Notice: Trying to get property 'post_content' of non-object in /home/bharatbaani/htdocs/bharatbaani.com/wp-content/plugins/custom-css-js/custom-css-js.php on line 203

29 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लागू शुल्क ढांचे में बदलाव करते हुए डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स को ₹24 से घटाकर ₹19 प्रति लीटर कर दिया है। इसके साथ ही डीजल निर्यात पर लगने वाले रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) को ₹3 से घटाकर ₹1 प्रति लीटर किया गया है। नई दरें 1 सितंबर 2026 से प्रभावी की गई थीं।

यह बदलाव सरकार द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क की समय-समय पर की जाने वाली समीक्षा का हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और वैश्विक ईंधन बाजार की परिस्थितियों के आधार पर इन शुल्कों में बदलाव किया जाता है।

डीजल पर दो अलग-अलग शुल्कों में कटौती

सरकार के संशोधित शुल्क ढांचे में डीजल निर्यात पर दो अलग-अलग शुल्कों में बदलाव किया गया है। विंडफॉल टैक्स ₹24 से घटकर ₹19 प्रति लीटर हुआ, जबकि RIC ₹3 से घटकर ₹1 प्रति लीटर किया गया।

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की अधिसूचना के अनुसार, RIC में यह बदलाव 1 सितंबर से प्रभावी हुआ। इससे पहले डीजल निर्यात पर RIC की दर ₹3 प्रति लीटर थी।

इस तरह डीजल निर्यातकों पर शुल्क का कुल बोझ पहले की तुलना में कम हुआ है। हालांकि, विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू शुल्क अलग-अलग हैं और समय-समय पर उनमें संशोधन किया जाता है।

पेट्रोल और ATF पर भी शुल्क में बदलाव

सरकार ने केवल डीजल पर ही शुल्क में बदलाव नहीं किया है। अगस्त के मध्य में पेट्रोल निर्यात पर शुल्क को शून्य कर दिया गया था, जबकि डीजल पर ₹24 प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ₹19.50 प्रति लीटर का लेवी ढांचे में था।

सितंबर की शुरुआत में सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क की समीक्षा करते हुए अलग-अलग उत्पादों के लिए नई दरें लागू कीं। सरकार का यह शुल्क ढांचा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में होने वाले बदलावों के अनुरूप समय-समय पर संशोधित किया जाता है।

क्या है विंडफॉल टैक्स?

विंडफॉल टैक्स यानी Special Additional Excise Duty (SAED) ऐसा अतिरिक्त कर है जिसे सरकार असाधारण रूप से ऊंचे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मूल्यों से होने वाले अतिरिक्त लाभ पर लागू कर सकती है।

भारत में घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल और कुछ पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर इस तरह के शुल्क लगाए जाते रहे हैं। इसका उद्देश्य वैश्विक कीमतों में असामान्य तेजी से पैदा होने वाले अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा सरकारी राजस्व के रूप में हासिल करना है।

हालांकि, विंडफॉल टैक्स की दर स्थायी नहीं होती। सरकार इसे बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बढ़ा या घटा सकती है।

निर्यातकों पर क्या होगा असर?

डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स और RIC में कटौती से निर्यात करने वाली रिफाइनरी कंपनियों के प्रति लीटर शुल्क में कमी आती है। इससे समान अंतरराष्ट्रीय कीमतों की स्थिति में निर्यात मार्जिन पर शुल्क का दबाव कम हो सकता है।

भारत में बड़ी रिफाइनरियां घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करती हैं। इसलिए निर्यात शुल्क में बदलाव का असर उनके व्यापारिक गणित पर पड़ सकता है।

हालांकि, कंपनियों की वास्तविक लाभप्रदता केवल सरकारी शुल्क पर निर्भर नहीं करती। इसमें कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग मार्जिन, अंतरराष्ट्रीय डीजल कीमतें, माल ढुलाई और मुद्रा विनिमय दर जैसे कई कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

घरेलू पेट्रोल-डीजल कीमतों पर सीधा असर नहीं

निर्यात शुल्क में यह बदलाव मुख्य रूप से भारत से बाहर भेजे जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों से संबंधित है। इसलिए इसे घरेलू पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तत्काल कटौती के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

भारत में घरेलू ईंधन कीमतों का निर्धारण अलग-अलग कारकों से प्रभावित होता है। केंद्र और राज्य कर, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, रिफाइनिंग लागत और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति इसमें भूमिका निभाती है।

इसलिए डीजल निर्यात पर RIC और विंडफॉल टैक्स में कमी का अर्थ यह नहीं है कि देश के पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत भी उसी अनुपात में कम हो जाएगी।

सरकार की लगातार समीक्षा जारी

पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क की समीक्षा सरकार द्वारा नियमित अंतराल पर की जाती है। हाल के महीनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

ऐसे माहौल में सरकार के लिए एक ओर घरेलू ईंधन आपूर्ति और कीमतों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर रिफाइनिंग और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े राजस्व पर भी ध्यान देना होता है।

डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स को ₹19 प्रति लीटर और RIC को ₹1 प्रति लीटर करने का फैसला इसी बदलते शुल्क ढांचे का हिस्सा है। आगे अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर इन दरों में फिर बदलाव संभव है।

Bharat Baani Bureau

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *