Warning: Attempt to read property "post_content" on null in /home/bharatbaani/htdocs/bharatbaani.com/wp-content/plugins/custom-css-js/custom-css-js.php on line 203

30 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : माइग्रेन को अक्सर वयस्कों की समस्या माना जाता है, लेकिन यह बच्चों और किशोरों को भी प्रभावित कर सकता है। बचपन में होने वाला माइग्रेन केवल तेज सिरदर्द तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसका असर बच्चे की पढ़ाई, खेलकूद, नींद, सामाजिक गतिविधियों और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आनुवंशिक कारणों के साथ-साथ जीवनशैली से जुड़ी कई आदतें माइग्रेन के लक्षणों को बढ़ाने में भूमिका निभा सकती हैं।

बच्चों में माइग्रेन की पहचान करना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि वे हमेशा अपने दर्द और उससे जुड़े लक्षणों को स्पष्ट रूप से बता नहीं पाते। कुछ बच्चों को सिर के एक हिस्से में दर्द होता है, जबकि कुछ को पूरे सिर में परेशानी महसूस हो सकती है। इसके साथ मतली, उल्टी, रोशनी और तेज आवाज के प्रति संवेदनशीलता तथा थकान जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

जीवनशैली से जुड़े प्रमुख कारक

बच्चों में माइग्रेन के दौरे कई बार रोजमर्रा की आदतों से प्रभावित होते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई एक आदत ही माइग्रेन का कारण बनती है, बल्कि अलग-अलग कारक मिलकर सिरदर्द की समस्या को बढ़ा सकते हैं।

1. नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या

बच्चों के लिए पर्याप्त और नियमित नींद बेहद जरूरी है। देर रात तक जागना, सोने-जागने का समय बार-बार बदलना या नींद पूरी न होना माइग्रेन के दौरे को ट्रिगर कर सकता है। विशेषज्ञ बच्चों के लिए उम्र के अनुसार पर्याप्त नींद और नियमित सोने का समय बनाए रखने की सलाह देते हैं।

2. भोजन छोड़ना और लंबे समय तक भूखे रहना

स्कूल की व्यस्तता या अन्य गतिविधियों के कारण कई बच्चे नाश्ता छोड़ देते हैं या समय पर भोजन नहीं करते। लंबे समय तक भूखे रहने से कुछ बच्चों में सिरदर्द की समस्या बढ़ सकती है। नियमित अंतराल पर संतुलित भोजन करना और जरूरत के अनुसार पौष्टिक स्नैक्स देना उपयोगी हो सकता है।

3. पानी की कमी

शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी सिरदर्द को बढ़ा सकती है। खेलकूद, गर्म मौसम और शारीरिक गतिविधियों के दौरान बच्चों को पर्याप्त पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

4. स्क्रीन टाइम और आंखों पर दबाव

मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर और टीवी का लंबे समय तक इस्तेमाल कुछ बच्चों में सिरदर्द को बढ़ा सकता है। लगातार स्क्रीन देखने, तेज चमक और खराब बैठने की मुद्रा से परेशानी हो सकती है। नियमित ब्रेक लेना, स्क्रीन की चमक नियंत्रित रखना और सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना बेहतर आदतें हैं।

5. तनाव और मानसिक दबाव

पढ़ाई, परीक्षा, स्कूल में प्रतिस्पर्धा, दोस्तों के साथ संबंध और पारिवारिक परिस्थितियां बच्चों में तनाव पैदा कर सकती हैं। तनाव कुछ बच्चों में माइग्रेन के दौरे को ट्रिगर कर सकता है। बच्चों से खुलकर बातचीत करना, उन्हें पर्याप्त आराम और मनोरंजन का समय देना तथा जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग की मदद लेना उपयोगी हो सकता है।

6. शारीरिक गतिविधि की कमी

नियमित शारीरिक गतिविधि बच्चों के समग्र स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। हालांकि, अचानक बहुत अधिक मेहनत करना या पर्याप्त पानी और भोजन के बिना व्यायाम करना कुछ बच्चों में सिरदर्द को बढ़ा सकता है। इसलिए उम्र के अनुसार खेलकूद और व्यायाम को धीरे-धीरे दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।

7. कुछ खाद्य पदार्थ और वातावरण

कुछ बच्चों में चॉकलेट, प्रोसेस्ड फूड, कैफीन युक्त पेय या अन्य विशेष खाद्य पदार्थ सिरदर्द से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, हर बच्चे के लिए ट्रिगर अलग हो सकता है। तेज रोशनी, शोर, गर्मी और तेज गंध भी कुछ मामलों में परेशानी बढ़ा सकते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के बच्चों के भोजन से कई खाद्य पदार्थ हटाना उचित नहीं है।

माइग्रेन की पहचान कैसे करें?

बच्चों में माइग्रेन के लक्षण उम्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। सिरदर्द के साथ पेट दर्द, चक्कर, मतली, उल्टी और रोशनी या आवाज से परेशानी हो सकती है। कुछ बच्चे दर्द के दौरान शांत और अंधेरे कमरे में रहना पसंद करते हैं। यदि सिरदर्द बार-बार हो रहा है या बच्चे की पढ़ाई और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, तो बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

माता-पिता क्या कर सकते हैं?

माता-पिता बच्चे की दिनचर्या और सिरदर्द के बीच संबंध समझने के लिए एक डायरी रख सकते हैं। इसमें सिरदर्द का समय, अवधि, तीव्रता, भोजन, नींद, स्क्रीन टाइम, तनाव और संभावित ट्रिगर दर्ज किए जा सकते हैं। इससे डॉक्टर को समस्या का आकलन करने में मदद मिल सकती है।

बच्चे को नियमित नींद, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ ही, सिरदर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार दर्द निवारक दवाएं नहीं देनी चाहिए। दवाओं का अत्यधिक इस्तेमाल भी सिरदर्द की समस्या को बढ़ा सकता है।

कब तुरंत चिकित्सकीय सहायता जरूरी है?

यदि बच्चे को अचानक बहुत तेज सिरदर्द हो, बुखार के साथ गर्दन में अकड़न हो, बेहोशी, दौरा, कमजोरी, बोलने या देखने में परेशानी हो, या सिर में चोट के बाद दर्द शुरू हुआ हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। लगातार बढ़ता सिरदर्द या नींद से जगाने वाला दर्द भी चिकित्सकीय जांच की मांग करता है।

बचपन में माइग्रेन को समय रहते पहचानना और जीवनशैली से जुड़े संभावित ट्रिगर को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। नियमित दिनचर्या और सही चिकित्सकीय मार्गदर्शन से कई बच्चों में माइग्रेन के प्रभाव को नियंत्रित करने और उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *