30 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): भारत ने गरीबी कम करने के मामले में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के अनुसार, देश में अत्यधिक गरीबी की दर 2011-12 के 27.1 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 2.6 प्रतिशत रह गई है। रिपोर्ट ने इस उपलब्धि को दुनिया में गरीबी घटने की सबसे तेज दरों में से एक बताया है। इसी अवधि में लगभग 49.6 करोड़ लोग 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली निम्न-मध्यम आय देशों की गरीबी सीमा से ऊपर आए।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में गरीबी का आकलन अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखाओं और घरेलू उपभोग सर्वेक्षणों के आधार पर किया गया है। अत्यधिक गरीबी के लिए प्रतिदिन 3 डॉलर प्रति व्यक्ति की सीमा निर्धारित की गई है। यह राशि 2021 की क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर है। इस मानक पर गरीबी दर में 24.5 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज हुई है।
4.20 डॉलर की गरीबी सीमा पर भी बड़ी गिरावट
रिपोर्ट में केवल अत्यधिक गरीबी ही नहीं, बल्कि निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए निर्धारित 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी सीमा पर भी भारत की प्रगति दर्ज की गई है। इस मानक के अनुसार, गरीबी दर 2011-12 में 57.7 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में घटकर 16.1 प्रतिशत रह गई।
इसका अर्थ है कि 12 वर्षों के दौरान करोड़ों लोग गरीबी के इस स्तर से ऊपर आए। विश्व बैंक के आकलन में इस अवधि में करीब 49.6 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, 4.20 डॉलर वाली गरीबी सीमा और 3 डॉलर वाली अत्यधिक गरीबी सीमा अलग-अलग मानक हैं, इसलिए दोनों के आंकड़ों को एक-दूसरे के स्थान पर नहीं समझना चाहिए।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी सुधार
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, गरीबी में कमी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दर्ज की गई है। अत्यधिक गरीबी की ग्रामीण दर 2011-12 के 31 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 3.1 प्रतिशत रह गई। शहरी क्षेत्रों में यह दर 17.4 प्रतिशत से घटकर 1.4 प्रतिशत पर पहुंच गई।
हालांकि, 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी सीमा के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी की दर 19.3 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 8.6 प्रतिशत रही। इससे पता चलता है कि अत्यधिक गरीबी में बड़ी गिरावट के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक चुनौतियां अभी भी अधिक हैं।
गरीबी घटने के पीछे क्या रहे प्रमुख कारण?
विश्व बैंक ने गरीबी में कमी के पीछे मजबूत उपभोग वृद्धि, रोजगार में बढ़ोतरी और सामाजिक कल्याण योजनाओं के विस्तार को प्रमुख कारण बताया है। विशेष रूप से महिलाओं की रोजगार में बढ़ती भागीदारी और खाद्य सब्सिडी जैसी सरकारी सहायता योजनाओं ने परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने में योगदान दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या में लगभग 13.4 करोड़ की वृद्धि हुई। इस वृद्धि में ग्रामीण महिलाओं की सशुल्क रोजगार में भागीदारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं और अन्य सामाजिक हस्तांतरण कार्यक्रमों ने भी कम आय वाले परिवारों को राहत पहुंचाई।
उपलब्धियों के बावजूद रोजगार और आय में असमानता चुनौती
विश्व बैंक ने गरीबी घटने की उपलब्धि के साथ कुछ गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में रोजगार की संख्या बढ़ी है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों को अभी भी कम उत्पादकता और अपेक्षाकृत कम गुणवत्ता वाले कामों पर निर्भर रहना पड़ता है।
वेतन में असमानता भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। वर्ष 2023 में सबसे अधिक कमाई करने वाले 10 प्रतिशत कर्मचारियों की मध्य आय सबसे कम कमाई करने वाले 10 प्रतिशत कर्मचारियों की तुलना में लगभग 13 गुना थी। इसके अलावा, युवा बेरोजगारी में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही से वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के बीच युवा बेरोजगारी दर 14.6 प्रतिशत से बढ़कर 15.9 प्रतिशत हो गई।
गरीबी का क्षेत्रीय वितरण भी चिंता का विषय है। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले राज्यों के समूह में देश की गरीब आबादी का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा रहता है। इन क्षेत्रों में बेहतर रोजगार, कौशल विकास और उत्पादक आर्थिक गतिविधियों का विस्तार गरीबी कम करने के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण होगा।
आगे भी गरीबी घटने का अनुमान
विश्व बैंक ने अनुमान जताया है कि 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी सीमा के आधार पर भारत की गरीबी दर 2026 में 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकती है। हालांकि, बैंक ने स्पष्ट किया है कि ये अनुमान उपलब्ध आंकड़ों और आर्थिक परिस्थितियों पर आधारित हैं तथा भविष्य में इनमें बदलाव संभव है।
आगे भी गरीबी घटने का अनुमान
विश्व बैंक ने अनुमान जताया है कि 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी सीमा के आधार पर भारत की गरीबी दर 2026 में 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकती है। हालांकि, बैंक ने स्पष्ट किया है कि ये अनुमान उपलब्ध आंकड़ों और आर्थिक परिस्थितियों पर आधारित हैं तथा भविष्य में इनमें बदलाव संभव है।
