21 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की ताजा खरीदारी के बीच भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को शुरुआती कारोबार में मजबूती दर्ज की। बीएसई सेंसेक्स 448.32 अंक चढ़कर 74,743.28 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50.30 अंक बढ़कर 23,396.70 पर कारोबार करता नजर आया।
हालांकि, बाजार की तेजी के बावजूद निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी पूंजी के रुझान पर बनी हुई है। इससे पहले भारतीय बाजार लगातार छह सप्ताह की गिरावट का सामना कर चुके हैं।
सेंसेक्स में 448 अंकों की तेजी
सोमवार के शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 448.32 अंक यानी करीब 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,743.28 पर पहुंचा। वहीं, निफ्टी 50 में 50.30 अंक यानी लगभग 0.22 प्रतिशत की तेजी रही और यह 23,396.70 के स्तर पर कारोबार करता रहा।
सुबह करीब 9:30 बजे तक सेंसेक्स की बढ़त 461.30 अंक यानी 0.61 प्रतिशत तक पहुंच गई थी और निफ्टी 47.65 अंक यानी 0.21 प्रतिशत बढ़कर 23,398 के आसपास था। बाजार में बढ़त का दायरा भी सकारात्मक रहा, जिसमें 2,044 शेयर बढ़त में और 1,387 शेयर गिरावट में कारोबार कर रहे थे।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राहत
बाजार की तेजी के प्रमुख कारणों में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट शामिल रही। ब्रेंट क्रूड करीब 2.25 प्रतिशत गिरकर 101.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। अन्य बाजार आंकड़ों में भी ब्रेंट की कीमत लगभग 101.6 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में नरमी से भारतीय अर्थव्यवस्था और उन कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है जिनकी लागत ऊर्जा कीमतों से प्रभावित होती है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं और बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से धारणा मजबूत
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की गतिविधि भी सोमवार के कारोबार में महत्वपूर्ण रही। एक्सचेंज आंकड़ों के अनुसार, 18 सितंबर को FIIs ने भारतीय शेयरों में 599.54 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। इसी सत्र में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी की।
हालांकि, व्यापक तस्वीर में विदेशी निवेशकों की सितंबर में अब तक की स्थिति शुद्ध बिकवाली वाली है। 18 सितंबर तक FIIs ने सितंबर में करीब 23,676.65 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। इसलिए हाल की एक-दो सत्रों की खरीदारी को पूरे महीने के रुझान से अलग देखना जरूरी है।
किन शेयरों में रही तेजी?
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में अल्ट्राटेक सीमेंट, इंटरग्लोब एविएशन, एशियन पेंट्स, सन फार्मा, एचसीएल टेक और ट्रेंट शुरुआती कारोबार में प्रमुख लाभ पाने वालों में रहे।
इसके विपरीत इन्फोसिस, अडानी पोर्ट्स, भारती एयरटेल और पावर ग्रिड दबाव में कारोबार करते दिखाई दिए।
सेक्टर के स्तर पर फार्मा, एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में मजबूती दर्ज की गई, जबकि आईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।
एशियाई बाजारों से मिला समर्थन
भारतीय बाजार को अन्य एशियाई बाजारों से भी सकारात्मक संकेत मिले। शुरुआती कारोबार में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त में कारोबार कर रहे थे। जापान का निक्केई राष्ट्रीय अवकाश के कारण बंद था।
विश्लेषकों ने एशियाई बाजारों की मजबूती को भारतीय शेयरों के लिए सहायक कारक बताया। अमेरिका के बाजार भी शुक्रवार को अधिकांशतः बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे सोमवार को वैश्विक जोखिम धारणा को कुछ समर्थन मिला।
पिछले सप्ताह बाजार में रही थी लगातार गिरावट
सोमवार की तेजी ऐसे समय आई है जब भारतीय शेयर बाजार ने पिछले सप्ताह लगातार छठी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की थी। यह छह सप्ताह की गिरावट लगभग छह वर्षों में बाजार की सबसे लंबी लगातार साप्ताहिक गिरावट रही।
शुक्रवार को सेंसेक्स 19.63 अंक यानी 0.03 प्रतिशत गिरकर 74,294.96 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 75.80 अंक यानी 0.33 प्रतिशत बढ़कर 23,346.40 पर पहुंचा था। निफ्टी की बढ़त लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में रही थी।
पश्चिम एशिया तनाव पर भी नजर
निवेशकों के लिए पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अभी भी प्रमुख जोखिम बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।
यदि क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर फिर दबाव आ सकता है। इसका असर भारत के आयात बिल, मुद्रास्फीति, रुपये और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।
इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल, विदेशी निवेश और प्राथमिक बाजार में जारी गतिविधियां भी भारतीय शेयर बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बने हुए हैं।
आगे निवेशकों की नजर किन संकेतकों पर?
बाजार में सोमवार की शुरुआती तेजी से धारणा में कुछ सुधार जरूर दिखाई दिया, लेकिन व्यापक रुझान को लेकर निवेशक अभी भी सतर्क हैं। कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक बाजारों का रुख आने वाले सत्रों में महत्वपूर्ण रहेंगे।
इसके साथ ही निवेशक कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन, ब्याज दरों की दिशा और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे। फिलहाल शुरुआती तेजी यह दिखाती है कि कम तेल कीमतों और हालिया विदेशी खरीदारी ने बाजार को कुछ राहत दी है, लेकिन सितंबर में विदेशी निवेश की कुल तस्वीर और भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं।
