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6 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): घंटों लैपटॉप या मोबाइल की स्क्रीन देखते रहना आज की जीवनशैली का हिस्सा बन गया है, लेकिन इसका असर शरीर के उस हिस्से पर पड़ रहा है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं—गर्दन। लंबे समय तक सिर नीचे झुकाकर बैठने से गर्दन की मांसपेशियों और ऊपरी रीढ़ के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

NHS के सलाहकार स्पाइनल न्यूरोसर्जन एंथनी घोष के अनुसार, सीधी स्थिति में सिर गर्दन पर करीब 5.4 किलोग्राम का यांत्रिक भार डालता है। लेकिन जब व्यक्ति लंबे समय तक आगे झुककर मोबाइल या लैपटॉप देखता है, तो यह भार लगभग 27 किलोग्राम तक पहुंच सकता है। उनका संदेश सरल है—रीढ़ को लगातार एक ही स्थिति में रखने के बजाय उसे नियमित रूप से हिलाना जरूरी है।

गर्दन का दर्द इतना आम क्यों है?

गर्दन की समस्याएं केवल उम्र बढ़ने से नहीं होतीं। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना, खराब posture, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल और शारीरिक गतिविधि की कमी भी गर्दन पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की डिस्क और जोड़ों में प्राकृतिक बदलाव तथा stiffness भी आ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जीवन में किसी न किसी समय बड़ी संख्या में लोगों को गर्दन के दर्द का सामना करना पड़ता है।

खासकर मोबाइल और कंप्यूटर इस्तेमाल करते समय सिर आगे की ओर झुकाने की आदत गर्दन की मांसपेशियों पर लगातार तनाव डाल सकती है।

पहला कदम—गर्दन को नियमित रूप से हिलाएं

गर्दन को मजबूत रखने का मतलब हर समय भारी exercise करना नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण आदतों में से एक है लंबे समय तक गर्दन को एक ही position में न रखना।

काम के दौरान नियमित छोटे ब्रेक लें। कुछ देर स्क्रीन से नजर हटाएं, उठकर चलें और गर्दन तथा कंधों को आराम दें। NHS भी गर्दन को लंबे समय तक एक ही position में रखने से बचने और सामान्य गतिविधि जारी रखने की सलाह देता है।

1. Head Turn से शुरू करें

गर्दन की mobility बनाए रखने के लिए एक आसान exercise है सिर को धीरे-धीरे दाएं और बाएं घुमाना।

सीधे बैठें या पीठ के बल लेटें। सिर को आराम से दाईं ओर जितना सहज हो उतना घुमाएं और करीब दो सेकंड रुकें। फिर वापस बीच में आएं और बाईं ओर यही प्रक्रिया दोहराएं।

इसे शुरुआत में केवल कुछ repetitions के साथ करें। किसी भी movement को जोर लगाकर या अचानक नहीं करना चाहिए।

2. ‘Poking Chin’ की आदत सुधारें

मोबाइल या लैपटॉप देखते समय कई लोगों का सिर शरीर के बाकी हिस्से से आगे निकल जाता है। इसे forward-head या ‘poking chin’ posture कहा जा सकता है।

इसे सुधारने के लिए गर्दन को ऊपर की ओर लंबा रखने की कल्पना करें और ठुड्डी को बहुत हल्के से पीछे की ओर लाएं। कंधों को ढीला रखें और उन्हें आगे की ओर झुकने से बचाएं।

लक्ष्य गर्दन को जबरदस्ती पीछे खींचना नहीं, बल्कि सिर को कंधों के ऊपर अधिक neutral position में रखना है।

3. Deep neck muscles को मजबूत करें

गर्दन की stability में deep neck flexor muscles महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन मांसपेशियों की endurance बढ़ाना लंबे समय तक स्क्रीन देखने वाली जीवनशैली में मददगार हो सकता है।

एक exercise में पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और ठुड्डी को हल्के से अंदर की ओर लाएं। इसके बाद सिर को बहुत थोड़ी ऊंचाई तक उठाकर कुछ सेकंड hold करने की कोशिश की जा सकती है।

