13 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो : कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद भारत दौरे पर हैं। इस दौरान वह भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और रक्षा सहयोग सहित दोनों देशों के आपसी संबंधों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
यह दौरा भारत और कनाडा के बीच राजनयिक संवाद को आगे बढ़ाने तथा आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर तलाशने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध, ऊर्जा क्षेत्र में संभावनाएं और सुरक्षा सहयोग लंबे समय से द्विपक्षीय एजेंडे का हिस्सा रहे हैं।
भारत-कनाडा संबंधों को मजबूत करने पर जोर
कनाडा सरकार की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, अनीता आनंद 13 से 16 अक्टूबर तक भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दौरे पर रहेंगी। भारत में उनकी जयशंकर के साथ बैठक का उद्देश्य द्विपक्षीय रोडमैप के तहत तय प्राथमिकताओं पर सहयोग आगे बढ़ाना है।
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इस बातचीत में व्यापार और निवेश के साथ ऊर्जा सहयोग पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और असैन्य परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं पहले भी दोनों देशों की चर्चाओं में शामिल रही हैं।
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व्यापक व्यापार समझौते पर भी नजर
भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर बातचीत जारी है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक अवसर बढ़ाना और आर्थिक संबंधों को विस्तार देना है।
कनाडा सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत और कनाडा के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 30.4 अरब कनाडाई डॉलर रहा था, जिसमें वस्तुओं का व्यापार 11 अरब कनाडाई डॉलर था। यह आंकड़ा दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक संबंधों के महत्व को दर्शाता है।
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ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भी लेंगी हिस्सा
भारत दौरे के दौरान अनीता आनंद नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भी भाग लेंगी। यहां वह बदलती वैश्विक व्यवस्था और मध्यम शक्तियों की भूमिका पर चर्चा करेंगी। भारत के बाद वह संयुक्त अरब अमीरात जाएंगी, जहां उनकी वहां के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं।
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भारत और कनाडा के बीच यह उच्चस्तरीय संपर्क व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। हालांकि, किसी नए समझौते या ठोस फैसले की घोषणा होने तक वार्ता के परिणामों को लेकर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
