14  मई अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : नई दिल्ली में शुरू हुई BRICS Foreign Ministers Meeting इस बार वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच हो रही है। Iran युद्ध, बढ़ती तेल कीमतें और सदस्य देशों के बीच उभरते मतभेदों ने BRICS की एकजुटता की परीक्षा खड़ी कर दी है। Subrahmanyam Jaishankar की मेजबानी में हो रही इस दो-दिवसीय बैठक में BRICS देशों के विदेश मंत्री और प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा नए सदस्य देशों—Iran, UAE, Egypt, Ethiopia और Indonesia—के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। BRICS के विस्तार के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक मानी जा रही है, क्योंकि समूह अब “Global South” की आवाज़ बनने का दावा कर रहा है।

Iran के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बैठक के दौरान अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए BRICS देशों से समर्थन और स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की “आक्रामक नीतियों” के खिलाफ समूह को एकजुट होकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

हालांकि, BRICS के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद भी खुलकर सामने आए। रिपोर्ट्स के अनुसार, कम से कम एक सदस्य देश ने Iran के पक्ष में कठोर बयान का विरोध किया, जिससे संयुक्त रुख तय करने में मुश्किल पैदा हुई। United Arab Emirates और Iran के बीच क्षेत्रीय हितों के टकराव को भी समूह की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

Subrahmanyam Jaishankar ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया “काफी अस्थिर दौर” से गुजर रही है और BRICS को “स्थिरता और रचनात्मक सहयोग” की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने सुरक्षित समुद्री मार्गों और वैश्विक सप्लाई चेन की सुरक्षा को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया।

Iran युद्ध और Strait of Hormuz में तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजारों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है। BRICS देशों के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि समूह में कई बड़े ऊर्जा आयातक और निर्यातक दोनों शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS का हालिया विस्तार उसकी ताकत के साथ-साथ चुनौती भी बन गया है। जहां एक ओर समूह का वैश्विक प्रभाव बढ़ा है, वहीं सदस्य देशों के अलग-अलग भू-राजनीतिक हितों ने सहमति बनाना मुश्किल कर दिया है।

बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की चीन यात्रा और Xi Jinping के साथ बातचीत भी वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनी हुई है। इस कारण BRICS बैठक को व्यापक अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov की मौजूदगी और चीन की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व ने बैठक को और अहम बना दिया है। हालांकि चीन के विदेश मंत्री Wang Yi इस बार शामिल नहीं हुए और उनकी जगह राजदूत Xu Feihong ने प्रतिनिधित्व किया।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि BRICS इस संकट के दौरान साझा बयान या संयुक्त रणनीति पेश करने में सफल रहता है, तो उसकी वैश्विक विश्वसनीयता मजबूत हो सकती है। लेकिन अगर मतभेद गहरे होते हैं, तो समूह की “एकजुट Global South” की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

कुल मिलाकर, नई दिल्ली में हो रही BRICS Foreign Ministers Meeting केवल एक नियमित कूटनीतिक बैठक नहीं बल्कि BRICS की सामूहिक ताकत, राजनीतिक संतुलन और वैश्विक प्रभाव की बड़ी परीक्षा बन गई है।

Summary

नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक Iran युद्ध, बढ़ती तेल कीमतों और सदस्य देशों के मतभेदों के बीच शुरू हुई, जहां भारत ने समूह की एकजुटता पर जोर दिया।

Bharat Baani Bureau

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