इसे धीरे-धीरे शुरू करना चाहिए। यदि दर्द बढ़ता है तो exercise रोक दें।

4. Chair या resistance band से strengthening

गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए chair headrest के खिलाफ सिर को हल्का दबाना और फिर ठुड्डी को नीचे की ओर लाने जैसी exercise भी बताई गई है।

अनुभवी लोगों के लिए resistance band का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे सही तकनीक से करना जरूरी है। गर्दन पर अचानक या बहुत ज्यादा resistance डालना उचित नहीं है।

यदि पहले से गर्दन की चोट, नस दबने की समस्या या गंभीर दर्द है तो ऐसी exercises physiotherapist या डॉक्टर की सलाह से ही करें।

सिर्फ गर्दन नहीं, कंधे और ऊपरी पीठ भी जरूरी

गर्दन को मजबूत बनाने के प्रयास में केवल गर्दन की मांसपेशियों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। गर्दन, कंधों और shoulder blades को शामिल करने वाले strengthening exercises भी उपयोगी हो सकते हैं।

क्लिनिकल गाइडलाइंस में persistent neck pain के मामलों में strengthening, endurance, flexibility और postural exercises को उपचार का हिस्सा माना गया है।

हर घंटे थोड़ा movement बेहतर हो सकता है

गर्दन के लिए सबसे उपयोगी बदलावों में से एक यह है कि exercise को केवल सुबह या शाम के workout तक सीमित न रखा जाए।

यदि आपका काम कंप्यूटर पर है तो बीच-बीच में उठना, स्क्रीन से नजर हटाना और गर्दन को आराम से move करना उपयोगी हो सकता है। NHS Inform सलाह देता है कि नए exercises को धीरे-धीरे शुरू करें और छोटी मात्रा में दिनभर दोहराना बेहतर हो सकता है।

दर्द होने पर exercise कब रोकें?

Exercise के दौरान हल्का discomfort और नए movement के कारण थोड़ी muscle soreness हो सकती है, लेकिन exercise के बाद गर्दन की समस्या लगातार ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

यदि exercise से दर्द बढ़ जाए, नया दर्द शुरू हो या लक्षण पहले से खराब हो जाएं तो exercise रोककर healthcare professional से सलाह लेना चाहिए।

यदि गर्दन का दर्द कई सप्ताह तक बना रहता है, बार-बार लौटता है या उसके साथ हाथ में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। NHS भी ऐसे neurological symptoms को चिकित्सकीय मूल्यांकन का कारण मानता है।

गर्दन की सेहत के लिए पांच आसान आदतें

  • मोबाइल को बहुत नीचे रखकर लंबे समय तक न देखें।
  • कंप्यूटर पर काम करते समय posture पर ध्यान दें।
  • लंबे समय तक एक ही position में न बैठें।
  • गर्दन और कंधों को नियमित रूप से हल्का move करें।
  • strengthening exercises धीरे-धीरे और सही technique के साथ करें।

निष्कर्ष

आधुनिक जीवनशैली में गर्दन को लगातार स्थिर रखना समस्या का हिस्सा बन सकता है। विशेषज्ञों का संदेश है कि गर्दन और रीढ़ को नियमित movement चाहिए। अच्छी posture, स्क्रीन से नियमित ब्रेक और धीरे-धीरे किए जाने वाले mobility तथा strengthening exercises गर्दन को अधिक resilient बनाने में मदद कर सकते हैं।

लेकिन गर्दन का दर्द हमेशा साधारण muscle strain नहीं होता। चोट, नस दबने या neurological symptoms की स्थिति में self-exercise के बजाय चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

स्वास्थ्य संबंधी अस्वीकरण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी गंभीर, लगातार या बढ़ते हुए गर्दन के दर्द में डॉक्टर या योग्य physiotherapist से व्यक्तिगत सलाह लें।

Bharat Baani Bureau

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