21 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। फिटनेस के लिए महंगी जिम सदस्यता, भारी-भरकम मशीनें और घंटों का वर्कआउट जरूरी नहीं है। अपने शरीर के वजन का इस्तेमाल करके भी एक प्रभावी एक्सरसाइज रूटीन तैयार किया जा सकता है। योग और फिटनेस को लोकप्रिय बनाने वाले बाबा रामदेव लंबे समय से नियमित शारीरिक गतिविधि, योग और अनुशासित जीवनशैली पर जोर देते रहे हैं।
आज की Gen Z के लिए बॉडीवेट एक्सरसाइज खास तौर पर उपयोगी हो सकती हैं, क्योंकि इन्हें घर, पार्क, हॉस्टल या यात्रा के दौरान भी किया जा सकता है। यहां पांच ऐसे बॉडीवेट वर्कआउट दिए गए हैं, जिन्हें शुरुआती लोग भी अपनी क्षमता के अनुसार आजमा सकते हैं।
1. स्क्वाट: पैरों और लोअर बॉडी की मजबूत शुरुआत
स्क्वाट सबसे आसान और उपयोगी बॉडीवेट एक्सरसाइज में से एक है। इसमें किसी उपकरण की जरूरत नहीं होती और यह मुख्य रूप से जांघों, ग्लूट्स और पैरों की मांसपेशियों पर काम करती है।
कैसे करें:
- पैरों को कंधों की चौड़ाई के बराबर रखें।
- छाती को सीधा रखते हुए कूल्हों को पीछे ले जाएं।
- घुटनों को मोड़कर नीचे जाएं।
- जितना आराम से जा सकें, उतना नीचे जाएं और फिर वापस खड़े हो जाएं।
- शुरुआत में 8-12 दोहराव के 2-3 सेट किए जा सकते हैं।
स्क्वाट करते समय घुटनों को पैरों की दिशा में रखना और पीठ को अनावश्यक रूप से गोल न करना जरूरी है।
2. पुश-अप: ऊपरी शरीर की ताकत के लिए
पुश-अप बॉडीवेट ट्रेनिंग का क्लासिक अभ्यास है। यह छाती, कंधों और ट्राइसेप्स के साथ-साथ शरीर के कोर को भी सक्रिय करता है।
कैसे करें:
- हाथों को कंधों से थोड़ा बाहर रखें।
- शरीर को सिर से पैर तक एक सीधी रेखा में रखें।
- कोहनियों को नियंत्रित तरीके से मोड़ते हुए शरीर को नीचे लाएं।
- फिर हथेलियों से जमीन को धकेलते हुए शुरुआती स्थिति में लौटें।
यदि सामान्य पुश-अप मुश्किल लगता है तो घुटनों के बल या ऊंची सतह पर हाथ रखकर इसका आसान संस्करण किया जा सकता है।
Gen Z के लिए पुश-अप का एक फायदा यह है कि इसे किसी भी उपकरण के बिना किया जा सकता है और धीरे-धीरे दोहराव बढ़ाकर प्रगति को ट्रैक किया जा सकता है।
3. प्लैंक: कोर को मजबूत बनाने का आसान तरीका
प्लैंक देखने में सरल है, लेकिन सही तरीके से करने पर यह शरीर के कोर को चुनौती देता है। पेट और पीठ के आसपास की मांसपेशियों को स्थिर रखने के लिए यह उपयोगी हो सकता है।
कैसे करें:
- कोहनियों या हथेलियों को जमीन पर रखें।
- पैरों को पीछे फैलाएं।
- सिर, कंधे, कूल्हे और पैरों को लगभग सीधी रेखा में रखें।
- पेट की मांसपेशियों को सक्रिय रखते हुए स्थिति को कुछ समय तक बनाए रखें।
- शुरुआत 15-30 सेकंड से की जा सकती है।
प्लैंक के दौरान सांस रोकने के बजाय सामान्य रूप से सांस लेते रहना चाहिए। समय बढ़ाने की कोशिश तभी करें जब तकनीक सही बनी रहे।
4. लंज: संतुलन और पैरों की ताकत
लंज पैरों और ग्लूट्स को मजबूत करने के साथ-साथ शरीर के संतुलन और नियंत्रण को चुनौती देता है। इसे आगे, पीछे या जगह पर खड़े होकर किया जा सकता है।
