30 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): रूस और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है कि बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने से स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई बाल्टिक सागर को फारस की खाड़ी या होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी स्थिति में बदलना चाहता है? पुतिन ने कहा कि रूस युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार है।
पुतिन ने गुरुवार को मॉस्को में रूस-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि यूरोप के साथ टकराव बढ़ने पर किसी भी पक्ष को जीत नहीं मिलेगी। उनके मुताबिक, यदि हालात नियंत्रण से बाहर हुए तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और सभी देशों को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि मॉस्को यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी सुरक्षा और हितों को चुनौती दिए जाने पर प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने कहा, “हम तैयार हैं, लेकिन यूरोप के साथ कोई युद्ध नहीं चाहते।”
बाल्टिक सागर में नौवहन को लेकर चिंता
पुतिन की टिप्पणी का मुख्य केंद्र बाल्टिक सागर में समुद्री आवाजाही और संभावित प्रतिबंध रहे। बाल्टिक सागर रूस सहित कई यूरोपीय देशों के लिए व्यापार और समुद्री परिवहन का महत्वपूर्ण मार्ग है। इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है।
पुतिन ने होर्मुज जलडमरूमध्य का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पैदा हुई बाधाओं जैसी स्थिति बाल्टिक क्षेत्र में नहीं होनी चाहिए। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस परिवहन का एक अहम समुद्री मार्ग है। वहां तनाव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।
फिनलैंड और नॉर्वे के नेताओं से बातचीत का भी जिक्र
पुतिन ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे के साथ हाल में हुई टेलीफोन बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने उनसे बातचीत की पहल की थी और इस तरह के संपर्क रूस तथा यूरोपीय देशों के बीच संबंध सुधारने में मददगार हो सकते हैं।
इन नेताओं की मॉस्को से बातचीत को लेकर यूरोप के कुछ राजनीतिक हलकों में आलोचना हुई थी। हालांकि, पुतिन ने राजनयिक संवाद को जरूरी बताते हुए कहा कि रूस यूरोपीय देशों के साथ संबंध सामान्य करने के प्रयासों के लिए तैयार है।
रूस-यूरोप तनाव के बीच बढ़ी समुद्री सुरक्षा की अहमियत
यूक्रेन युद्ध और रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद मॉस्को और यूरोपीय राजधानियों के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। बाल्टिक सागर का रणनीतिक महत्व भी इस वजह से बढ़ा है। इस क्षेत्र में रूस की समुद्री गतिविधियों, यूरोपीय सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
पुतिन के बयान को यूरोप के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष देश या प्रस्तावित कार्रवाई का नाम नहीं लिया। उनका संदेश मुख्य रूप से यह था कि समुद्री मार्गों पर प्रतिबंध और सैन्य टकराव की स्थिति को बढ़ाने से बचना चाहिए।
रूसी राष्ट्रपति ने एक बार फिर कहा कि उनका देश यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी चुनौती का जवाब देगा। उन्होंने सभी पक्षों से तनाव बढ़ाने वाले कदमों के संभावित परिणामों पर विचार करने की अपील की।
