17 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगाए गए विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। नई दरें 16 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गई हैं। सरकार का यह कदम तेल कंपनियों पर निर्यात संबंधी कर बोझ को कम करने और बदलती अंतरराष्ट्रीय बाजार परिस्थितियों के अनुरूप कर व्यवस्था को समायोजित करने के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) के माध्यम से लेवी में समय-समय पर बदलाव करती रही है। इन दरों की समीक्षा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को ध्यान में रखते हुए की जाती है।
16 सितंबर से लागू हुआ बदलाव
केंद्र सरकार के ताजा आदेश के बाद पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर लागू शुल्क में कमी की गई है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कीमतों में काफी अस्थिरता बनी हुई है।
Reuters के अनुसार, सरकार ने 16 सितंबर से इन तीनों पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स घटाया है।
इससे पहले अगस्त में भी सरकार ने पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ ATF के निर्यात पर शुल्क में बदलाव किया था। 14 अगस्त से लागू व्यवस्था में डीजल पर निर्यात शुल्क ₹24 प्रति लीटर, ATF पर ₹19.5 प्रति लीटर और पेट्रोल पर शून्य शुल्क निर्धारित किया गया था।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर
भारत में पेट्रोलियम उत्पादों पर विंडफॉल टैक्स की दरें अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव के साथ समायोजित की जाती हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष और समुद्री व्यापार मार्गों पर तनाव के कारण हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है।
सरकार ने मार्च 2026 में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विशेष लेवी लागू की थी। इसका एक उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और असाधारण रूप से ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों के दौरान घरेलू आपूर्ति पर दबाव को कम करना था।
बाद में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव के साथ इन शुल्कों को कई बार संशोधित किया गया।
घरेलू ईंधन कीमतों से अलग है यह कदम
पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर शुल्क में बदलाव का सीधा अर्थ यह नहीं है कि घरेलू पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में भी तत्काल बदलाव होगा।
सरकार ने पहले भी स्पष्ट किया है कि निर्यात लेवी और घरेलू खपत के लिए लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। मई और जून 2026 में निर्यात शुल्क में कई बदलाव किए गए थे, जबकि घरेलू पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को अलग नीति के तहत संभाला गया।
इसलिए ताजा कटौती का प्रमुख असर पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात कारोबार और रिफाइनिंग कंपनियों की निर्यात अर्थव्यवस्था पर पड़ने की संभावना है।
रिफाइनिंग कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव
भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में शामिल है और देश की कई रिफाइनरियां पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन जैसे उत्पादों का निर्यात भी करती हैं।
निर्यात शुल्क कम होने से भारतीय रिफाइनरों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पाद बेचने की लागत संरचना में बदलाव हो सकता है। इससे वैश्विक कीमतों, कच्चे तेल की खरीद लागत और घरेलू मांग के आधार पर कंपनियां अपने निर्यात और घरेलू बिक्री के बीच संतुलन तय कर सकती हैं।
हालांकि, वास्तविक वित्तीय प्रभाव प्रत्येक कंपनी के कच्चे तेल की लागत, रिफाइनिंग मार्जिन, निर्यात मात्रा और अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों पर निर्भर करेगा।
सरकार की लगातार समीक्षा की नीति
पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात लेवी को 2026 में कई बार बदला गया है। अप्रैल के अंत में डीजल पर शुल्क ₹23 प्रति लीटर और ATF पर ₹33 प्रति लीटर किया गया था, जबकि पेट्रोल पर शुल्क शून्य था।
इसके बाद मई और जून में अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के अनुसार दरों में लगातार कमी की गई। जून की शुरुआत में पेट्रोल पर ₹1.5, डीजल पर ₹13.5 और ATF पर ₹9.5 प्रति लीटर की दर निर्धारित की गई थी।
इसके बाद भी जुलाई और अगस्त में वैश्विक तेल बाजार में बदलाव के अनुरूप शुल्कों को कई बार संशोधित किया गया।
ताजा कटौती से संकेत मिलता है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों के आधार पर निर्यात लेवी को लचीले तरीके से समायोजित कर रही है।
