15 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो)। खेल की दुनिया में जब कोई भारतीय खिलाड़ी पदक जीतता है तो सुर्खियों में अक्सर उसी का नाम होता है। मंच पर तिरंगा लहराता है, राष्ट्रगान बजता है और खिलाड़ी को देश का नायक बताया जाता है। लेकिन उस चमकदार तस्वीर के पीछे कई ऐसे लोग भी होते हैं जो वर्षों तक खिलाड़ी के साथ खड़े रहते हैं—यात्रा से लेकर ट्रेनिंग, उपकरणों से लेकर प्रशासनिक काम और मानसिक दबाव तक, हर मोर्चे पर।
ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु, पहलवान विनेश फोगाट और भाला फेंक के स्टार नीरज चोपड़ा की यात्राओं में भी ऐसे सहयोगियों की भूमिका रही है। इन्हें खेल की भाषा में अक्सर ‘Man Friday’ कहा जाता है—ऐसा भरोसेमंद व्यक्ति जो खिलाड़ी की जरूरतों को पर्दे के पीछे रहकर संभालता है।
फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने ऐसे सहयोगियों और खिलाड़ियों के बीच संवाद और नेटवर्किंग को आसान बनाया है। यही वजह है कि खेल जगत में सोशल मीडिया को केवल प्रशंसकों से जुड़ने का माध्यम नहीं, बल्कि पेशेवर संपर्क और सहयोग का महत्वपूर्ण जरिया भी माना जाने लगा है।
खिलाड़ी अकेले नहीं बनता चैंपियन
एक एलीट खिलाड़ी की सफलता के पीछे कोच, फिजियो, ट्रेनर, डॉक्टर, मैनेजर, न्यूट्रिशनिस्ट और परिवार के अलावा कई ऐसे लोग होते हैं जिनका नाम शायद ही कभी सुर्खियों में आता है।
किसी खिलाड़ी के टूर्नामेंट तक पहुंचने के लिए यात्रा की योजना, वीजा, होटल, ट्रेनिंग स्लॉट, उपकरण, स्पॉन्सर से जुड़े काम और प्रतियोगिता के दौरान रोजमर्रा की जरूरतों का प्रबंधन करना पड़ता है। शीर्ष स्तर पर ये जिम्मेदारियां इतनी बढ़ जाती हैं कि खिलाड़ी को अपने प्रदर्शन पर ध्यान देने के लिए एक भरोसेमंद सपोर्ट सिस्टम की जरूरत होती है।
सोशल मीडिया ने इस नेटवर्क को एक नया आयाम दिया है। फेसबुक के जरिए खिलाड़ी, परिवार, प्रशंसक, स्थानीय समुदाय और पेशेवर नेटवर्क एक-दूसरे से जुड़े रह सकते हैं।
पीवी सिंधु: कोर्ट पर स्टार, पीछे मजबूत टीम
P. V. Sindhu भारतीय बैडमिंटन की सबसे बड़ी वैश्विक पहचान में से एक हैं। दो ओलंपिक पदक जीतने वाली सिंधु की सफलता को आमतौर पर उनके कोचों और ट्रेनिंग टीम के साथ जोड़ा जाता है।
लेकिन लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में खिलाड़ी के आसपास एक बड़ा सपोर्ट सिस्टम भी काम करता है। टूर्नामेंट कैलेंडर से लेकर यात्रा, मीडिया, ब्रांड और प्रशंसकों से संवाद तक कई जिम्मेदारियां खिलाड़ी के प्रदर्शन के बाहर की दुनिया से जुड़ी होती हैं।
फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म ने इस संपर्क को आसान बनाया है। खिलाड़ी अपने प्रशंसकों से सीधे जुड़ सकते हैं और उनके आसपास का नेटवर्क भी उनकी सार्वजनिक छवि तथा पेशेवर पहचान को मजबूत कर सकता है।
विनेश फोगाट: संघर्ष के बीच सपोर्ट सिस्टम
Vinesh Phogat की कहानी भारतीय खेलों में असाधारण संघर्ष की कहानी रही है। चोटों, वजन प्रबंधन, बड़े टूर्नामेंटों के दबाव और लंबे प्रशिक्षण चक्र के बीच किसी पहलवान को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत रहना पड़ता है।
