28 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : पंजाब के जालंधर में अंतरराष्ट्रीय हॉकी की वापसी भारतीय खिलाड़ियों के परिवारों के लिए गर्व, खुशी और भावनाओं से भरा यादगार पल बन गई। मंगलवार को ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी-2026 के उद्घाटन मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को 13-0 से हराया। लेकिन इस शानदार जीत से इतर, स्टेडियम में मौजूद खिलाड़ियों के परिजनों के लिए अपने बेटे और पति को भारतीय जर्सी में घरेलू मैदान पर खेलते देखना सबसे खास अनुभव रहा।
पहली बार बेटे को खेलते देखने पहुंचे हरमनप्रीत के पिता
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह के पिता सरबजीत सिंह के लिए यह मुकाबला बेहद भावुक रहा। हरमनप्रीत 250 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं, लेकिन उनके पिता ने उन्हें इससे पहले स्टेडियम में भारत के लिए खेलते हुए प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा था।
सरबजीत को वह समय याद आया, जब वह अपने छोटे बेटे को जालंधर की सुरजीत हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण के लिए छोड़ने आते थे। उस समय हरमनप्रीत अपने खेल को लेकर उत्साहित रहते थे। वर्षों बाद उसी शहर में बेटे को भारतीय टीम की कप्तानी करते देखना उनके लिए एक सपने के सच होने जैसा था।
पिछले वर्ष किडनी ट्रांसप्लांट कराने के बाद सरबजीत का बाहर निकलना कम हो गया था, लेकिन बेटे को जालंधर में खेलते देखने का अवसर वह छोड़ना नहीं चाहते थे। मैच से पहले हरमनप्रीत ने दर्शक दीर्घा में अपने परिवार को देखा और उनकी ओर हाथ हिलाकर अभिवादन किया।
सुखजीत सिंह के परिवार के लिए भी खास दिन
भारतीय खिलाड़ी सुखजीत सिंह के पिता अजीत सिंह के लिए भी यह अवसर भावनाओं से जुड़ा था। पंजाब पुलिस में हॉकी खेल चुके अजीत सिंह अपने बेटे को अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में प्रत्यक्ष रूप से खेलते देख रहे थे।
उन्होंने याद किया कि जब सुखजीत करीब चार साल के थे, तब उन्होंने उन्हें हॉकी स्टिक काटकर दी थी। सुखजीत के करियर में 2018 में बड़ा झटका आया, जब एक उपचार प्रक्रिया में गड़बड़ी के बाद वह आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गए थे। उस समय उनके दोबारा हॉकी खेलने पर भी सवाल उठे थे। हालांकि, परिवार के सहयोग और उनकी मेहनत से उन्होंने वापसी की और 2022 में भारतीय टीम के लिए पदार्पण किया।
अपने बेटे को भारत का प्रतिनिधित्व करते देख अजीत सिंह ने गर्व जताया। यह पल उनके लिए वर्षों के संघर्ष, अभ्यास और परिवार के समर्थन का परिणाम था।
हार्दिक सिंह के परिवार ने भी सहेजी यादें
भारतीय टीम के उपकप्तान हार्दिक सिंह के पिता वरिंदरप्रीत सिंह राय भी इस मुकाबले से भावनात्मक रूप से जुड़े थे। वह पंजाब पुलिस में अधिकारी हैं और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसके बावजूद वह कुछ समय के लिए वीआईपी दर्शक दीर्घा में पहुंचे और अपनी पत्नी को बेटे की तस्वीरें लेने की याद दिलाई।
उनके लिए जालंधर में हार्दिक को भारतीय जर्सी में खेलते देखना गर्व का क्षण था। हार्दिक बचपन से ही भारत के लिए खेलने का सपना देखते आए थे और परिवार ने उनकी इस यात्रा को करीब से देखा है।
मनदीप के गोल और परिवार की खुशी
भारतीय खिलाड़ी मनदीप सिंह के पिता रविंदर सिंह भी मैच के दौरान तस्वीरें और सेल्फी लेते नजर आए। उन्होंने अपने बेटे के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि वह उसे बाइक पर बैठाकर अकादमी में प्रशिक्षण के लिए ले जाते थे। आज उसी खिलाड़ी को भारतीय टीम की बस से स्टेडियम पहुंचते और देश के लिए गोल करते देखना परिवार के लिए बेहद खास था।
मनदीप ने मुकाबले में तीन गोल किए। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने दो गोल दागे, जबकि हार्दिक सिंह और दिलप्रीत सिंह ने भी दो-दो गोल किए। भारत की ओर से शिलानंद लकड़ा, अभिषेक नैन, जुगराज सिंह और नीलकांत शर्मा ने भी गोल किए।
चोट के बावजूद मनप्रीत के परिवार ने बढ़ाया हौसला
पूर्व भारतीय कप्तान और मिडफील्डर मनप्रीत सिंह पिंडली की चोट के कारण टूर्नामेंट में नहीं खेल सके। हालांकि, उनकी पत्नी इली नजवा सादिक और दोनों बेटियां भारतीय टीम का समर्थन करने स्टेडियम पहुंचीं। परिवार को उम्मीद है कि मनप्रीत स्वस्थ होकर भविष्य में पंजाब में भारत की जर्सी पहनकर खेलने का अवसर हासिल करेंगे।
हॉकी विरासत का जश्न
मैच से पहले उद्घाटन समारोह में भारतीय हॉकी के दिग्गज खिलाड़ियों बलबीर सिंह सीनियर, अजीत पाल सिंह और हरमनप्रीत सिंह को समर्पित विशेष प्रस्तुति दिखाई गई। इस दौरान कई दर्शक भावुक हो गए। ड्रोन शो में पंजाब की हॉकी परंपरा और खेल से जुड़े ऐतिहासिक स्थानों को भी दर्शाया गया।
एशियन चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक जालंधर और मोहाली में किया जा रहा है। पंजाब में 17 साल बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी की वापसी ने उन खिलाड़ियों के लिए इस प्रतियोगिता को और खास बना दिया है, जिन्होंने इसी राज्य की अकादमियों और मैदानों में खेलना सीखा था।
भारत की बड़ी जीत ने प्रशंसकों को जश्न मनाने का मौका दिया, लेकिन परिवारों के लिए इस दिन की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने प्रियजनों को देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी आंखों के सामने देखना था। यह मुकाबला सिर्फ गोल और स्कोर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन वर्षों की मेहनत, त्याग और पारिवारिक सहयोग का उत्सव भी बना, जिसने खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
