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14 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): भारत को डेंगू के खिलाफ अपनी स्वदेशी वैक्सीन अगले साल के अंत तक मिल सकती है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के अनुसार, देश में विकसित की जा रही डेंगू वैक्सीन के अंतिम चरण के परीक्षण चल रहे हैं और इसके परिणाम आने के बाद आगे की नियामकीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

यह घोषणा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब डेंगू भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करता है और मानसून के दौरान मामलों में वृद्धि देखने को मिलती है। स्वदेशी वैक्सीन के सफल विकास से भारत को डेंगू की रोकथाम के लिए एक अतिरिक्त महत्वपूर्ण हथियार मिल सकता है।

DengiAll पर टिकी बड़ी उम्मीद

भारत की स्वदेशी डेंगू वैक्सीन DengiAll को Panacea Biotec ने ICMR के सहयोग से विकसित किया है। यह चारों प्रमुख डेंगू वायरस सीरोटाइप के खिलाफ सुरक्षा देने के उद्देश्य से तैयार की गई टेट्रावैलेंट वैक्सीन है।

इस वैक्सीन का भारत में पहला फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल अगस्त 2024 में शुरू हुआ था। ICMR के अनुसार, यह परीक्षण 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 19 केंद्रों पर किया जा रहा है और इसमें 10,335 स्वस्थ वयस्क स्वयंसेवकों को शामिल किया गया है। परीक्षण का उद्देश्य वैक्सीन की सुरक्षा, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और प्रभावशीलता का आकलन करना है।

ICMR के 2024-25 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, DengiAll देश में डेंगू वैक्सीन विकास की सबसे उन्नत स्वदेशी परियोजनाओं में से एक है।

2027 तक मिल सकती है उपलब्धता

ICMR महानिदेशक के हालिया बयान के मुताबिक, वैक्सीन के फेज-3 परीक्षण के अंतिम नतीजे अगले साल के अंत तक आने की उम्मीद है। हालांकि, ट्रायल के सफल परिणाम के बाद भी वैक्सीन को आम इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने से पहले नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसलिए इसे 2027 के अंत तक संभावित उपलब्धता के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि निश्चित लॉन्च तारीख के रूप में।

वैक्सीन के अंतिम मूल्यांकन में इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा के साथ-साथ अलग-अलग डेंगू सीरोटाइप के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

भारत में पहले ही मंजूर हो चुकी है विदेशी वैक्सीन

इस बीच एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि भारत में डेंगू की पहली वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। जुलाई 2026 में Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) ने Takeda की Qdenga को भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए मार्केटिंग ऑथराइजेशन दिया था।

Qdenga 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए मंजूर की गई है और दो खुराक तीन महीने के अंतराल पर देने की सिफारिश है। सरकार के अनुसार, यह वैक्सीन 42 देशों में मंजूर हो चुकी है और इसे WHO की प्रीक्वालिफिकेशन भी प्राप्त है।

ऐसे में भारत में स्वदेशी वैक्सीन के संभावित आगमन से देश के पास डेंगू से निपटने के लिए एक घरेलू विकल्प भी उपलब्ध हो सकता है।

स्वदेशी वैक्सीन क्यों महत्वपूर्ण?

भारत में विकसित वैक्सीन का महत्व केवल उत्पादन क्षमता तक सीमित नहीं है। डेंगू वायरस के चार प्रमुख सीरोटाइप होते हैं और किसी व्यक्ति को एक सीरोटाइप से संक्रमण होने के बाद दूसरे सीरोटाइप से संक्रमण गंभीर बीमारी का जोखिम बढ़ा सकता है।

ऐसे में भारतीय आबादी में वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता का सीधे आकलन करना महत्वपूर्ण माना जाता है। DengiAll के फेज-3 परीक्षण में बड़ी संख्या में भारतीय प्रतिभागियों को शामिल किया गया है, जिससे देश की आबादी के संदर्भ में महत्वपूर्ण डेटा हासिल होने की उम्मीद है।

वैक्सीन के साथ मच्छर नियंत्रण भी जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू की रोकथाम केवल वैक्सीन पर निर्भर नहीं होगी। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना, साफ-सफाई, पानी जमा न होने देना, समय पर जांच और गंभीर मरीजों का उचित उपचार अभी भी डेंगू नियंत्रण की रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से रहेंगे।

सरकार की मौजूदा रणनीति में वेक्टर कंट्रोल, निगरानी, जल्दी बीमारी की पहचान और केस मैनेजमेंट शामिल हैं। नई वैक्सीन इन प्रयासों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि की उम्मीद

यदि DengiAll के क्लिनिकल परीक्षण सफल रहते हैं और नियामकीय मंजूरी मिल जाती है, तो भारत डेंगू वैक्सीन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्वदेशी उपलब्धि हासिल कर सकता है। इससे देश की वैक्सीन अनुसंधान क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में अन्य संक्रामक बीमारियों के खिलाफ घरेलू वैक्सीन विकसित करने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।

फिलहाल नजर फेज-3 परीक्षण के अंतिम परिणामों पर है। सुरक्षा और प्रभावशीलता के मानकों पर खरी उतरने के बाद ही वैक्सीन के व्यापक इस्तेमाल का रास्ता साफ होगा।

Bharat Baani Bureau

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