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11 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): एथलेटिक्स की 400 मीटर दौड़ में भारत को नई उम्मीद देने वाले विशाल टीके इस साल के एशियन गेम्स में देश की निगाहों के केंद्र में होंगे। कुछ ही समय में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने से लेकर 45 सेकंड की बाधा पार करने वाले भारत के पहले पुरुष 400 मीटर धावक बनने तक विशाल ने लंबा सफर तय किया है। लेकिन उनकी इस तेज रफ्तार सफलता के पीछे केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि एक ऐसे कोच की कठोर ट्रेनिंग भी है, जिसने उनकी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें ताकत में बदलने का काम किया।

विशाल के इस परिवर्तन में सबसे महत्वपूर्ण नाम उनके कोच जेसन डॉसन का है। भारतीय एथलीटों के साथ काम कर रहे जमैकन मूल के इस कोच की ट्रेनिंग शैली बेहद कठोर मानी जाती है। डॉसन ने जब पहली बार विशाल को देखा तो उनकी लंबी और दुबली काया के कारण उन्हें ‘स्टिकमैन’ कह दिया था। लेकिन उसी समय उन्होंने यह भी पहचान लिया था कि इस शरीर में तेज गति की बड़ी क्षमता छिपी है।

‘पहले खाना शुरू करो’

विशाल और डॉसन की साझेदारी की शुरुआत ही कुछ असामान्य सलाह से हुई। जब विशाल पिछले साल डॉसन के पास प्रशिक्षण के लिए पहुंचे, तो कोच ने उन्हें सबसे पहले अपना खान-पान बढ़ाने को कहा।

डॉसन के मुताबिक, करीब छह फुट दो इंच लंबे विशाल उन्हें जरूरत से ज्यादा दुबले लगे। उनका मानना था कि विशाल का मेटाबॉलिज्म बहुत तेज है और वह जितना खाते हैं, उसका बड़ा हिस्सा शरीर तेजी से इस्तेमाल कर लेता है। इसलिए प्रशिक्षण की शुरुआत केवल ट्रैक पर दौड़ने से नहीं, बल्कि शरीर को पर्याप्त पोषण देने से हुई।

यह छोटी-सी बात आगे चलकर विशाल की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। 400 मीटर जैसी दौड़ में केवल गति ही पर्याप्त नहीं होती। ताकत, सहनशक्ति, शरीर की संरचना, रिकवरी और आखिरी 100 मीटर तक गति बनाए रखने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी होती है।

‘हेल में खुशी से जी रहा हूं’

डॉसन की ट्रेनिंग आसान नहीं है। उनके प्रशिक्षण सत्रों में एथलीटों को उस सीमा तक धकेला जाता है जहां शरीर और दिमाग दोनों जवाब देने लगते हैं। खुद विशाल ने अपनी ट्रेनिंग को अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने वाला अनुभव बताया है।

उनके शब्दों में, वह ‘हेल’ यानी कठिन परिस्थितियों में रहते हुए भी खुश हैं। यह बयान इस बात को दिखाता है कि राष्ट्रीय रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए उन्होंने प्रशिक्षण की कठिनाइयों को किस तरह स्वीकार किया है।

डॉसन का तरीका कुछ हद तक एक सख्त पिता जैसा है—वह अपने एथलीटों से तब भी एक और लैप या अतिरिक्त ड्रिल करवाते हैं जब शरीर जवाब देने लगता है। एथलीट कभी-कभी विरोध करते हैं, लेकिन यही कठोरता उनके कार्यक्रम का हिस्सा है।

45 सेकंड की बाधा टूटी

विशाल की प्रगति का सबसे बड़ा प्रमाण उनका राष्ट्रीय रिकॉर्ड है। अगस्त 2025 में चेन्नई में National Inter-State Senior Athletics Championships के दौरान उन्होंने पुरुषों की 400 मीटर दौड़ में 45.12 सेकंड का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने मुहम्मद अनस के 2019 में बनाए 45.21 सेकंड के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।

