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2 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : पंजाब में कथित पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क के खिलाफ चल रही जांच में लुधियाना से सामने आए CCTV प्रकरण ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। लुधियाना पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए रछपाल सिंह से पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित हैंडलरों, स्थानीय संपर्कों और नेटवर्क के विस्तार से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और संवेदनशील गतिविधियों की जानकारी सीमा पार तक किस स्तर पर पहुंचाई जा रही थी।

पुलिस के अनुसार, गुरदासपुर जिले के फतेहगढ़ चूड़ियां क्षेत्र के रहने वाले रछपाल सिंह ने लुधियाना-फिरोजपुर रोड पर न्यू सुंदर नगर इलाके में एक किराये की दुकान ली थी। यह स्थान बड्डोवाल कैंटोनमेंट से लगभग छह किलोमीटर की दूरी पर बताया गया है। आरोप है कि दुकान को सामान्य कारोबारी गतिविधि के लिए लेने के बजाय वहां CCTV कैमरे लगाए गए और इन कैमरों की लाइव फीड पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलरों तक पहुंचाई गई।

जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू CCTV कैमरों का इस्तेमाल है। पुलिस के मुताबिक, कैमरों को सड़क की ओर इस तरह लगाया गया था कि वहां से गुजरने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि कैमरों से मिलने वाली लाइव जानकारी का इस्तेमाल सैन्य वाहनों और अन्य रणनीतिक गतिविधियों की निगरानी के लिए किया जा सकता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो CCTV कैमरे, एक वाई-फाई राउटर/कनेक्टिविटी उपकरण, पावर एडाप्टर और 64GB मेमोरी कार्ड बरामद करने की बात कही है।

मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को कथित तौर पर कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों और संपर्कों की जानकारी भी मिली है। अधिकारियों को आशंका है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। जांचकर्ताओं का ध्यान अब उन लोगों की पहचान करने पर है जिन्होंने कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर नेटवर्क के लिए काम किया, तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए या पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के साथ संपर्क स्थापित करने में भूमिका निभाई।

जांच का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भर्ती और फंडिंग का कथित नेटवर्क है। लुधियाना पुलिस की जांच से जुड़ी रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पाकिस्तान से जुड़े कथित हैंडलरों तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से Instagram, का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। पुलिस सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि दुबई में मौजूद पंजाब मूल के एक व्यक्ति की भूमिका की जांच की जा रही है। कथित तौर पर वह पंजाब में संभावित स्थानीय संपर्कों या स्लीपर नेटवर्क तक पहुंच बनाने में माध्यम की भूमिका निभा सकता था। हालांकि इन दावों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

पूछताछ के दौरान पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रछपाल सिंह की कथित गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं और अब तक किस प्रकार की जानकारी सीमा पार भेजी गई। अधिकारियों के सामने यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या CCTV नेटवर्क का इस्तेमाल केवल निगरानी के लिए किया जा रहा था या इसके पीछे पंजाब में किसी बड़े अपराध, धमकी या अन्य अस्थिरता पैदा करने की योजना भी थी। कुछ रिपोर्टों में विभिन्न मोबाइल नंबरों से धमकियां दिए जाने की आशंका का उल्लेख किया गया है।

लुधियाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ Official Secrets Act, 1923 की संबंधित धाराओं तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। अदालत ने आरोपी को पुलिस रिमांड पर भेजा था, जिसके दौरान जांच एजेंसियां उसके कथित संपर्कों, संचार माध्यमों, वित्तीय लेन-देन और सीमा पार बैठे हैंडलरों से संबंधों की जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि पूछताछ से नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और अब तक साझा की गई संवेदनशील जानकारी के बारे में और तथ्य सामने आ सकते हैं।

जांच में अब दो अन्य कथित ऑपरेटरों—वरिंदर और रोहित—की गिरफ्तारी भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों को कथित तौर पर उस दुकान पर लगाए गए CCTV कैमरों की स्थिति जांचने के लिए भेजा गया था। इससे जांच एजेंसियों को यह आशंका मजबूत हुई है कि लुधियाना प्रकरण किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। पुलिस अब कथित स्थानीय भर्ती, CCTV उपकरणों की स्थापना, तकनीकी सहायता, पैसों के लेन-देन और पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के बीच पूरी कड़ी को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

यह मामला पंजाब में हाल के महीनों में सामने आए अन्य कथित जासूसी मामलों की पृष्ठभूमि में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अप्रैल 2026 में पंजाब पुलिस ने एक अलग कथित ISI नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सोलर और 4G/SIM आधारित CCTV उपकरण बरामद किए थे। इन मामलों से सुरक्षा एजेंसियां इस बात पर विशेष ध्यान दे रही हैं कि बाजार में आसानी से उपलब्ध तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए न किया जाए।

फिलहाल लुधियाना मामले में जांच जारी है। सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित नेटवर्क की पूरी संरचना का पता लगाना, पाकिस्तान स्थित हैंडलरों की पहचान करना और यह निर्धारित करना है कि संवेदनशील जानकारी कितनी मात्रा में और किस उद्देश्य से साझा की गई। पुलिस की आगामी कार्रवाई और पूछताछ से इस कथित जासूसी नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

Bharat Baani Bureau

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