6 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): स्ट्रोक को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है, जिसमें इलाज शुरू होने में हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी वजह से अस्पतालों में 24 घंटे उपलब्ध स्ट्रोक सेवाएं मरीजों के लिए अहम साबित हो सकती हैं। ऐसी ही एक सेवा शुरू होने के बाद एक स्ट्रोक मरीज ने अपने इलाज को “किसी चमत्कार से कम नहीं” बताया है।
मरीज के अनुभव ने एक बार फिर इस बात को सामने रखा है कि स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानकर जितनी जल्दी हो सके अस्पताल पहुंचना क्यों जरूरी है। आधुनिक स्ट्रोक यूनिट में तत्काल जांच, मस्तिष्क की इमेजिंग और जरूरत के अनुसार उपचार उपलब्ध होने से मरीज के परिणाम बेहतर हो सकते हैं।
स्ट्रोक में समय क्यों है सबसे महत्वपूर्ण?
स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क की रक्तवाहिका फट जाती है। सबसे आम प्रकार इस्केमिक स्ट्रोक है, जिसमें रक्त का थक्का मस्तिष्क तक ऑक्सीजन पहुंचने से रोकता है।
ऑक्सीजन की कमी लंबे समय तक रहने पर मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए स्ट्रोक के मामले में डॉक्टर अक्सर “time is brain” की अवधारणा पर जोर देते हैं—यानी उपचार में देरी होने के साथ मस्तिष्क को होने वाला नुकसान बढ़ सकता है।
इसी कारण नए 24 घंटे के स्ट्रोक उपचार केंद्रों का उद्देश्य मरीजों को दिन या रात किसी भी समय विशेषज्ञ देखभाल उपलब्ध कराना है।
मरीज ने इलाज को बताया ‘चमत्कार’
नई सेवा का लाभ लेने वाले एक मरीज ने उपचार के बाद अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि जिस तेजी से उनकी स्थिति में सुधार हुआ, वह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।
मरीज के अनुसार, स्ट्रोक के लक्षण अचानक सामने आए थे और शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण था। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने तुरंत स्थिति का आकलन किया और आवश्यक जांच के बाद उपचार शुरू किया।
ऐसे मामलों में मरीज और परिवार की ओर से समय पर निर्णय लेना बेहद महत्वपूर्ण होता है। स्ट्रोक के लक्षणों को केवल थकान, कमजोरी या उम्र से जुड़ी समस्या मानकर इंतजार करना गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है।
स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण पहचानना जरूरी
विशेषज्ञ आम तौर पर स्ट्रोक के लक्षणों को जल्दी पहचानने के लिए FAST जैसे संकेतों का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं:
- F – Face: चेहरे का एक हिस्सा अचानक झुकना या मुस्कुराने में परेशानी।
- A – Arms: एक हाथ में अचानक कमजोरी या सुन्नपन।
- S – Speech: बोलने में परेशानी, शब्द अस्पष्ट होना या दूसरे की बात समझने में कठिनाई।
- T – Time: इन लक्षणों के सामने आते ही तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना।
इसके अलावा अचानक देखने में परेशानी, चलने में दिक्कत, चक्कर, संतुलन बिगड़ना या बिना कारण तेज सिरदर्द भी स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं।
24 घंटे की सेवा क्यों महत्वपूर्ण?
स्ट्रोक किसी भी समय हो सकता है। यदि अस्पताल में स्ट्रोक विशेषज्ञ, इमेजिंग और आपातकालीन उपचार की सुविधा केवल दिन के कुछ घंटों तक सीमित हो, तो रात में आने वाले मरीजों के लिए इलाज में देरी हो सकती है।
24 घंटे की सेवा का उद्देश्य इसी अंतर को कम करना है। इसमें आम तौर पर आपातकालीन मूल्यांकन, CT या MRI जैसी इमेजिंग, न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ की उपलब्धता और जरूरत के अनुसार तत्काल उपचार की व्यवस्था शामिल हो सकती है।
इस्केमिक स्ट्रोक के कुछ मरीजों में रक्त का थक्का घोलने वाली दवा thrombolysis उपयोगी हो सकती है, जबकि चुने हुए मरीजों में बड़े रक्तसंचार मार्ग में फंसे थक्के को निकालने के लिए mechanical thrombectomy की आवश्यकता पड़ सकती है।
हालांकि, इनमें से कौन सा उपचार उपयुक्त है, यह स्ट्रोक के प्रकार, लक्षण शुरू होने के समय, इमेजिंग रिपोर्ट और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
हर स्ट्रोक का इलाज एक जैसा नहीं होता
यह समझना भी जरूरी है कि स्ट्रोक केवल एक प्रकार का नहीं होता। इस्केमिक स्ट्रोक में रक्त का प्रवाह अवरुद्ध होता है, जबकि hemorrhagic stroke में मस्तिष्क के अंदर रक्तस्राव होता है।
इसलिए बिना जांच के किसी भी मरीज को रक्त पतला करने वाली दवा या अन्य उपचार देना खतरनाक हो सकता है। सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि स्ट्रोक किस प्रकार का है।
इसी वजह से अस्पताल पहुंचने के बाद मस्तिष्क की इमेजिंग उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
इलाज के बाद भी लंबी देखभाल जरूरी
स्ट्रोक से उबरने की प्रक्रिया केवल अस्पताल से छुट्टी मिलने तक सीमित नहीं रहती। कई मरीजों को शारीरिक कमजोरी, बोलने में कठिनाई, निगलने की समस्या या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो सकती है।
ऐसे मरीजों के लिए physiotherapy, occupational therapy और speech therapy जैसी rehabilitation सेवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
साथ ही भविष्य में दोबारा स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए रक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग और धूम्रपान जैसे जोखिम कारकों पर नियंत्रण जरूरी होता है।
मरीज की कहानी से मिला बड़ा संदेश
24 घंटे की नई स्ट्रोक सेवा से जुड़ी मरीज की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि स्ट्रोक के मामले में इंतजार नहीं करना चाहिए। मरीज या परिवार को यह तय करने में समय नहीं गंवाना चाहिए कि लक्षण गंभीर हैं या नहीं।
यदि अचानक चेहरे में कमजोरी, हाथ-पैर में सुन्नपन, बोलने में परेशानी या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी दिखाई दे, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
एक मरीज के लिए तेजी से मिला उपचार जीवन और स्थायी विकलांगता के बीच अंतर पैदा कर सकता है। नई 24 घंटे की सेवा इसी “golden time” को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
स्वास्थ्य संबंधी अस्वीकरण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर ऑनलाइन सलाह लेने के बजाय तुरंत स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा या अस्पताल से संपर्क करें।