विनेश की यात्रा ने यह भी दिखाया कि किसी खिलाड़ी के लिए उसका पूरा सपोर्ट सिस्टम कितना महत्वपूर्ण होता है। परिवार और कोच से लेकर मेडिकल और प्रशासनिक सहायता तक, कई लोग खिलाड़ी को उस स्थिति में बनाए रखते हैं जहां वह केवल मुकाबले पर ध्यान दे सके।
सोशल मीडिया ने ऐसे खिलाड़ियों की आवाज को भी व्यापक मंच दिया है। फेसबुक पर खिलाड़ियों की पोस्ट और अपडेट सीधे उनके प्रशंसकों तक पहुंचते हैं, जिससे पारंपरिक मीडिया के बाहर भी खिलाड़ी अपनी कहानी बता सकते हैं।
नीरज चोपड़ा: हर मीटर के पीछे कई लोग
Neeraj Chopra की भाला फेंक में ऐतिहासिक सफलता ने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दी। लेकिन एक एथलीट के प्रदर्शन के पीछे सिर्फ मैदान पर बिताए गए घंटे नहीं होते।
नीरज जैसे विश्वस्तरीय खिलाड़ी के लिए कोचिंग, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग, फिजियोथेरेपी, पोषण, यात्रा और प्रतियोगिता प्रबंधन—सब कुछ एक साथ चलता है। छोटी-सी गलती भी प्रदर्शन पर असर डाल सकती है।
इसीलिए हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स में ‘सपोर्ट स्टाफ’ का महत्व लगातार बढ़ा है। खिलाड़ी के आसपास मौजूद लोग कई बार ऐसे काम करते हैं जिन्हें दर्शक देख ही नहीं पाते।
Facebook ने बदला खिलाड़ियों का नेटवर्क
फेसबुक के शुरुआती दौर में इसे मुख्य रूप से दोस्तों और परिवार से संपर्क का मंच माना जाता था। लेकिन समय के साथ सोशल मीडिया का इस्तेमाल खेल और पेशेवर नेटवर्किंग में भी बढ़ा।
खिलाड़ियों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि वे अपने प्रशंसकों तक सीधे पहुंच सकते हैं। प्रतियोगिता से पहले तैयारी, जीत के बाद प्रतिक्रिया, प्रशिक्षण की झलक या व्यक्तिगत संदेश—सब कुछ सीधे साझा किया जा सकता है।
साथ ही, खेल संगठनों, प्रशिक्षकों, स्पॉन्सर और संभावित सहयोगियों के लिए भी सोशल मीडिया ने खिलाड़ियों तक पहुंच का नया रास्ता तैयार किया है।
‘Man Friday’ की भूमिका अब बदल रही है
आज का ‘Man Friday’ सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा सपोर्ट नेटवर्क हो सकता है। मैनेजर, कोच, एजेंट, सोशल मीडिया विशेषज्ञ, फिजियो और अन्य पेशेवर मिलकर वह व्यवस्था बनाते हैं जो खिलाड़ी को मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने में मदद करती है।
फेसबुक और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस व्यवस्था में संचार को तेज किया है। हालांकि किसी खिलाड़ी की सफलता का श्रेय केवल सोशल मीडिया को देना उचित नहीं होगा। असली आधार मेहनत, प्रतिभा, प्रशिक्षण, अनुशासन और वर्षों की तैयारी है।
फिर भी, आधुनिक खेलों में पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सिंधु, विनेश और नीरज जैसे सितारों की कहानियां इस बात की याद दिलाती हैं कि चैंपियन भले ही एक व्यक्ति हो, लेकिन उसे चैंपियन बनाने वाली टीम कई लोगों की होती है।
