12 दिसंबर 2025 (भारत बानी ब्यूरो ) : ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (TNBC) का नाम सुनते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। क्योंकि ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer – TNBC) स्तन कैंसर का एक प्रकार है जिसमें कैंसर की कोशिकाओं में तीन विशिष्ट रिसेप्टर नेगेटिव होते हैं। इसका मतलब है कि कैंसर कोशिकाएं एस्ट्रोजन रिसेप्टर (Estrogen Receptor – ER) के लिए नेगेटिव होती हैं। प्रोजेस्टेरोन रिसेप्टर (Progesterone Receptor – PR) के लिए नेगेटिव होती हैं। ह्यूमन एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर 2 (HER2) के लिए नेगेटिव होती हैं। ये तीन रिसेप्टर आमतौर पर स्तन कैंसर के विकास को बढ़ावा देते हैं, और जब ये नहीं होते हैं (यानी, नेगेटिव होते हैं), तो कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली टारगेटेड थेरेपी और हार्मोनल थेरेपी इन पर काम नहीं कर पाती हैं।
TNBC को अन्य प्रकार के स्तन कैंसर की तुलना में अधिक आक्रामक (Aggressive) माना जाता है। यह तेजी से बढ़ सकता है और फैल सकता है। चूंकि यह हार्मोनल और HER2-टारगेटेड थेरेपी का जवाब नहीं देता, इसका मुख्य उपचार आमतौर पर कीमोथेरेपी, सर्जरी, और रेडिएशन थेरेपी होता है। हाल ही में, इम्यूनोथेरेपी और कुछ नई टारगेटेड थेरेपी भी इसके इलाज में इस्तेमाल की जा रही हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के इलाज के लिए ‘अल्फा-लैक्टाल्ब्यूमिन’ बना ली है। इस नई दवा से कैंसर कोशिकाओं को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सकेगा और यह बीमारी एक बार ठीक होने के बाद दोबारा नहीं होगी।
ब्रेस्ट कैंसर वैक्सीन से जगी उम्मीद
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अल्फा-लैक्टाल्ब्यूमिन वैक्सीन सुरक्षित है और ये कैंसर सेल्स को रोकने के लिए इम्यूनिटी को बढ़ाती है। फेज 1 में मिले रिजल्ट की वजह से अल्फा-लैक्टाल्ब्यूमिन वैक्सीन को अगले ट्रायल के लिए आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के प्रमुख रिसर्चर डॉ. जी थॉमस बड, एमडी के अनुसार, ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर का इलाज आज भी सबसे मुश्किल है। उन्होंने आगे बताया कि, ये शुरुआती नतीजे आशाजनक हैं। यह टीका न सिर्फ़ सुरक्षित है, बल्कि इसने 74% मरीजों में मज़बूत प्रतिरक्षा शुरू की है।
कैसे काम करता है अल्फा-लैक्टाल्ब्यूमिन वैक्सीन
अल्फा-लैक्टाल्ब्यूमिन वैक्सीन एक प्रकार का प्रायोगिक कैंसर टीका (Experimental Cancer Vaccine) है, जिसे विशेष रूप से ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (TNBC) के लिए विकसित किया जा रहा है। यह टीका कीमोथेरेपी की तरह कैंसर कोशिकाओं को सीधे नहीं मारता है, बल्कि यह कैंसर पेसेंट्स की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को प्रशिक्षित करता है ताकि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचान सके और उनसे लड़ने में मदद करे। अल्फा-लैक्टाल्ब्यूमिन एक दूध प्रोटीन है। यह स्वस्थ महिलाओं के स्तन ऊतक (Breast Tissue) में केवल स्तनपान (Lactation) के दौरान ही उच्च मात्रा में पाया जाता है। स्तनपान समाप्त होने के बाद यह प्रोटीन सामान्यतः अनुपस्थित हो जाता है।
रिसर्च में यह पाया गया है कि अधिकांश (लगभग 70%) ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के ट्यूमर इस अल्फा-लैक्टाल्ब्यूमिन प्रोटीन को फिर से व्यक्त (Re-express) करना शुरू कर देते हैं। यह TNBC कोशिकाएं एक “गलती” करती हैं, जिसे वैज्ञानिक ‘रिटायर्ड प्रोटीन परिकल्पना’ (Retired Protein Hypothesis) कहते हैं। इसका मतलब है कि कैंसर कोशिकाएं एक ऐसा प्रोटीन बना रही हैं जिसे वयस्क शरीर के सामान्य ऊतकों में नहीं होना चाहिए।
वैक्सीन में अल्फा-लैक्टाल्ब्यूमिन प्रोटीन को एक सहायक (Adjuvant) के साथ मिलाकर शरीर में इंजेक्ट किया जाता है। सहायक (जैसे कि ज़ाइमोसन) प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने में मदद करता है। यह टीका प्रतिरक्षा कोशिकाओं (विशेष रूप से साइटोटॉक्सिक टी-लिम्फोसाइट्स या किलर टी कोशिकाएं) को प्रशिक्षित करता है। जब टी कोशिकाएं अल्फा-लैक्टाल्ब्यूमिन प्रोटीन को देखती हैं, तो वे इसे “बाहरी” या “खतरनाक” (Dangerous) मानकर प्रतिक्रिया करती हैं।
एक बार जब टी कोशिकाएं प्रशिक्षित हो जाती हैं, तो वे शरीर में मौजूद उन सभी कोशिकाओं को ढूंढना और नष्ट करना शुरू कर देती हैं जो अल्फा-लैक्टाल्ब्यूमिन प्रोटीन को व्यक्त कर रही हैx यानी, ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाएं। इस तरह, प्रतिरक्षा प्रणाली खुद ही कैंसर के खिलाफ एक लक्षित और दीर्घकालिक प्रतिक्रिया विकसित कर लेती है।
TNBC के लिए यह महत्वपूर्ण क्यों है?
चूंकि TNBC हार्मोनल या HER2-टारगेटेड थेरेपी का जवाब नहीं देता है, इसलिए यह वैक्सीन एक नया और बहुत ज़रूरी उपचार विकल्प प्रदान करती है जो प्रतिरक्षा प्रणाली का उपयोग करके इस आक्रामक कैंसर का मुकाबला करती है। इसका लक्ष्य कैंसर के पुनरावर्तन (Recurrence) को रोकना भी हो सकता है।
सारांश:
वैज्ञानिकों ने ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए एक नई वैक्सीन विकसित की है। यह प्रकार का कैंसर अब तक इलाज के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता था, लेकिन इस नई खोज से मरीजों के लिए नई उम्मीद जगी है। शोध के शुरुआती परिणाम सकारात्मक हैं और आगे की क्लिनिकल टेस्टिंग जारी है।
