7 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा की सेहत का असर केवल भ्रूण को पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने तक सीमित नहीं हो सकता। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में प्लेसेंटल ग्रोथ फैक्टर (PlGF) का कम स्तर बाद में बच्चे में अटेंशन-डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) के निदान की अधिक संभावना से जुड़ा हो सकता है।
अमेरिका की University of Iowa Health Care के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया, जिसके निष्कर्ष JAMA Psychiatry में 23 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुए। शोधकर्ताओं के अनुसार, तीसरी तिमाही में PlGF का सामान्य रूप से बढ़ना जरूरी है, लेकिन जिन गर्भावस्थाओं से बाद में ADHD से diagnosed बच्चे हुए, उनमें यह बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली।
क्या है PlGF और क्यों महत्वपूर्ण है?
Placental Growth Factor (PlGF) प्लेसेंटा द्वारा बनाया जाने वाला एक प्रोटीन है। यह प्लेसेंटा में रक्त वाहिकाओं के विकास, भ्रूण के विकास और मां तथा भ्रूण के बीच रक्त प्रवाह से जुड़ा होता है।
गर्भावस्था में PlGF का कम स्तर पहले से ही प्री-एक्लेम्पसिया और भ्रूण के विकास में रुकावट जैसी कुछ जटिलताओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि क्या गर्भावस्था के दौरान PlGF के स्तर और बच्चे के बाद के neurodevelopmental outcomes के बीच भी कोई संबंध है।
176 गर्भावस्थाओं के नमूनों का किया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने University of Iowa के Perinatal Family Tissue Bank में सुरक्षित रखे गए 176 गर्भावस्थाओं के मातृ रक्त के नमूनों का इस्तेमाल किया।
इन नमूनों में गर्भावस्था की तीनों तिमाहियों के दौरान PlGF के स्तर को मापा गया और बाद में इन आंकड़ों को बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड से जोड़ा गया। इससे शोधकर्ताओं को यह देखने में मदद मिली कि किन गर्भावस्थाओं के बाद जन्मे बच्चों में आगे चलकर ADHD का निदान हुआ।
अध्ययन में पाया गया कि पहली और दूसरी तिमाही में PlGF के स्तर में ADHD वाले और बिना ADHD वाले बच्चों के समूह के बीच महत्वपूर्ण अंतर नहीं था। अंतर मुख्य रूप से तीसरी तिमाही में सामने आया।
तीसरी तिमाही में PlGF का कम स्तर बना मुख्य संकेत
शोधकर्ताओं के मुताबिक, जिन गर्भावस्थाओं से बाद में ADHD का निदान पाने वाले बच्चे पैदा हुए, उनमें तीसरी तिमाही के दौरान PlGF में सामान्य वृद्धि नहीं हुई।
अध्ययन में पाया गया कि PlGF के स्तर में प्रत्येक standard-deviation की कमी बच्चे में बाद में ADHD diagnosis की odds को लगभग 2.6 गुना बढ़ाने से जुड़ी थी। यह एक statistical association है, यानी कम PlGF और ADHD diagnosis के बीच संबंध देखा गया; इसका अर्थ यह नहीं है कि कम PlGF सीधे ADHD पैदा करता है।
शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था से जुड़े कुछ अन्य कारकों को भी ध्यान में रखा। इनमें प्री-एक्लेम्पसिया, fetal growth restriction और early preterm birth शामिल थे। इन स्थितियों को ध्यान में रखने के बाद भी तीसरी तिमाही के कम PlGF और ADHD के बीच संबंध बना रहा।
प्लेसेंटा-ब्रेन कनेक्शन पर बढ़ा ध्यान
प्लेसेंटा गर्भावस्था के दौरान केवल पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने वाला अंग नहीं है। यह कई हार्मोन और signaling molecules के जरिए भ्रूण के विकास को प्रभावित करता है। इसी कारण वैज्ञानिकों में “placenta-brain axis” को लेकर रुचि बढ़ रही है।
