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4 नवंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो)। देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी (NTPC) ने अपनी उत्पादन क्षमता में बड़े विस्तार की योजना तैयार की है। कंपनी वर्ष 2032 तक अपनी स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 149 गीगावाट (GW) करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए मौजूदा क्षमता में करीब 58 GW की नई क्षमता जोड़ी जाएगी। एनटीपीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित KPMG ENRich 2026 कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी।

गुरदीप सिंह के मुताबिक, कंपनी की मौजूदा स्थापित उत्पादन क्षमता लगभग 91 GW है। प्रस्तावित विस्तार में विभिन्न ऊर्जा स्रोतों को शामिल किया जाएगा, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा और परमाणु बिजली की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। कंपनी का लक्ष्य देश की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के बीच संतुलन बनाना है।

परमाणु ऊर्जा पर भी बढ़ेगा जोर

एनटीपीसी अपनी विस्तार योजना में परमाणु ऊर्जा को विशेष महत्व दे रही है। गुरदीप सिंह ने कहा कि कंपनी परमाणु बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। वर्ष 2037 तक 250 GW क्षमता के व्यापक लक्ष्य के तहत लगभग 30 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

कंपनी ने मध्य प्रदेश, बिहार और ओडिशा में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अध्ययन पूरा कर लिया है। इसके अलावा अन्य राज्यों में भी संभावित स्थानों की तलाश की जाएगी। परमाणु ऊर्जा को लंबे समय तक स्थिर और कम कार्बन उत्सर्जन वाली बिजली आपूर्ति के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

एनटीपीसी का परमाणु क्षेत्र में प्रवेश भारत की ऊर्जा रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इससे कंपनी को पारंपरिक ताप विद्युत उत्पादन के अलावा ऊर्जा के अन्य स्रोतों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

नवीकरणीय ऊर्जा से मिलेगी विस्तार को गति

एनटीपीसी के 2032 के लक्ष्य में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी भी अहम होगी। कंपनी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 149 GW के कुल क्षमता लक्ष्य में करीब 60 GW नवीकरणीय ऊर्जा से हासिल करने की योजना है। इसमें सौर और पवन ऊर्जा के साथ अन्य स्वच्छ ऊर्जा विकल्प भी शामिल हैं।

कंपनी पहले से ही सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार पर काम कर रही है। इसके अलावा बैटरी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भी अवसर तलाशे जा रहे हैं। इन तकनीकों से नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता की चुनौती को कम करने और जरूरत के समय बिजली आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

एनटीपीसी का यह बदलाव भारत के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे व्यापक परिवर्तन के अनुरूप है, जहां बिजली की बढ़ती मांग के साथ उत्सर्जन कम करने और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने पर जोर दिया जा रहा है।

अक्टूबर में बिजली मांग में 21 प्रतिशत वृद्धि

कार्यक्रम में गुरदीप सिंह ने भारतीय बिजली क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारत के बिजली क्षेत्र ने मजबूती दिखाई है। उनके अनुसार, अक्टूबर के दौरान बिजली की मांग में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले करीब 21 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।

उन्होंने कहा कि भारत में ऊर्जा कीमतों में वैसी तेजी नहीं देखी गई जैसी दुनिया के कुछ अन्य हिस्सों में देखने को मिली है। बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए उत्पादन क्षमता का विस्तार आवश्यक है, ताकि उद्योगों, घरेलू उपभोक्ताओं और अन्य क्षेत्रों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जा सके।

देश की बिजली जरूरतों में NTPC की बड़ी भूमिका

एनटीपीसी भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अधीन देश की प्रमुख बिजली उत्पादन कंपनी है। कंपनी देश की कुल बिजली मांग का लगभग एक-चौथाई हिस्सा पूरा करती है। ऐसे में उसकी क्षमता विस्तार योजना का असर देश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ेगा।

कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ताप, जल, सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा सहित विभिन्न स्रोतों का संतुलित पोर्टफोलियो तैयार करना है। इसके साथ ऊर्जा भंडारण और नई तकनीकों में निवेश भी उसकी रणनीति का हिस्सा है।

एनटीपीसी की आधिकारिक चेयरमैन रिपोर्ट में 2032 तक 149 GW क्षमता और 60 GW नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य दोहराया गया है। कंपनी ने 2037 तक अपनी कुल क्षमता को 244 GW तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना भी रखी है।

ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर

58 GW की नई क्षमता जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश, परियोजना निर्माण, उपकरणों की आपूर्ति और तकनीकी सेवाओं की जरूरत होगी। इससे बिजली उपकरण निर्माण, इंजीनियरिंग, निर्माण कार्य, ऊर्जा भंडारण और संबंधित उद्योगों में नए कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।

हालांकि, लक्ष्य हासिल करने के लिए भूमि उपलब्धता, पर्यावरणीय मंजूरियां, परियोजनाओं का समय पर निर्माण, वित्तीय संसाधन और बिजली ग्रिड की क्षमता जैसे पहलुओं पर ध्यान देना होगा। परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए नियामकीय मंजूरियां और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी।

कुल मिलाकर, एनटीपीसी की 149 GW क्षमता तक पहुंचने की योजना भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले वर्षों में कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह पारंपरिक बिजली उत्पादन के साथ नवीकरणीय और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से पूरा कर पाती है।

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