16 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए पुलिस और प्रशासन को अभियान के अंतिम चरण में कार्रवाई और तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से ड्रग तस्करों, सप्लायरों और पेडलरों के खिलाफ जमीनी स्तर पर कार्रवाई को और मजबूत करने तथा आम लोगों से मिलने वाली सूचनाओं पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को राज्यभर के डिप्टी कमिश्नरों, पुलिस कमिश्नरों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों तथा आईजी और डीआईजी स्तर के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। बैठक में अभियान की प्रगति, गांवों में सक्रिय विलेज डिफेंस कमेटियों (VDCs) की भूमिका, पुलिस कार्रवाई और नागरिकों से प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था की समीक्षा की गई।
अंतिम चरण में अभियान
भगवंत मान ने कहा कि ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और पुलिस को बचे हुए ड्रग नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नशे की सप्लाई, बिक्री और तस्करी से जुड़े लोगों पर जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी रखी जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अभियान अब केवल पुलिस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोगों की भागीदारी के कारण यह एक व्यापक जन-अभियान का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि पंजाब के गांवों, गलियों और मोहल्लों में नशे के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करना जरूरी है।
विलेज डिफेंस कमेटियों की भूमिका बढ़ी
बैठक में विलेज डिफेंस कमेटियों की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान में पंजाब में 14,846 विलेज डिफेंस कमेटियां सक्रिय हैं, जिनमें लगभग 74,230 सदस्य शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, इन समितियों से प्राप्त ड्रग्स संबंधी फीडबैक में राज्यभर में 41 फीसदी की वृद्धि हुई है। सरकार इसे स्थानीय स्तर पर लोगों की बढ़ती भागीदारी के संकेत के रूप में देख रही है।
मान ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि VDC सदस्यों और अन्य स्थानीय हितधारकों के साथ बेहतर समन्वय कायम किया जाए। साथ ही, लोगों से मिलने वाली सूचनाओं और शिकायतों को केवल दर्ज करने के बजाय उनके आधार पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
हर जिले की सफल रणनीति साझा करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने जिलों में नशे के खिलाफ अपनाई जा रही प्रभावी रणनीतियों और सफल तरीकों की पहचान करें। इन मॉडलों को दूसरे जिलों में भी लागू करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए।
मान ने अधिकारियों से कहा कि अभियान की सफलता के लिए पुलिस, सिविल प्रशासन, VDCs और आम जनता के बीच लगातार संपर्क और समन्वय जरूरी है। उन्होंने इस पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और परिणाम-केंद्रित बनाने पर जोर दिया।
थाना स्तर पर होगी जवाबदेही
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वह स्वयं थाना स्तर पर अभियान की समीक्षा के लिए SHO के साथ बैठकें करेंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस थाने का प्रभारी अधिकारी पुलिस प्रशासन और आम जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण जमीनी कड़ी है।
इसलिए थाना स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही और प्रदर्शन को मजबूत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि नशे से संबंधित शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो और स्थानीय स्तर पर ड्रग सप्लाई नेटवर्क को खत्म करने के प्रयास लगातार जारी रहें।
अभियान में गिरफ्तारी और जनभागीदारी
‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान की शुरुआत 1 मार्च 2025 को हुई थी। अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री ने अभियान के 500 दिन पूरे होने पर दावा किया था कि इस दौरान 70,000 ड्रग तस्करों की गिरफ्तारी हुई है और करीब 1.25 लाख स्वयंसेवक अभियान से जुड़े हैं। ये आंकड़े मुख्यमंत्री और राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए हैं।
सितंबर में अभियान के अंतिम चरण के लिए गांवों में जनसंपर्क और फीडबैक जुटाने पर भी जोर दिया गया। इससे पहले सरकार ने 500 से अधिक स्वयंसेवकों की विशेष टीम तैयार करने की जानकारी दी थी, जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों से अभियान के प्रभाव और जमीनी स्थिति के बारे में फीडबैक लेना था।
कार्रवाई के साथ रोकथाम और पुनर्वास पर भी जोर
सरकार की रणनीति केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है। नशे की मांग को कम करने, युवाओं में जागरूकता बढ़ाने और नशे की लत से प्रभावित लोगों के उपचार तथा पुनर्वास पर भी जोर दिया जा रहा है।
हाल ही में सरकार ने स्कूलों में ‘School Nashean Virudh’ के तहत विज्ञान-आधारित पाठ्यक्रम का भी उल्लेख किया है, जिसका उद्देश्य युवाओं के बीच नशे से जुड़े भ्रम और जोखिमों को समझाना तथा नशे की शुरुआत को रोकना है।
‘ड्रग-फ्री पंजाब’ के लक्ष्य पर सरकार का जोर
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार तब तक अभियान जारी रखेगी जब तक पंजाब में नशे की समस्या को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य हासिल नहीं होता। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को अंतिम चरण में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतने तथा जमीनी स्तर पर कार्रवाई को और प्रभावी बनाने को कहा।
‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान अब ऐसे चरण में पहुंच गया है, जहां सरकार पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ स्थानीय समुदायों से प्राप्त सूचनाओं और जनभागीदारी को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। आने वाले समय में थाना स्तर पर समीक्षा, VDC फीडबैक और ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई इस अभियान के अगले चरण की प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी।
