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5 नवंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): दुनिया भर में किशोरों के बीच शारीरिक गतिविधियों की कमी एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में हर चार में से एक किशोर ऐसा है, जिसने पिछले सात दिनों में एक भी दिन कम से कम 60 मिनट की मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि नहीं की। इस स्थिति से करीब 24 करोड़ किशोर प्रभावित हैं। रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि बचपन और किशोरावस्था में शारीरिक सक्रियता की कमी भविष्य में हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकती है।

WHO की यह रिपोर्ट 4 नवंबर 2026 को जारी हुई। इसमें 11 से 17 वर्ष की आयु के 32 लाख से अधिक किशोरों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के लिए 140 देशों और क्षेत्रों में किए गए 389 जनसंख्या-आधारित सर्वेक्षणों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, किशोर औसतन सप्ताह में केवल 2.7 दिन ही सक्रिय रहे, जबकि सिर्फ 14 प्रतिशत किशोरों ने सप्ताह के सभी सात दिनों में कम से कम 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि की।

15 वर्षों में नहीं हुआ खास सुधार

रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पिछले 15 वर्षों में किशोरों की शारीरिक गतिविधियों के स्तर में लगभग कोई सुधार नहीं हुआ है। WHO के अनुसार, दुनिया भर में किशोरों को अधिक सक्रिय बनाने के प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए हैं। वर्ष 2030 तक शारीरिक निष्क्रियता में 15 प्रतिशत की सापेक्ष कमी लाने का वैश्विक लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन फिलहाल कोई भी देश इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सही गति से आगे बढ़ता नजर नहीं आ रहा।

WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में युवाओं को सक्रिय बनाने के मामले में दुनिया ने बहुत कम प्रगति की है और लड़कियां इस मामले में सबसे अधिक पीछे हैं। उन्होंने जोर दिया कि किशोरों को केवल अधिक व्यायाम करने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है। स्कूलों, सड़कों और समुदायों में ऐसे सुरक्षित अवसर तैयार करने होंगे, जहां चलना, खेलना और शारीरिक गतिविधियां करना आसान और सामान्य जीवनशैली का हिस्सा बन सके।

लड़कियां लड़कों से अधिक पीछे

अध्ययन में लड़के और लड़कियों के बीच शारीरिक गतिविधियों का बड़ा अंतर भी सामने आया है। आंकड़ों के अनुसार, 28 प्रतिशत लड़कियों ने पिछले सप्ताह के दौरान एक भी दिन पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं की, जबकि लड़कों में यह आंकड़ा 22 प्रतिशत रहा। दूसरी ओर, सप्ताह के सभी सात दिनों में सक्रिय रहने वाली लड़कियों का अनुपात केवल 11 प्रतिशत था, जबकि लड़कों में यह 17 प्रतिशत पाया गया।

WHO के मुताबिक, लगभग हर देश और क्षेत्र में लड़कियां लड़कों की तुलना में कम सक्रिय हैं। इसके पीछे सुरक्षित खेल मैदानों की कमी, सामाजिक मान्यताएं, परिवार और समुदाय का माहौल, आने-जाने में सुरक्षा तथा खेल गतिविधियों तक सीमित पहुंच जैसे कारण हो सकते हैं। इसलिए लड़कियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक खेल अवसर उपलब्ध कराना विशेष रूप से जरूरी है।

भारत के आंकड़ों को लेकर भी चिंता

इस वैश्विक अध्ययन में भारत को शामिल नहीं किया जा सका। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं को भारत के ऐसे राष्ट्रीय या बड़े क्षेत्रीय सर्वेक्षण उपलब्ध नहीं मिले, जो अध्ययन के निर्धारित मानकों और तुलनीय आंकड़ों की आवश्यकताओं को पूरा करते हों। शोधकर्ताओं ने 15 से अधिक सर्वेक्षणों की समीक्षा की, लेकिन उनमें से कोई भी सभी जरूरी शर्तों पर खरा नहीं उतरा।

इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत में किशोर शारीरिक रूप से सक्रिय हैं या यहां समस्या मौजूद नहीं है। बल्कि यह देश में किशोरों की शारीरिक गतिविधियों से जुड़े विश्वसनीय और प्रतिनिधि आंकड़ों की कमी को उजागर करता है। भारत जैसे बड़े देश के लिए स्कूलों और समुदायों के स्तर पर नियमित सर्वेक्षण तथा निगरानी व्यवस्था विकसित करना महत्वपूर्ण है।

मोबाइल और स्क्रीन टाइम भी बड़ी चुनौती

WHO ने किशोरों की निष्क्रियता के पीछे कई सामाजिक और पर्यावरणीय कारणों की ओर ध्यान दिलाया है। मोटर वाहनों पर बढ़ती निर्भरता, सुरक्षित पैदल रास्तों और साइकिल ट्रैक की कमी, खेल मैदानों तक सीमित पहुंच तथा पढ़ाई और मनोरंजन के लिए स्क्रीन पर बढ़ता समय बच्चों की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं।

लंबे समय तक बैठे रहने की आदत किशोरों में शरीर में अतिरिक्त वसा, कमजोर फिटनेस, खराब कार्डियोमेटाबॉलिक स्वास्थ्य और नींद की अवधि में कमी जैसी समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। इसके विपरीत नियमित शारीरिक गतिविधि हड्डियों को मजबूत बनाने, मांसपेशियों के विकास, मानसिक स्वास्थ्य, बेहतर नींद और सीखने-सोचने की क्षमता को बढ़ावा देने में मदद करती है।

रोजाना 60 मिनट की गतिविधि की सलाह

WHO की सिफारिश है कि 5 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों और किशोरों को पूरे सप्ताह में औसतन प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। इसमें तेज चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना, तैराकी, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन और अन्य खेल शामिल हो सकते हैं। सप्ताह में कम से कम तीन दिन ऐसी गतिविधियां भी करनी चाहिए, जिनसे मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूती मिले।

WHO ने सरकारों से शिक्षा, परिवहन, शहरी नियोजन, खेल और स्वास्थ्य विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की अपील की है। स्कूलों में खेल के पर्याप्त अवसर, सुरक्षित पैदल और साइकिल मार्ग तथा सार्वजनिक खेल मैदान विकसित करना इस दिशा में अहम कदम हो सकते हैं।

रिपोर्ट का स्पष्ट संदेश है कि किशोरों को सक्रिय बनाना केवल उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, स्कूल, समाज और सरकार को मिलकर ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जिसमें खेलना और रोजाना शारीरिक गतिविधि करना उनकी दिनचर्या का स्वाभाविक हिस्सा बन सके।

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