16 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ने के बावजूद पेशेवर मदद लेने में लंबी देरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। मानसिक स्वास्थ्य संगठन Amaha की Mental Health Report 2026 के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल आधे से अधिक लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के शुरू होने के एक साल से अधिक समय बाद पेशेवर सहायता ली। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मदद लेने से पहले बड़ी संख्या में लोगों ने खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आने की बात कही।
रिपोर्ट का शीर्षक Understanding the Journey to Care in India है। यह उन लोगों के अनुभवों पर आधारित है जिन्होंने Amaha के साथ मानसिक स्वास्थ्य देखभाल शुरू करने से पहले अपनी परेशानियों और मदद पाने के सफर के बारे में जानकारी दी।
13,825 लोगों के अनुभवों पर आधारित रिपोर्ट
Amaha की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 13,825 लोगों की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया गया। इनमें से 53 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे पेशेवर मदद लेने से पहले एक साल से अधिक समय तक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझते रहे। केवल 11.3 प्रतिशत लोग परेशानी महसूस होने के एक महीने के भीतर देखभाल तक पहुंचे।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। आंकड़े यह नहीं बताते कि सभी लोगों को डॉक्टर या थेरेपिस्ट से मिलने के लिए एक साल तक अपॉइंटमेंट का इंतजार करना पड़ा। रिपोर्ट मुख्य रूप से यह दिखाती है कि लोगों ने मानसिक परेशानी महसूस करने और पेशेवर मदद लेने के बीच कितना समय बिताया। इसमें सामाजिक झिझक, समस्या को पहचानने में कठिनाई और खुद ही स्थिति संभालने की कोशिश जैसे पहलू शामिल हो सकते हैं।
चिंता, तनाव और कम मनोदशा सबसे आम परेशानियां
रिपोर्ट में शामिल लोगों ने अक्सर एक से अधिक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का अनुभव किया। Amaha के अनुसार, 94.9 प्रतिशत लोगों ने दो या उससे अधिक चिंताएं बताईं और औसतन प्रत्येक व्यक्ति ने लगभग पांच तरह की परेशानियों का उल्लेख किया।
इनमें चिंता यानी एंग्जायटी सबसे आम थी, जिसका उल्लेख 72.1 प्रतिशत लोगों ने किया। इसके बाद तनाव 67.5 प्रतिशत, कम मनोदशा 58.3 प्रतिशत, रिश्तों से जुड़ी कठिनाइयां 55.6 प्रतिशत और बार-बार मूड बदलने की समस्या 54.1 प्रतिशत लोगों में दर्ज की गई।
ये आंकड़े बताते हैं कि मानसिक परेशानी हमेशा किसी एक स्पष्ट लक्षण के रूप में सामने नहीं आती। नींद में बदलाव, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, रिश्तों में तनाव और रोजमर्रा के कामों को पूरा करने में परेशानी भी किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हो सकती है।
मदद लेने से पहले खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार
रिपोर्ट का सबसे गंभीर निष्कर्ष यह है कि 56.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने पेशेवर सहायता लेने से पहले खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आने की बात कही। छात्रों में यह अनुपात 71.7 प्रतिशत और बेरोजगार लोगों में 64.7 प्रतिशत था, जबकि कामकाजी पेशेवरों में यह 53.2 प्रतिशत दर्ज किया गया।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि एक साल से अधिक समय तक मदद लेने में देरी करने वाले लोगों में ऐसे विचारों की रिपोर्टिंग, परेशानी सामने आने के कुछ दिनों के भीतर मदद लेने वालों की तुलना में अधिक थी। हालांकि, यह संबंध अपने आप में यह साबित नहीं करता कि देरी ही इसका एकमात्र कारण थी।
परिवार, दोस्तों और खुद से मदद की कोशिश
पेशेवर सहायता लेने से पहले 54.5 प्रतिशत लोगों ने दोस्तों या परिवार से बात की थी, जबकि 44.6 प्रतिशत ने खुद अपनी समस्या संभालने की कोशिश की। लगभग 32.9 प्रतिशत लोगों ने पहले थेरेपी आजमाई थी और 19.4 प्रतिशत को दवा दी गई थी।
कई लोग व्यस्त रहने, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, जरूरत से ज्यादा सोने या मुश्किल भावनाओं से बचने जैसी आदतों के सहारे स्थिति संभालने की कोशिश करते हैं। ये तरीके कुछ समय के लिए ध्यान भटका सकते हैं, लेकिन लगातार परेशानी बने रहने पर पेशेवर मदद की जरूरत हो सकती है।
समय पर सहायता क्यों जरूरी है?
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को केवल सामान्य तनाव समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना व्यक्ति के काम, पढ़ाई, रिश्तों और दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पेशेवर मदद तक पहुंचने के समय केवल 12.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपने सभी दैनिक काम संभाल पा रहे थे, जबकि 27.3 प्रतिशत लोग अधिकांश या कोई भी काम ठीक से नहीं कर पा रहे थे।
रिपोर्ट के निष्कर्षों को पूरे भारत की आबादी का प्रतिनिधि सर्वेक्षण नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि इसमें उन लोगों के अनुभव शामिल हैं जो अंततः Amaha तक पहुंचे। फिर भी, ये आंकड़े मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने और शुरुआती स्तर पर परेशानी पहचानने की जरूरत को रेखांकित करते हैं।
मानसिक परेशानी होने पर भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना और योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना मददगार हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आ रहे हों, तो उसे अकेला न छोड़ें और तुरंत पेशेवर सहायता लें। भारत में सरकारी टेली-मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन Tele-MANAS: 14416 पर निःशुल्क सहायता उपलब्ध है। तत्काल आपात स्थिति में 112 पर संपर्क किया जा सकता है।
