16 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दावा किया है कि राज्य के करीब 80 फीसदी खेतों तक अब नहरी पानी पहुंच रहा है, जबकि उनकी सरकार के सत्ता में आने से पहले यह कवरेज करीब 22 फीसदी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का अगला लक्ष्य पंजाब के 100 फीसदी खेतों तक नहरी पानी पहुंचाना है। उन्होंने यह बात श्री आनंदपुर साहिब के गांव जिंदवड़ी में आयोजित ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के दौरान कही।
मुख्यमंत्री के अनुसार, नहरी सिंचाई का विस्तार किसानों को भूजल पर निर्भरता कम करने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नहरों और जल वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के साथ खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किया है।
14 हजार किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क
भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए अब तक करीब 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। जून 2026 में भी मुख्यमंत्री ने बताया था कि लगभग 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन और वाटरकोर्स तैयार किए जा चुके हैं तथा सरकार इस साल अतिरिक्त 7,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने की योजना पर काम कर रही है।
सरकार की योजना का उद्देश्य नहरों से निकलने वाले पानी को सीधे कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाना और विशेष रूप से उन इलाकों में सिंचाई सुविधा बढ़ाना है, जहां किसानों की निर्भरता ट्यूबवेल और भूजल पर अधिक रही है।
2022 में 26 फीसदी था नहरी सिंचाई का हिस्सा
नहरी सिंचाई को लेकर पंजाब सरकार के आंकड़ों में यह बताया गया है कि 2022 में राज्य की करीब 26 फीसदी कृषि भूमि ही नहरों के जरिए सिंचित हो रही थी। मार्च 2026 में मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि यह आंकड़ा बढ़कर करीब 78 फीसदी, यानी लगभग 58 लाख एकड़ तक पहुंच गया है।
अगस्त में भी मुख्यमंत्री ने कहा था कि नहरी सिंचाई के तहत क्षेत्र 26 फीसदी से बढ़कर 80 फीसदी हो चुका है और करीब 60.30 लाख एकड़ भूमि तक नहरी पानी पहुंच रहा है, जबकि 2022 में यह क्षेत्र 20.89 लाख एकड़ बताया गया था।
हालांकि, अलग-अलग सरकारी बयानों में 78, 80 और 80-82 फीसदी जैसे आंकड़े सामने आए हैं। इन आंकड़ों में अंतर इस बात से जुड़ा हो सकता है कि अलग स्रोत नहरी जल के उपयोग, सिंचाई कवरेज या खेतों तक वास्तविक पहुंच को अलग-अलग तरीके से माप रहे हैं।
100 फीसदी खेतों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नहरी सिंचाई का प्रतिशत बढ़ाना नहीं बल्कि राज्य के हर खेत तक पानी पहुंचाना है। जिंदवड़ी में उन्होंने कहा कि मौजूदा करीब 80 फीसदी कवरेज को बढ़ाकर 100 फीसदी किया जाएगा।
इससे पहले जून में भी मान ने 7,000 किलोमीटर अतिरिक्त पाइपलाइन बिछाने की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि इसका उद्देश्य राज्य के प्रत्येक खेत तक नहरी पानी पहुंचाना है।
भूजल पर निर्भरता घटाने पर जोर
पंजाब लंबे समय से गिरते भूजल स्तर की चुनौती का सामना कर रहा है। कृषि क्षेत्र में धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों की खेती और ट्यूबवेल आधारित सिंचाई के कारण कई इलाकों में भूजल पर दबाव बढ़ा है।
राज्य सरकार का कहना है कि नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को सिंचाई के लिए भूजल पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। अगस्त में सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में नहरी पानी के उपयोग में वृद्धि और भूजल दोहन में कमी का दावा किया गया था।
सरकार ने नहरों के किनारे और जलस्रोतों के आसपास वाटर रिचार्ज पॉइंट विकसित करने की बात भी कही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में इन प्रयासों के बाद भूजल स्तर में दो से चार मीटर तक सुधार देखा गया है।
पुरानी नहरों और वाटरकोर्स को किया जा रहा पुनर्जीवित
मुख्यमंत्री ने मार्च 2026 में सिंचाई व्यवस्था पर सरकार की प्रगति बताते हुए कहा था कि करीब 101 बंद पड़ी नहरों, जिनकी कुल लंबाई लगभग 545 किलोमीटर थी, को पुनर्जीवित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा था कि कई नहरें 30 से 40 वर्षों से बंद थीं।
सरकार के अनुसार, करीब 13,000 किलोमीटर नहरों के निर्माण और पुनर्स्थापन पर काम किया गया तथा हजारों वाटरकोर्स को भी बहाल किया गया है। इन उपायों का उद्देश्य नहरी पानी को खेतों के अंतिम छोर तक पहुंचाना है।
1,587 गांवों तक पहुंचा नहरी पानी
अगस्त में मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि पहली बार 1,587 ऐसे गांवों के खेतों तक नहरी पानी पहुंचा है, जहां पहले नहरी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने इसे राज्य की सिंचाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण विस्तार के रूप में पेश किया था।
सरकार का कहना है कि इससे किसानों को सिंचाई के लिए वैकल्पिक स्रोत मिलेगा और बिजली से चलने वाले ट्यूबवेलों पर निर्भरता कम हो सकती है।
किसानों के लिए पानी की उपलब्धता बनी मुख्य चुनौती
पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था में सिंचाई की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में नहरी नेटवर्क के विस्तार का सीधा संबंध कृषि उत्पादन, बिजली की खपत और भूजल संरक्षण से है।
हालांकि, 100 फीसदी खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नहरों की क्षमता, पाइपलाइन नेटवर्क, वाटरकोर्स की स्थिति और खेतों के अंतिम छोर तक समान जल वितरण जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी। अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां भी सिंचाई व्यवस्था की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जिंदवड़ी के कार्यक्रम में दोहराया कि सरकार नहरी पानी की पहुंच को मौजूदा 80 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करने के लिए काम जारी रखेगी। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो इससे पंजाब की कृषि सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने और भूजल पर दबाव कम करने की संभावना है।
