4 नवंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : अमेरिका के 2026 मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका देते हुए नॉर्थ कैरोलाइना की सीनेट सीट पर जीत हासिल की है। पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइकल व्हाटली को हराकर यह सीट डेमोक्रेट्स के खाते में डाल दी। इस जीत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने कांग्रेस में अपना बहुमत बचाने की चुनौती और बढ़ गई है।
नॉर्थ कैरोलाइना में यह मुकाबला चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण सीनेट सीटों में शामिल था। मौजूदा रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने दोबारा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। इसके बाद रिपब्लिकन पार्टी ने माइकल व्हाटली को उम्मीदवार बनाया, जिन्हें राष्ट्रपति ट्रंप का समर्थन प्राप्त था। वहीं, डेमोक्रेट्स ने राज्य के पूर्व गवर्नर रॉय कूपर पर भरोसा जताया। कूपर ने चुनाव में जीत दर्ज कर रिपब्लिकन के कब्जे वाली सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी का झंडा बुलंद किया।
जॉर्जिया और न्यू हैम्पशायर में भी डेमोक्रेट्स को सफलता
डेमोक्रेटिक पार्टी को अन्य राज्यों में भी महत्वपूर्ण कामयाबी मिली। जॉर्जिया में डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन ओसॉफ ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक कॉलिन्स को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। न्यू हैम्पशायर में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार क्रिस पप्पास ने रिपब्लिकन जॉन सुनुनू को हराकर पार्टी के लिए सीनेट सीट सुरक्षित रखी।
इन नतीजों ने डेमोक्रेट्स को सीनेट में बहुमत हासिल करने की उम्मीद दी है। हालांकि, शुरुआती चुनावी रुझानों और मीडिया अनुमानों के आधार पर पूरे सदन का नियंत्रण तय नहीं हुआ था। कई राज्यों में मतगणना जारी थी और लाखों वोटों की गिनती बाकी थी।
फ्लोरिडा में भी रिपब्लिकन को कड़ी चुनौती
फ्लोरिडा में डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन के लिए मुश्किलें बढ़ाईं। रिपब्लिकन सांसदों द्वारा चुनावी नक्शे में बदलाव के बाद जिन तीन हाउस सीटों को रिपब्लिकन के लिए अनुकूल माना जा रहा था, वहां डेमोक्रेट्स ने अपनी सीटें बचाए रखीं। इन क्षेत्रों में वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को अच्छी बढ़त मिली थी।
सीनेट की फ्लोरिडा सीट पर रिपब्लिकन उम्मीदवार एशले मूडी ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एंजी निक्सन के खिलाफ बढ़त बनाए रखी, लेकिन मुकाबला उम्मीद से अधिक कड़ा रहा। इससे संकेत मिला कि कुछ रिपब्लिकन-समर्थक क्षेत्रों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार चुनौती पेश कर रहे हैं।
ट्रंप की नीतियों और महंगाई पर मतदाताओं की नाराजगी
इन चुनावों को राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों के कामकाज पर जनमत संग्रह के रूप में भी देखा गया। चुनाव के दौरान महंगाई, ईंधन की कीमतें, जीवनयापन का खर्च और ईरान के साथ युद्ध जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। कई मतदाताओं ने देश की मौजूदा दिशा और सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष जताया।
मीडिया संगठनों की ओर से कराए गए एग्जिट पोल के अनुसार, लगभग आधे मतदाताओं ने चुनाव को राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति नाराजगी जाहिर करने का अवसर माना। वहीं, करीब 70 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि वे चाहते हैं कि कांग्रेस राष्ट्रपति के अधिकारों पर प्रभावी नियंत्रण और संतुलन बनाए रखे।
कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण की लड़ाई
अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं—सीनेट और प्रतिनिधि सभा। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में बढ़त हासिल थी। सीनेट में बहुमत पाने के लिए डेमोक्रेट्स को चार सीटों का शुद्ध लाभ और प्रतिनिधि सभा में बहुमत के लिए तीन सीटों का शुद्ध लाभ चाहिए था।
नॉर्थ कैरोलाइना की जीत ने सीनेट में डेमोक्रेट्स की स्थिति मजबूत की, जबकि जॉर्जिया और न्यू हैम्पशायर के नतीजों ने उनकी उम्मीदों को और बढ़ाया। हालांकि, अंतिम नियंत्रण के लिए अन्य राज्यों की सीटों के नतीजे भी निर्णायक थे।
यदि डेमोक्रेट्स कांग्रेस के किसी एक या दोनों सदनों में बहुमत हासिल करते हैं, तो ट्रंप प्रशासन के विधायी एजेंडे और नियुक्तियों पर उसका प्रभाव पड़ सकता है। कांग्रेस की समितियों के जरिए प्रशासन की नीतियों की जांच और निगरानी भी बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, नॉर्थ कैरोलाइना में डेमोक्रेट्स की जीत ने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया है। अंतिम परिणाम यह तय करेंगे कि ट्रंप प्रशासन अपने कार्यकाल के अगले दो वर्षों में कांग्रेस में किस तरह के राजनीतिक समीकरणों का सामना करेगा।
