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21 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर अब कप्तानी की जिम्मेदारियों से मुक्त होकर अपने खेल पर पूरा ध्यान देना चाहती हैं। भारत की पूर्व कप्तान ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में तूफानी नाबाद 91 रन बनाने के बाद कहा कि अब वह मैदान पर बिना अतिरिक्त दबाव के खेलने और बल्लेबाजी का आनंद लेने पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं। उनकी इस पारी ने न केवल भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई, बल्कि कप्तानी छोड़ने के बाद उनके नए दौर की शानदार शुरुआत का संकेत भी दिया।

हरमनप्रीत ने 41 गेंदों में नाबाद 91 रन बनाए। उनकी पारी में 10 चौके और पांच छक्के शामिल रहे। इस आक्रामक प्रदर्शन के दम पर भारत ने निर्धारित 20 ओवर में चार विकेट पर 216 रन बनाए और मुकाबला 92 रन से जीत लिया। भारतीय टीम ने तीन मैचों की टी20 सीरीज में जिम्बाब्वे का 3-0 से सफाया किया।

‘अब मैदान पर आनंद लेना चाहती हूं’

मैच के बाद हरमनप्रीत ने कहा कि कप्तानी की जिम्मेदारी छोड़ने के बाद अब वह अपने खेल का आनंद लेने पर ध्यान दे रही हैं। उनके मुताबिक, अब उनके ऊपर पहले जैसा दबाव महसूस नहीं होता और वह मैदान पर अपने समय का भरपूर उपयोग करना चाहती हैं।

हरमनप्रीत के बयान से साफ है कि वह अपने करियर के इस नए चरण में बल्लेबाजी को अधिक सहजता और स्पष्टता के साथ आगे बढ़ाना चाहती हैं। कप्तान के रूप में खिलाड़ी को अपनी व्यक्तिगत पारी के साथ टीम के प्रदर्शन, रणनीति, गेंदबाजी में बदलाव और मैदान पर फैसलों की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है। अब उनका ध्यान अपनी बल्लेबाजी की भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाने पर रहेगा।

आठ पारियों के बाद आया बड़ा स्कोर

जिम्बाब्वे के खिलाफ यह पारी हरमनप्रीत के लिए खास रही। इससे पहले वह लगातार आठ पारियों में अर्धशतक नहीं लगा पाई थीं। तीसरे टी20 मुकाबले में उन्होंने शुरुआत से ही सकारात्मक रुख अपनाया और तेजी से रन बनाए।

हरमनप्रीत ने अपनी बल्लेबाजी में आक्रामक शॉट्स के साथ अच्छा संतुलन दिखाया। 41 गेंदों पर 91 रन की नाबाद पारी ने उनके आत्मविश्वास और बड़े स्कोर बनाने की क्षमता को फिर सामने ला दिया। उनकी पारी ने भारतीय टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया, जिसके जवाब में जिम्बाब्वे की टीम लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी।

इस प्रदर्शन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह कप्तानी छोड़ने के बाद उनकी पहली सीरीज में आया। इससे पहले कप्तानी की जिम्मेदारियों के बीच व्यक्तिगत प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा होती रही थी। अब वह एक खिलाड़ी के रूप में अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए तैयार हैं।

बल्लेबाजी कोच और अभ्यास को दिया श्रेय

हरमनप्रीत ने अपनी पारी का श्रेय अभ्यास और बल्लेबाजी कोच हिमांशु को भी दिया। उन्होंने बताया कि नेट्स में नियमित मेहनत और तकनीक पर काम करने से उन्हें मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिली।

उन्होंने अभ्यास सत्रों में दबाव जैसी परिस्थितियों का सामना करने के महत्व पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि नेट्स में सही तैयारी होने से मैच के दौरान अतिरिक्त दबाव महसूस नहीं होता और खिलाड़ी अपने स्वाभाविक खेल को बेहतर तरीके से सामने रख सकता है।

हरमनप्रीत ने इस सीरीज से पहले परिस्थितियों के अनुरूप तैयारी करने के लिए नेट्स में काफी समय बिताया था। उनके मुताबिक, अभ्यास और बल्लेबाजी की लय पर लगातार काम करने से उन्हें अपनी पारी को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

कप्तानी से विदाई, लेकिन टीम के लिए योगदान जारी

हरमनप्रीत कौर ने 6 अक्टूबर 2026 को भारतीय महिला टीम की तीनों प्रारूपों में कप्तानी छोड़ने का फैसला किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह खिलाड़ी के रूप में भारत के लिए खेलना जारी रखेंगी। स्मृति मंधाना को नई कप्तान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

हरमनप्रीत का कप्तानी कार्यकाल भारतीय महिला क्रिकेट के महत्वपूर्ण दौर से जुड़ा रहा। उन्होंने 2016 में टी20 टीम की कप्तानी संभाली और 2022 में वनडे तथा टेस्ट टीम की पूर्णकालिक कप्तान बनीं। उनके नेतृत्व में भारत ने 2025 में पहली बार महिला वनडे विश्व कप का खिताब जीता। उन्होंने कई बड़े टूर्नामेंटों में टीम का नेतृत्व करते हुए भारतीय महिला क्रिकेट को नई पहचान दिलाने में योगदान दिया।

कप्तानी छोड़ना किसी भी अनुभवी खिलाड़ी के लिए भावनात्मक फैसला हो सकता है, खासकर तब जब उसने कई वर्षों तक टीम का नेतृत्व किया हो। हरमनप्रीत के लिए भी यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण बदलाव है। हालांकि, अब उनकी भूमिका बदल गई है, लेकिन टीम को उनका अनुभव और मैदान पर योगदान मिलता रहेगा।

आगे की चुनौती: प्रदर्शन में निरंतरता

जिम्बाब्वे के खिलाफ 91 रन की पारी हरमनप्रीत के लिए सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन आगे की चुनौती इस प्रदर्शन को निरंतर बनाए रखने की होगी। भारतीय टीम को आगामी मुकाबलों में उनकी मध्यक्रम की बल्लेबाजी, अनुभव और दबाव के क्षणों में जिम्मेदारी निभाने की क्षमता की जरूरत रहेगी।

कप्तानी का बोझ कम होने से हरमनप्रीत को अपनी बल्लेबाजी, फिटनेस और तकनीक पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रदर्शन का दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं होता। एक वरिष्ठ खिलाड़ी के तौर पर उनसे रन बनाने और टीम को मुश्किल परिस्थितियों से निकालने की अपेक्षा बनी रहेगी।

फिलहाल, जिम्बाब्वे के खिलाफ उनकी शानदार पारी ने यह दिखाया है कि हरमनप्रीत अपने नए दौर का स्वागत सकारात्मक सोच के साथ कर रही हैं। उनका संदेश स्पष्ट है—अब मैदान पर उतरना, अपने खेल पर भरोसा करना और क्रिकेट का आनंद लेना ही उनकी प्राथमिकता है।

Bharat Baani Bureau

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