे ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी।

इसलिए फाइनल के बाद भारतीय खिलाड़ियों का प्रस्तुति समारोह से दूर रहना अचानक लिया गया फैसला नहीं था। BCCI ने इसे अपनी पूर्व निर्धारित संस्थागत नीति के अनुरूप कदम बताया।

श्रीलंका को हराकर भारत ने जीता आठवां खिताब

दुबई में खेले गए फाइनल में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को 72 रन से हराया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 183 रन बनाए, जिसमें स्मृति मंधाना के 59 और शेफाली वर्मा के 68 रन ने अहम भूमिका निभाई।

जवाब में श्रीलंका की पूरी टीम 111 रन पर आउट हो गई। भारतीय गेंदबाजों की ओर से श्री चरणी ने चार विकेट लेकर श्रीलंका की पारी को समेटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस जीत के साथ भारत ने महिला एशिया कप का अपना रिकॉर्ड आठवां खिताब हासिल किया।

हालांकि मैदान पर भारत की शानदार जीत के बाद पुरस्कार वितरण समारोह राजनीतिक और क्रिकेट कूटनीति से जुड़े विवाद में बदल गया।

पिछले साल की घटना की दोहराई गई तस्वीर

मोहसिन नकवी से ट्रॉफी न लेने का फैसला पहली बार नहीं हुआ है। पिछले साल पुरुष एशिया कप जीतने के बाद भी भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की थी। BCCI ने अब महिला टीम के फैसले को उसी रुख की निरंतरता बताया है।

सैकिया ने मौजूदा स्थिति को 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में आए बदलाव से भी जोड़ते हुए कहा कि इस पृष्ठभूमि में BCCI ने अपनी स्थिति तय की थी।

मोहसिन नकवी एक साथ ACC के अध्यक्ष, PCB के चेयरमैन और पाकिस्तान के गृह मंत्री हैं। इसी कारण BCCI ने उनके हाथों ट्रॉफी लेने को लेकर अपनी आपत्ति जताई।

खिलाड़ियों पर नहीं थोपा गया व्यक्तिगत फैसला

BCCI ने यह भी संकेत दिया कि इस फैसले को खिलाड़ियों के व्यक्तिगत व्यवहार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बोर्ड के मुताबिक, यह एक संस्थागत निर्णय था और टीम ने उसका पालन किया।

भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने भी BCCI के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि टीम बोर्ड के रुख के साथ खड़ी है और खिलाड़ियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात चैंपियन बनना है।

इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई कि ट्रॉफी विवाद के बावजूद भारतीय टीम का ध्यान अपने खेल और खिताबी प्रदर्शन पर था।

ट्रॉफी के बजाय मैदान पर जश्न

पुरस्कार समारोह में भारतीय टीम की अनुपस्थिति के बाद खिलाड़ियों ने मैदान पर ट्रॉफी के बिना ही जश्न मनाया। वहीं प्रस्तुति समारोह में नकवी मौजूद रहे और उन्होंने श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू को उपविजेता का चेक सौंपा।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों में राजनीति और खेल के रिश्ते पर बहस को जन्म दिया है। भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबले पहले से ही दोनों देशों के तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों के कारण संवेदनशील रहे हैं।

BCCI का स्पष्ट संदेश

BCCI के बयान से यह संकेत साफ है कि बोर्ड फिलहाल इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। सैकिया ने कहा कि टीम की उपलब्धि और देश के गौरव को प्राथमिकता दी गई है।

महिला टीम की शानदार जीत ने भारत को रिकॉर्ड आठवां एशिया कप खिताब दिलाया है, लेकिन ट्रॉफी वितरण समारोह की घटना ने टूर्नामेंट के समापन को एक अलग ही विवाद का रूप दे दिया। BCCI ने अपने स्पष्टीकरण के जरिए यह साफ कर दिया है कि नकवी से ट्रॉफी न लेने का फैसला खिलाड़ियों का अचानक लिया गया व्यक्तिगत निर्णय नहीं था, बल्कि बोर्ड की ओर से लिया गया पूर्व नियोजित और संस्थागत फैसला था।

Bharat Baani Bureau

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