28 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने शानदार वापसी करते हुए 2026 ग्रैंड चेस टूर फाइनल्स का खिताब अपने नाम कर लिया है। इस जीत के साथ वह प्रतिष्ठित ग्रैंड चेस टूर खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। सेंट लुइस में खेले गए फाइनल में प्रज्ञानानंदा ने अमेरिका के दिग्गज ग्रैंडमास्टर फैबियानो कारुआना को 15-13 से हराकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
फाइनल के निर्णायक दिन की शुरुआत प्रज्ञानानंदा के लिए आसान नहीं रही। वह कारुआना से छह अंक पीछे थे और खिताब की दौड़ में मुश्किल स्थिति में दिखाई दे रहे थे। इसके बावजूद 21 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी ने जबरदस्त धैर्य और आक्रामक खेल दिखाते हुए मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया।
प्रज्ञानानंदा ने पहले दोनों रैपिड गेम जीतकर लगातार आठ-आठ नहीं बल्कि मुकाबले की निर्धारित अंक प्रणाली के अनुसार चार-चार अंक हासिल किए और अचानक कारुआना पर बढ़त बना ली। रैपिड में मिली इन दो जीतों ने उन्हें छह अंकों की कमी से उबरकर दो अंकों की बढ़त दिला दी।
इसके बाद चार ब्लिट्ज गेम खेले गए। दोनों खिलाड़ियों ने एक-एक गेम जीता, जबकि दो मुकाबले ड्रॉ रहे। पहले ब्लिट्ज गेम के ड्रॉ के बाद कारुआना ने दूसरा गेम जीतकर स्कोर 12-12 कर दिया। इससे मुकाबला फिर बेहद रोमांचक स्थिति में पहुंच गया।
हालांकि प्रज्ञानानंदा ने दबाव में शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने तीसरे ब्लिट्ज गेम में जीत दर्ज कर 14-12 की बढ़त हासिल कर ली। अब कारुआना के सामने मुकाबला बचाने के लिए अंतिम गेम जीतना जरूरी था। यदि अमेरिकी खिलाड़ी अंतिम गेम जीत जाते, तो मुकाबला अतिरिक्त गेम और अंततः आर्मागेडन तक जा सकता था।
लेकिन अंतिम गेम में प्रज्ञानानंदा ने जरूरी ड्रॉ हासिल कर लिया और इसी के साथ उन्होंने 15-13 के स्कोर से फाइनल जीत लिया। इस तरह उन्होंने न सिर्फ अपने करियर का पहला ग्रैंड चेस टूर खिताब जीता, बल्कि भारतीय शतरंज के इतिहास में भी नया अध्याय जोड़ दिया।
प्रज्ञानानंदा को इस ऐतिहासिक जीत के लिए 2 लाख अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि मिली। खिताब के साथ उन्हें अगले साल के ग्रैंड चेस टूर में भी जगह मिल गई है। कारुआना और तीसरे स्थान पर रहने वाले अमेरिकी खिलाड़ी वेस्ली सो ने भी अगले साल के टूर के लिए अपनी जगह पक्की कर ली।
तीसरे स्थान के मुकाबले में वेस्ली सो ने जर्मनी के विंसेंट कीमर को 18-12 से हराया। इससे सो ने टूर्नामेंट में तीसरा स्थान हासिल किया।
प्रज्ञानानंदा के लिए यह 2026 का बेहद शानदार दौर रहा है। इससे पहले इसी साल वह Norway Chess का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने थे। उस टूर्नामेंट में उन्होंने विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन के खिलाफ भी दो जीत दर्ज की थीं।
ग्रैंड चेस टूर फाइनल में पहुंचने के रास्ते में भी प्रज्ञानानंदा ने शानदार प्रदर्शन किया। सेमीफाइनल में उन्होंने जर्मनी के विंसेंट कीमर को 19-9 से हराया था, जबकि कारुआना ने वेस्ली सो को 18-12 से मात देकर फाइनल में जगह बनाई थी।
फाइनल में कारुआना ने शुरुआत में मजबूत स्थिति बनाई थी। एक समय ऐसा लगा कि वह खिताब के करीब पहुंच चुके हैं, लेकिन प्रज्ञानानंदा ने निर्णायक दिन रैपिड गेम्स में लगातार दो जीत दर्ज करके मुकाबले की तस्वीर बदल दी। उनकी यह वापसी टूर्नामेंट के सबसे यादगार क्षणों में शामिल हो गई।
जीत के बाद प्रज्ञानानंदा ने स्वीकार किया कि मुकाबले की शुरुआत में उन्हें ज्यादा उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि कारुआना के खिलाफ एक जीत हासिल करना भी आसान नहीं होता, लेकिन रैपिड में दो जीत दर्ज करना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा।
2026 ग्रैंड चेस टूर फाइनल्स में कुल 4,50,000 डॉलर की पुरस्कार राशि थी। टूर्नामेंट में चार शीर्ष खिलाड़ियों के बीच नॉकआउट मुकाबले हुए और फाइनल तक पहुंचने वाले प्रज्ञानानंदा तथा कारुआना के बीच खिताब के लिए कड़ा संघर्ष देखने को मिला।
प्रज्ञानानंदा की इस उपलब्धि को भारतीय शतरंज के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। विश्व स्तर पर पहले से ही मजबूत पहचान बना चुके इस युवा ग्रैंडमास्टर ने अब अपने नाम एक और प्रतिष्ठित खिताब जोड़ लिया है।
महज 21 साल की उम्र में प्रज्ञानानंदा का लगातार बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में शीर्ष स्तर पर प्रदर्शन भारतीय शतरंज के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रैंड चेस टूर का खिताब उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
कारुआना के खिलाफ 15-13 की यह जीत खास इसलिए भी रही क्योंकि प्रज्ञानानंदा ने मुकाबले में बेहद कठिन स्थिति से वापसी की। छह अंकों से पिछड़ने के बाद खिताब जीतना उनके मानसिक मजबूती और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता को दर्शाता है।
इस ऐतिहासिक जीत के साथ प्रज्ञानानंदा ने भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद के बाद देश की नई पीढ़ी के खिलाड़ियों की वैश्विक सफलता को और मजबूत किया है। उनका प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारतीय शतरंज अब दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर लगातार खिताब के दावेदारों में शामिल है।
