19 मई अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : देशभर में ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। All India Organisation of Chemists and Druggists (AIOCD) ने घोषणा की है कि 20 मई को 15 लाख से अधिक केमिस्ट और ड्रगिस्ट देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। संगठन का कहना है कि अनियंत्रित ऑनलाइन दवा बिक्री पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स और मरीजों की सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
AIOCD के अनुसार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कई बार बिना उचित प्रिस्क्रिप्शन के दवाएं बेची जा रही हैं, जिससे दवाओं के गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ सकता है। संगठन का दावा है कि इससे नकली और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री को भी बढ़ावा मिल सकता है।
संगठन ने कहा कि देशभर के लाखों मेडिकल स्टोर्स इस हड़ताल में हिस्सा लेंगे। हालांकि आपातकालीन सेवाओं और जरूरी दवाओं की उपलब्धता को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग व्यवस्था की जा सकती है।
All India Organisation of Chemists and Druggists लंबे समय से ऑनलाइन फार्मेसी कारोबार के लिए सख्त नियमों की मांग करता रहा है। संगठन का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पर्याप्त निगरानी नहीं होने से दवा वितरण प्रणाली प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री का बाजार तेजी से बढ़ा है। घर बैठे दवाएं मंगाने की सुविधा और डिस्काउंट ऑफर के कारण बड़ी संख्या में लोग ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हालांकि मेडिकल विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन इसके लिए मजबूत नियामक ढांचे की जरूरत है। उनका कहना है कि उचित सत्यापन और लाइसेंस व्यवस्था के बिना दवाओं की बिक्री मरीजों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
दूसरी ओर, ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां कहती रही हैं कि वे लाइसेंस प्राप्त सिस्टम के तहत काम करती हैं और डिजिटल हेल्थकेयर को अधिक सुलभ बना रही हैं। उनका दावा है कि ऑनलाइन सेवाओं से दूरदराज के क्षेत्रों में दवाओं की पहुंच बेहतर हुई है।
हड़ताल की घोषणा के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में संभावित असर को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। यदि बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर्स बंद रहते हैं, तो आम लोगों को दवाएं खरीदने में अस्थायी परेशानी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और पारंपरिक दवा कारोबार के बीच संतुलन बनाए।
AIOCD ने केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर स्पष्ट और सख्त नियम लागू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस मुद्दे पर पहले भी अदालतों और सरकारी एजेंसियों के स्तर पर बहस होती रही है। ऑनलाइन फार्मेसी क्षेत्र को लेकर नीति निर्माण अभी भी विकसित हो रहा है।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग मेडिकल स्टोर्स की चिंताओं का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई उपभोक्ता ऑनलाइन सेवाओं की सुविधा और कम कीमतों को महत्वपूर्ण बता रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं की बिक्री एक संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए तकनीकी सुविधा के साथ-साथ सख्त निगरानी और पारदर्शिता भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, 20 मई की प्रस्तावित हड़ताल ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर बढ़ते विवाद और पारंपरिक केमिस्ट समुदाय की चिंताओं को उजागर करती है। अब सभी की नजर सरकार और स्वास्थ्य नियामकों की अगली प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।
