15 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए उत्सुक है और यह समझौता जल्द हो सकता है। ट्रंप ने साथ ही कहा कि ईरान युद्ध समाप्त होने के बाद वैश्विक तेल कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका तेहरान के साथ बातचीत की संभावना के लिए खुला है, हालांकि अंतिम फैसला वह खुद करेंगे।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि ईरान “जल्दी और बुरी तरह” समझौता करना चाहता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका यह तय करेगा कि उसे बातचीत में शामिल होना है या नहीं, लेकिन बातचीत की अवधारणा के लिए वॉशिंगटन खुला है।
युद्ध खत्म होने पर तेल कीमतों में गिरावट का दावा
ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को वैश्विक ऊर्जा बाजार में मौजूदा अस्थिरता से जोड़ते हुए कहा कि युद्ध समाप्त होने के बाद तेल और ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है। इससे अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, ऊर्जा बाजार विशेषज्ञों के अनुसार कीमतों में गिरावट की गति इस बात पर निर्भर करेगी कि युद्ध किस तरह समाप्त होता है, ईरान का तेल निर्यात कितनी जल्दी सामान्य होता है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही कितनी तेजी से बहाल होती है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा
ईरान के साथ संघर्ष का सबसे बड़ा आर्थिक प्रभाव वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है और इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है।
हालिया घटनाक्रम में सऊदी अरब की महत्वपूर्ण East-West Pipeline पर हमले ने भी ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। Reuters के अनुसार, इस पाइपलाइन के लंबे समय तक बंद रहने से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4 प्रतिशत प्रभावित हो सकता है।
ईरान ने भी बातचीत की इच्छा के संकेत दिए
ट्रंप के दावे के बीच ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को प्रतिबंध हटाने और दबाव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की जरूरत होगी।
इससे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं फिर चर्चा में आ गई हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी और युद्ध की स्थिति किसी भी संभावित समझौते को जटिल बना सकती है।
तेल बाजार में बनी हुई है भारी अस्थिरता
अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बावजूद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार फिलहाल स्थिर नहीं हुआ है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Brent crude की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। सऊदी तेल बुनियादी ढांचे पर हमलों और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों को लेकर अनिश्चितता ने बाजार में जोखिम बढ़ाया है।
तेल की ऊंची कीमतों का सीधा असर पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप खाद्य पदार्थों और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
ट्रंप ने अमेरिका की ऊर्जा स्थिति का किया बचाव
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिका की मौजूदा ऊर्जा स्थिति का बचाव करते हुए दावा किया कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए अमेरिकी कार्रवाई जरूरी थी। उन्होंने घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी के लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की नीतियों को भी जिम्मेदार ठहराया।
इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि युद्ध समाप्त होने के बाद पेट्रोल की कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध खत्म होने के तुरंत बाद भी कीमतें पुराने स्तर पर लौटें, यह जरूरी नहीं है। आपूर्ति श्रृंखला, रिफाइनिंग क्षमता और वैश्विक तेल परिवहन को सामान्य होने में समय लग सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की राह कितनी आसान?
दोनों देशों के बीच संभावित बातचीत कई मुद्दों पर निर्भर करेगी। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा, तेल निर्यात और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति प्रमुख हैं।
इसके अलावा, क्षेत्र में ईरान समर्थित हूती समूह की गतिविधियां भी तनाव को बढ़ा रही हैं। हाल ही में हूतियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे संघर्ष के और फैलने की आशंका बनी हुई है।
दुनिया की नजर संभावित समझौते पर
ट्रंप के बयान के बाद अब वैश्विक बाजारों की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान वास्तव में औपचारिक बातचीत शुरू करते हैं। यदि दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचते हैं और तेल आपूर्ति तथा हॉर्मुज से परिवहन सामान्य होता है, तो बाजार में मौजूद युद्ध प्रीमियम तेजी से कम हो सकता है।
लेकिन फिलहाल ट्रंप का बयान एक राजनीतिक और कूटनीतिक संकेत है, न कि किसी अंतिम शांति समझौते की घोषणा। ईरान और अमेरिका के बीच वास्तविक वार्ता, प्रतिबंधों में बदलाव और सैन्य गतिविधियों में कमी ही यह तय करेगी कि तेल कीमतों में कितनी और कितनी जल्दी गिरावट आती है।
