8 जुलाई 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र पर होने वाले कुल खर्च का आकलन एक व्यवस्थित राष्ट्रीय लेखांकन प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह समझना है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना पैसा खर्च हो रहा है, यह पैसा कहां से आ रहा है और किन सेवाओं पर व्यय किया जा रहा है।
स्वास्थ्य व्यय के आकलन में सरकारी खर्च, निजी (Out-of-Pocket) खर्च, स्वास्थ्य बीमा, नियोक्ताओं द्वारा किए गए भुगतान तथा विदेशी सहायता सहित विभिन्न स्रोतों को शामिल किया जाता है। इन सभी आंकड़ों को मिलाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यय (National Health Expenditure) का अनुमान तैयार किया जाता है।
सरकारी स्वास्थ्य व्यय में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, टीकाकरण कार्यक्रमों, सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर किए गए खर्च को शामिल किया जाता है।
निजी स्वास्थ्य व्यय भारत में कुल स्वास्थ्य खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें मरीजों द्वारा अपनी जेब से दवाओं, जांच, डॉक्टर की फीस, अस्पताल में भर्ती और अन्य चिकित्सा सेवाओं पर किया गया भुगतान शामिल होता है।
स्वास्थ्य बीमा के तहत सरकारी और निजी बीमा योजनाओं द्वारा किए गए भुगतान भी कुल स्वास्थ्य व्यय का हिस्सा माने जाते हैं। इसके अलावा कॉर्पोरेट संस्थानों द्वारा कर्मचारियों के स्वास्थ्य लाभ पर किया गया खर्च भी इसमें शामिल किया जाता है।
इन आंकड़ों को संकलित करने के लिए सरकार विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, बीमा कंपनियों, राष्ट्रीय सर्वेक्षणों और स्वास्थ्य संस्थानों से प्राप्त जानकारी का उपयोग करती है। इसके आधार पर National Health Accounts (NHA) तैयार किए जाते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य व्यय का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्वास्थ्य व्यय का सटीक आकलन नीति निर्माण, बजट निर्धारण और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे सरकार यह तय कर सकती है कि किन क्षेत्रों में अधिक निवेश की आवश्यकता है और नागरिकों पर जेब से होने वाले खर्च को कैसे कम किया जाए।
