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5 नवंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को कई ऐसे राज्यों में भी हार का सामना करना पड़ा, जिन्हें उसका मजबूत गढ़ माना जाता था। इस नतीजे ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शेष दो वर्षों के लिए अमेरिकी राजनीति की तस्वीर बदल दी है।

चुनाव परिणामों के बाद ट्रंप ने हार स्वीकार करते हुए डेमोक्रेट्स को जीत की बधाई दी और उनके साथ काम करने की इच्छा जताई। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष ऐसे विधेयक लाता है जिन्हें वह अनुचित मानते हैं, तो राष्ट्रपति के तौर पर अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।

दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स को बहुमत

4 नवंबर को सामने आए चुनावी नतीजों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने सीनेट में कम से कम 54 सीटें हासिल कर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। रिपब्लिकन पार्टी को कम से कम 44 सीटें मिलीं, जबकि अलास्का और मिसिसिपी की कुछ सीटों पर मतगणना पूरी होने तक अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हुई थी।

प्रतिनिधि सभा में भी डेमोक्रेट्स ने कम से कम 30 सीटों का फायदा हासिल किया। इस जीत के साथ ट्रंप को अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार कांग्रेस के दोनों सदनों में विपक्षी पार्टी के बहुमत का सामना करना पड़ेगा। नई कांग्रेस जनवरी 2027 में कार्यभार संभालेगी।

टेक्सास, कंसास और दक्षिण कैरोलाइना में बड़े उलटफेर

इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा उन राज्यों की रही, जहां डेमोक्रेट्स ने लंबे समय से रिपब्लिकन दबदबे को चुनौती दी। टेक्सास में डेमोक्रेट्स ने 1988 के बाद पहली बार सीनेट सीट जीतने में सफलता हासिल की। इसके अलावा तीन बार के रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट को भी हार का सामना करना पड़ा।

कंसास में लगभग एक सदी बाद डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार सीनेट चुनाव जीतने में सफल रहा। दक्षिण कैरोलाइना में भी ट्रंप के समर्थन वाले सीनेट उम्मीदवार को हार मिली। इन नतीजों ने संकेत दिया कि चुनाव में मतदाताओं ने केवल पार्टी के पारंपरिक समर्थन के आधार पर मतदान नहीं किया, बल्कि आर्थिक और राष्ट्रीय मुद्दों को भी महत्व दिया।

महंगाई और ईरान युद्ध बने चुनावी मुद्दे

रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव में महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत, ट्रंप की टैरिफ नीति और ईरान के साथ युद्ध प्रमुख मुद्दे रहे। डेमोक्रेट्स ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों और युद्ध के कारण आम अमेरिकियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।

रिपब्लिकन पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर डेमोक्रेट्स को घेरने की कोशिश की। हालांकि, चुनावी नतीजों से स्पष्ट हुआ कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के लिए रोजमर्रा के खर्च और आर्थिक स्थिति अधिक महत्वपूर्ण रहे।

ट्रंप ने भी स्वीकार किया कि ईरान युद्ध का उनकी पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर असर पड़ा। हालांकि, उन्होंने सैन्य कार्रवाई के अपने फैसले का बचाव किया। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी सोशल मीडिया पर युद्ध को रिपब्लिकन पार्टी की हार का एक प्रमुख कारण बताया।

ट्रंप प्रशासन पर बढ़ेगी संसदीय निगरानी

कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स को ट्रंप प्रशासन की नीतियों की जांच और निगरानी करने की अधिक शक्ति मिलेगी। संसदीय समितियों के जरिए प्रशासन के फैसलों, अधिकारियों और राष्ट्रपति के करीबी लोगों से जुड़े मामलों की जांच की जा सकती है।

सीनेट में बहुमत होने के कारण डेमोक्रेट्स राष्ट्रपति की ओर से नामित कई महत्वपूर्ण पदों के उम्मीदवारों की नियुक्तियों को रोकने की क्षमता भी हासिल करेंगे। इसमें न्यायपालिका से जुड़ी नियुक्तियां भी शामिल हैं।

हालांकि, राष्ट्रपति के पास वीटो का अधिकार बना रहेगा। ऐसे में कांग्रेस और व्हाइट हाउस के बीच विधायी मुद्दों पर टकराव की आशंका है। बजट, सरकारी खर्च, आव्रजन और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत और राजनीतिक संघर्ष बढ़ सकता है।

हकीम जेफ्रीज की भूमिका अहम

हाउस में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा कि उनकी पार्टी का ध्यान आम अमेरिकियों की आर्थिक स्थिति सुधारने और सरकार को जवाबदेह बनाने पर रहेगा। इस जीत के बाद जेफ्रीज के अगले वर्ष प्रतिनिधि सभा के स्पीकर बनने की संभावना बढ़ गई है। ऐसा होने पर वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले अश्वेत अमेरिकी नेता होंगे।

दूसरी ओर, रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनाव परिणामों के बाद नेतृत्व का संकट भी सामने आया है। मौजूदा हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने घोषणा की है कि वह अगले वर्ष पार्टी के नेता के रूप में बने रहने की कोशिश नहीं करेंगे।

अमेरिकी राजनीति में नए दौर की शुरुआत

2026 के मध्यावधि चुनावों ने ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक परिस्थितियां बदल दी हैं। राष्ट्रपति के पास कार्यकारी शक्तियां और वीटो का अधिकार रहेगा, लेकिन कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का बहुमत उनके विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में बाधा बन सकता है।

अब डेमोक्रेट्स के सामने चुनावी जीत को ठोस नीतिगत परिणामों में बदलने की चुनौती होगी। वहीं रिपब्लिकन पार्टी को अपनी हार के कारणों की समीक्षा कर पार्टी की रणनीति और नेतृत्व को नए सिरे से व्यवस्थित करना होगा। आने वाले दो वर्षों में अमेरिकी राजनीति का केंद्र व्हाइट हाउस और डेमोक्रेटिक बहुमत वाली कांग्रेस के बीच संबंधों पर रहेगा।

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