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30 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को लगातार दो सत्रों की गिरावट के बाद सकारात्मक शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 190 अंक चढ़ा, जबकि Nifty 50 में भी तेजी दर्ज की गई। इससे निवेशकों को हालिया बिकवाली के बाद कुछ राहत मिली। बाजार में आई यह मजबूती मुख्य रूप से आईटी शेयरों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच देखने को मिली।

मंगलवार को भारतीय बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे। Sensex 72,529.07 के स्तर पर 0.33 प्रतिशत नीचे बंद हुआ, जबकि Nifty 50 में 0.28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इससे पहले सोमवार को भी दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई थी।

शुरुआती कारोबार में खरीदारी का सहारा

बुधवार की शुरुआत में निवेशकों ने हालिया गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की। Reuters के अनुसार, शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 0.46 प्रतिशत बढ़कर 72,877.11 तक पहुंचा, जबकि Nifty 50 लगभग 0.2 प्रतिशत ऊपर रहा। इससे संकेत मिला कि लगातार दो दिन की तेज बिकवाली के बाद बाजार में कुछ स्थिरता लौटने की कोशिश हुई।

हालांकि, बाजार की व्यापक तस्वीर अभी भी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई है। सितंबर में भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों पर काफी दबाव रहा है और महीने के दौरान Nifty 50 में लगभग 5.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

IT शेयरों में जोरदार तेजी

बुधवार के शुरुआती कारोबार में IT शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। Reuters के अनुसार, Nifty IT index में करीब 2.6 प्रतिशत की तेजी आई। अमेरिकी ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की आशंकाओं में कमी से टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी।

ICICI Bank और Reliance Industries जैसे बड़े शेयरों में भी तेजी रही। Reuters के मुताबिक, शुरुआती कारोबार में दोनों शेयरों में करीब 2 प्रतिशत और 1 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। इसके विपरीत HDFC Bank में लगभग 1.2 प्रतिशत की गिरावट रही।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से राहत

भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी भी सकारात्मक संकेत रही। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की ऊंची कीमतें देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

मंगलवार को बाजार पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर साफ दिखाई दिया था। Brent crude करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा, जबकि अमेरिका में 10-वर्षीय Treasury yield भी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी। इन दोनों कारकों ने भारतीय शेयर बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ाई थी।

बुधवार को तेल कीमतों में कुछ नरमी और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों में बदलाव ने बाजार को शुरुआती राहत दी। Reuters के अनुसार, अमेरिकी Federal Reserve की अक्टूबर बैठक में दर बढ़ोतरी की संभावना को लेकर बाजार की धारणा में कमी आई है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी चिंता

शेयर बाजार में शुरुआती तेजी के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की बिकवाली एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है। Moneycontrol के अनुसार, 29 सितंबर को FIIs ने भारतीय शेयरों में करीब ₹10,000 करोड़ की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने करीब ₹7,000 करोड़ की खरीदारी की। यह लगातार विदेशी बिकवाली और घरेलू निवेशकों के समर्थन के बीच अंतर को दर्शाता है।

Reuters के अनुसार, सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 2.7 अरब डॉलर निकाले हैं। वर्ष की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेश का कुल बहिर्वाह करीब 26.75 अरब डॉलर बताया गया है।

सितंबर में बाजार पर कई दबाव

सितंबर के दौरान भारतीय बाजार को कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों से दबाव मिला। अमेरिका-ईरान तनाव और मध्य पूर्व में जारी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव रहा। इसके अलावा अमेरिकी Treasury yields में तेजी ने उभरते बाजारों में विदेशी निवेश को प्रभावित किया।

28 सितंबर को Sensex 1.52 प्रतिशत और Nifty 1.56 प्रतिशत गिरकर करीब छह महीने के निचले स्तरों के आसपास पहुंच गए थे। इसके अगले दिन भी दोनों सूचकांकों में गिरावट जारी रही।

आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर?

बुधवार की शुरुआती तेजी को हालिया गिरावट के बाद बाजार में आई राहत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति से प्रभावित हो सकती है।

बाजार के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण संकेत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और Federal Reserve अधिकारियों के बयान होंगे। ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों में बदलाव का सीधा असर वैश्विक पूंजी प्रवाह और उभरते बाजारों पर पड़ सकता है।

इस तरह, दो दिनों की गिरावट के बाद Sensex और Nifty में शुरुआती सुधार ने निवेशकों को कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन विदेशी बिकवाली और वैश्विक आर्थिक जोखिमों के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

Bharat Baani Bureau

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