27  जुलाई  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, भारतीय रुपया मौजूदा परिस्थितियों में अंडरवैल्यूड (कम मूल्यांकित) है। केंद्रीय बैंक ने यह भी बताया कि FCNR(B) खातों के जरिए आने वाला विदेशी फंड प्रवाह लगभग 32 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

RBI के अनुसार, रुपये के मूल्यांकन को कई आर्थिक और वैश्विक कारक प्रभावित करते हैं। इनमें विदेशी पूंजी प्रवाह, व्यापार संतुलन, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजारों की स्थिति शामिल हैं।

FCNR(B) क्या है?

FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) Account एक ऐसा बैंक खाता है, जिसमें अनिवासी भारतीय विदेशी मुद्रा में जमा रख सकते हैं। इन खातों के जरिए आने वाला धन भारतीय वित्तीय प्रणाली में विदेशी मुद्रा प्रवाह का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

RBI के आंकड़ों के अनुसार, FCNR(B) से जुड़े प्रवाह में वृद्धि से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और वित्तीय प्रणाली को समर्थन मिल सकता है।

रुपये पर दबाव डालने वाले कारक

वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों के निवेश निर्णय रुपये की दिशा को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, भारत का आयात बिल और व्यापार घाटा भी रुपये के मूल्य पर असर डालता है।

हालांकि, मजबूत विदेशी मुद्रा प्रवाह रुपये को समर्थन दे सकता है। FCNR(B) के जरिए बढ़ता प्रवाह भी विदेशी मुद्रा उपलब्धता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

RBI रुपये के बाजार मूल्य और विदेशी मुद्रा बाजार में गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को रोकना और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना है।

Bharat Baani Bureau

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