1 जून 2026 : भारत में Goods and Services Tax (GST) संग्रह मई महीने में बढ़कर ₹1.94 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। सरकार के लिए यह आंकड़ा अर्थव्यवस्था में स्थिर मांग और बेहतर टैक्स अनुपालन का संकेत माना जा रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, GST संग्रह में यह बढ़ोतरी घरेलू कारोबार और उपभोग गतिविधियों में सुधार के कारण देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार डिजिटल ट्रैकिंग और ई-इनवॉइसिंग जैसी व्यवस्थाओं ने टैक्स चोरी को कम करने और राजस्व संग्रह बढ़ाने में मदद की है।
GST भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे पूरे देश में “वन नेशन, वन टैक्स” व्यवस्था के तहत लागू किया गया था। इसका उद्देश्य टैक्स ढांचे को सरल बनाना और कारोबार को आसान बनाना है।
मई के आंकड़ों में केंद्रीय GST (CGST), राज्य GST (SGST), एकीकृत GST (IGST) और सेस से प्राप्त राजस्व शामिल है। वित्तीय विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार मजबूत GST संग्रह सरकार की वित्तीय स्थिति को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है।
हालांकि, वृद्धि दर कुछ पिछले महीनों की तुलना में थोड़ी सीमित रही है, लेकिन विशेषज्ञ इसे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू मांग के संतुलन के संदर्भ में सकारात्मक मान रहे हैं।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि GST संग्रह किसी भी अर्थव्यवस्था की वास्तविक गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। यदि टैक्स कलेक्शन मजबूत रहता है, तो यह संकेत देता है कि उत्पादन, व्यापार और उपभोग गतिविधियां सक्रिय बनी हुई हैं।
सरकार की ओर से हाल के वर्षों में टैक्स प्रशासन को अधिक पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। इसका असर राजस्व संग्रह में भी दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले महीनों में त्योहारी सीजन और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के कारण GST संग्रह में और सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अनिश्चितताओं पर भी नजर बनी रहेगी।
कुल मिलाकर, मई में ₹1.94 लाख करोड़ का GST संग्रह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जो उपभोग और कर अनुपालन दोनों में मजबूती को दर्शाता है