कैसे करें:
- सीधे खड़े होकर एक पैर आगे बढ़ाएं।
- दोनों घुटनों को नियंत्रित तरीके से मोड़ें।
- आगे वाले पैर से दबाव डालकर वापस शुरुआती स्थिति में आएं।
- फिर दूसरे पैर से दोहराएं।
शुरुआत में प्रत्येक पैर से 8-10 दोहराव पर्याप्त हो सकते हैं। संतुलन में परेशानी होने पर दीवार या किसी स्थिर वस्तु का हल्का सहारा लिया जा सकता है।
5. माउंटेन क्लाइंबर: कार्डियो और कोर का संयोजन
अगर आप अपने बॉडीवेट रूटीन में थोड़ी तेजी और कार्डियो जोड़ना चाहते हैं तो माउंटेन क्लाइंबर एक विकल्प हो सकता है। इसमें प्लैंक जैसी स्थिति से पैरों को बारी-बारी से आगे लाया जाता है।
कैसे करें:
- पुश-अप की स्थिति में आएं।
- एक घुटने को छाती की ओर लाएं।
- पैर वापस ले जाकर दूसरे घुटने को आगे लाएं।
- नियंत्रित गति से पैरों को बारी-बारी से चलाते रहें।
शुरुआत धीमी गति से करें। अभ्यास बढ़ने पर गति बढ़ाई जा सकती है। यह एक्सरसाइज कोर के साथ-साथ शरीर के कई हिस्सों को सक्रिय करती है और कार्डियोवैस्कुलर चुनौती भी बढ़ा सकती है।
Gen Z के लिए 15-20 मिनट का रूटीन
इन पांच एक्सरसाइज को एक छोटे वर्कआउट सर्किट में भी शामिल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए:
वार्म-अप: 3-5 मिनट हल्की वॉकिंग या जगह पर मार्चिंग
मुख्य वर्कआउट:
- स्क्वाट — 10-12 दोहराव
- पुश-अप — 6-12 दोहराव
- लंज — प्रत्येक पैर से 8-10
- प्लैंक — 20-30 सेकंड
- माउंटेन क्लाइंबर — 20-30 सेकंड
शुरुआती व्यक्ति एक सर्किट से शुरुआत कर सकते हैं। क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे 2-3 सर्किट तक बढ़ाया जा सकता है।
योग के साथ जोड़ें सांस और मोबिलिटी
बाबा रामदेव की फिटनेस पद्धति में योग और प्राणायाम को भी महत्वपूर्ण स्थान मिलता है। बॉडीवेट ट्रेनिंग के साथ हल्की स्ट्रेचिंग, मोबिलिटी एक्सरसाइज और आराम के समय को शामिल करना शरीर को बेहतर तरीके से तैयार करने में मदद कर सकता है।
हालांकि, योग या प्राणायाम को इन पांच एक्सरसाइज का अनिवार्य विकल्प नहीं समझना चाहिए। दोनों का उद्देश्य अलग हो सकता है और व्यक्ति अपनी जरूरत तथा क्षमता के अनुसार इन्हें रूटीन में शामिल कर सकता है।
फिटनेस में निरंतरता सबसे जरूरी
बॉडीवेट एक्सरसाइज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनके लिए जिम या महंगे उपकरण जरूरी नहीं होते। लेकिन किसी भी फिटनेस रूटीन का फायदा तभी मिलता है जब उसे नियमित रूप से किया जाए।
Gen Z के लिए लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठने और कम शारीरिक गतिविधि वाली दिनचर्या के बीच रोजाना कुछ समय सक्रिय रहना उपयोगी हो सकता है। शुरुआत छोटे लक्ष्य से करें और धीरे-धीरे वर्कआउट की अवधि तथा कठिनाई बढ़ाएं।
यदि लंबे समय से व्यायाम नहीं किया है, कोई चोट है या एक्सरसाइज के दौरान दर्द, चक्कर या सांस लेने में असामान्य परेशानी महसूस होती है, तो व्यायाम रोककर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