इसके बाद 2026 में विशाल ने अपनी गति को और आगे बढ़ाया। उपलब्ध हालिया रिपोर्टों के मुताबिक वह 400 मीटर में 45 सेकंड से कम समय दर्ज करने वाले पहले भारतीय पुरुष बने। यह उपलब्धि उन्हें भारतीय एथलेटिक्स के सबसे चर्चित क्वार्टर-माइलर्स में शामिल करती है।

यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं है। 400 मीटर में 45 सेकंड की सीमा दुनिया के शीर्ष स्तर की प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। ऐसे में विशाल का प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स में इस इवेंट की संभावनाओं को भी नई दिशा देता है।

एशियन गेम्स में बड़ी चुनौती

अब विशाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती एशियन गेम्स 2026 है। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी होने के कारण उनसे पदक की उम्मीदें स्वाभाविक रूप से बढ़ गई हैं, लेकिन एशियाई स्तर पर मुकाबला बेहद कठिन होगा।

एशिया में 400 मीटर का स्तर काफी ऊंचा है। Asian Games का पुरुष 400 मीटर रिकॉर्ड 44.46 सेकंड है, जो 2014 में सऊदी अरब के यूसुफ मसरााही ने बनाया था। ऐसे में विशाल को अपने राष्ट्रीय रिकॉर्ड से भी आगे जाना होगा यदि उन्हें पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहना है।

हालांकि, उनकी मौजूदा प्रगति बताती है कि वह बड़े मंच के लिए तैयार हो रहे हैं। पिछले साल एशियाई चैंपियनशिप में भी उन्होंने 45.57 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया था और चौथे स्थान पर रहे थे। इसके अलावा उन्होंने भारतीय रिले टीमों के साथ भी महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया था।

कोच और एथलीट की साझेदारी

विशाल की कहानी में डॉसन की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने केवल तकनीकी प्रशिक्षण नहीं दिया। उन्होंने एथलीट की पूरी दिनचर्या पर ध्यान दिया—खान-पान, शरीर की मजबूती, प्रशिक्षण की तीव्रता और मानसिक दृढ़ता तक।

400 मीटर को अक्सर एक ऐसी दौड़ माना जाता है जिसमें स्पीड और सहनशक्ति दोनों की परीक्षा होती है। शुरुआती 200 मीटर में तेज निकलना आसान हो सकता है, लेकिन आखिरी 100 मीटर में गति बनाए रखना असली चुनौती होती है। डॉसन की कठोर ट्रेनिंग का उद्देश्य इसी क्षमता को मजबूत करना है।

भारत की नई 400 मीटर उम्मीद

विशाल टीके का उभरना भारतीय एथलेटिक्स के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश लंबे समय से व्यक्तिगत 400 मीटर स्पर्धा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता की तलाश में है। उनके राष्ट्रीय रिकॉर्ड और 45 सेकंड से नीचे जाने की क्षमता ने इस उम्मीद को मजबूत किया है।

लेकिन विशाल के लिए अगला कदम सबसे कठिन होगा। राष्ट्रीय रिकॉर्ड से अंतरराष्ट्रीय पदक तक का रास्ता केवल एक तेज समय से तय नहीं होता। इसमें निरंतरता, सही रणनीति, चोट से बचाव और बड़े मुकाबलों में मानसिक मजबूती की जरूरत होती है।

एशियन गेम्स 2026 में जब विशाल ट्रैक पर उतरेंगे, तब उनके साथ सिर्फ एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड का दबाव नहीं होगा। उनके पीछे जेसन डॉसन की महीनों की कठोर ट्रेनिंग, बदला हुआ खान-पान और अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने की तैयारी भी होगी।

यही वजह है कि एशियन गेम्स में विशाल की दौड़ केवल 400 मीटर की दौड़ नहीं होगी। यह भारतीय एथलेटिक्स के उस नए आत्मविश्वास की परीक्षा भी होगी, जिसने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड की सीमाओं को लगातार आगे बढ़ाया है।

Bharat Baani Bureau

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