University of Iowa के शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके निष्कर्ष इस संभावना की ओर इशारा करते हैं कि गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा में होने वाले सूक्ष्म बदलाव बच्चे के मस्तिष्क के विकास से जुड़े हो सकते हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि प्लेसेंटा में किसी असामान्यता वाले हर बच्चे में ADHD होगा। ADHD एक जटिल neurodevelopmental condition है, जिसमें आनुवंशिक और कई prenatal तथा postnatal factors भूमिका निभा सकते हैं।
एक और प्रोटीन में नहीं मिला महत्वपूर्ण अंतर
शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था में vascular health से जुड़े एक अन्य protein endothelin-1 के स्तर की भी जांच की। इसमें ADHD वाले और बिना ADHD वाले समूहों के बीच महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला।
इससे शोधकर्ताओं को यह संकेत मिला कि इस छोटे अध्ययन में तीसरी तिमाही का PlGF विशेष रूप से ध्यान देने योग्य biomarker हो सकता है। हालांकि, इसकी clinical usefulness तय करने के लिए बड़े अध्ययनों की जरूरत होगी।
क्या इससे ADHD की भविष्यवाणी की जा सकती है?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
शोधकर्ताओं ने खुद इस अध्ययन को शुरुआती निष्कर्ष बताया है। अध्ययन में केवल 176 गर्भावस्थाएं शामिल थीं और सभी नमूने एक ही medical center से आए थे। इसलिए इसके निष्कर्षों को बड़े और अलग-अलग आबादी वाले समूहों में दोहराना जरूरी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अध्ययन observational है। इसलिए यह साबित नहीं करता कि PlGF का कम स्तर ADHD का कारण है। संभव है कि अन्य जैविक या गर्भावस्था संबंधी कारक इस संबंध में भूमिका निभा रहे हों।
भविष्य में क्या बदल सकता है?
यदि भविष्य के बड़े अध्ययनों में यही संबंध दोहराया जाता है और प्रयोगशाला शोध से causal mechanism की पुष्टि होती है, तो PlGF गर्भावस्था और बच्चे के neurodevelopment को समझने के लिए एक संभावित biomarker बन सकता है।
University of Iowa की शोध टीम आगे animal studies के जरिए यह समझने की योजना बना रही है कि PlGF में बदलाव सीधे neurodevelopment को प्रभावित करता है या नहीं। यदि इस संबंध की पुष्टि होती है, तो भविष्य में कुछ बच्चों को शुरुआती developmental monitoring देने के लिए pregnancy-related biomarkers का इस्तेमाल संभव हो सकता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए इसका क्या मतलब?
फिलहाल इस अध्ययन के आधार पर गर्भवती महिलाओं के लिए किसी विशेष screening test या treatment की सिफारिश नहीं की गई है। केवल PlGF के स्तर को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी बच्चे को भविष्य में ADHD होगा या नहीं।
गर्भावस्था के दौरान नियमित prenatal care, डॉक्टर द्वारा सुझाए गए tests और किसी भी pregnancy complication का समय पर उपचार महत्वपूर्ण हैं। गर्भावस्था में किसी biomarker या test को लेकर चिंता होने पर महिला को अपने obstetrician से सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
नया अध्ययन इस बात के बढ़ते वैज्ञानिक प्रमाणों में जुड़ता है कि बच्चे के neurodevelopment की कहानी जन्म से पहले ही शुरू हो सकती है। तीसरी तिमाही में कम PlGF और बाद में ADHD diagnosis के बीच संबंध इस दिशा में एक नया संकेत देता है।
लेकिन अभी इसे ADHD का कारण या भविष्यवाणी करने वाला निश्चित test नहीं माना जा सकता। बड़े अध्ययनों और आगे के प्रयोगों से यह समझना जरूरी होगा कि प्लेसेंटा की सेहत और बच्चे के मस्तिष्क के विकास के बीच वास्तव में कितना सीधा संबंध है।
स्वास्थ्य संबंधी अस्वीकरण: यह लेख एक वैज्ञानिक अध्ययन के निष्कर्षों पर आधारित सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। इसे व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह या ADHD के जोखिम का आकलन मानकर इस्तेमाल न करें।
