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4 नवंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां एक ऐसे नेता के रूप में उभर रहे हैं, जिन्हें संवेदनशील और मुश्किल राजनीतिक मुद्दों को संभालने की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। पार्टी के भीतर उन्हें अब एक भरोसेमंद संकटमोचक के तौर पर देखा जाने लगा है। हाल ही में मानसा में मारे गए नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात के बाद उनकी भूमिका फिर चर्चा में आ गई है।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, खुड्डियां सोमवार को सरदूलगढ़ के विधायक गुरप्रीत सिंह बनावाली के साथ झोटा के परिवार से मिलने पहुंचे। झोटा की मौत के 22 दिन बाद सत्तारूढ़ AAP की ओर से परिवार से मिलने वाले वह पहले प्रतिनिधि बने। इस मुलाकात को मानसा में जारी विरोध प्रदर्शन और सरकार के बीच बने गतिरोध को खत्म करने की दिशा में शुरुआती पहल के रूप में देखा जा रहा है।

झोटा परिवार से मुलाकात बनी अहम

परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद से मानसा में न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। परिवार और इंसाफ कमेटी की मांगों के कारण राज्य सरकार पर लगातार दबाव बना हुआ है। झोटा के पिता भीम सिंह ने पहले ही स्पष्ट किया था कि पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार को लेकर परिवार की सहमति कुछ मांगें पूरी होने से जुड़ी है।

खुड्डियां ने परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और मामले को सुलझाने के रास्ते तलाशने की कोशिश की। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने परिवार के साथ करीब 45 मिनट बिताए। हालांकि, उन्होंने मीडिया के सवालों पर प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि परिवार ने सरकार के साथ उच्चस्तरीय बैठक की मांग उठाई थी।

किसान संगठनों के साथ भी संभाली थी बातचीत

खुड्डियां की यह भूमिका पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले चंडीगढ़ के बाहरी इलाके में किसान संगठनों के प्रदर्शन के दौरान भी उन्होंने किसान नेताओं के साथ बातचीत की थी। उन्होंने उनकी मांगों को सुना और बातचीत के नतीजों को पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाया। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शन खत्म कराने की दिशा में रास्ता निकला था।

किसान संगठनों के साथ संवाद और अब झोटा परिवार से मुलाकात ने खुड्डियां को सरकार और विरोध कर रहे समूहों के बीच संपर्क स्थापित करने वाले नेता के रूप में चर्चा में ला दिया है। उनकी ग्रामीण पृष्ठभूमि और सहज व्यवहार को भी इस भूमिका के अनुकूल माना जा रहा है।

राजनीतिक सफर और ‘जायंट किलर’ की पहचान

गुरमीत सिंह खुड्डियां का राजनीतिक सफर भी काफी चर्चा में रहा है। वह पूर्व सांसद जत्थेदार जगदेव सिंह खुड्डियां के बेटे हैं। वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने लंबी विधानसभा सीट से शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल को 11,396 मतों से हराया था। इस जीत के बाद उन्हें ‘जायंट किलर’ कहा जाने लगा।

मई 2023 में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया। उन्हें कृषि और किसान कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद से वह राज्य में कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों और किसानों के मामलों पर सक्रिय रहे हैं।

पार्टी के भीतर चुनौतियां भी रहीं

खुड्डियां की राजनीतिक भूमिका के साथ पार्टी के भीतर मतभेदों की खबरें भी सामने आती रही हैं। मई 2026 में लुधियाना में हुई एक बैठक के दौरान उनकी AAP के पंजाब मामलों के प्रभारी मनीष सिसोदिया के साथ कथित तौर पर तीखी बहस हुई थी। विवाद नगर निगम चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन और टिकट वितरण से जुड़ा बताया गया था। बाद में पार्टी के कुछ विधायकों ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली।

इसके बावजूद, संवेदनशील मुद्दों पर उनकी सक्रियता को पार्टी नेतृत्व के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कैबिनेट में वरिष्ठ सहयोगियों हरपाल सिंह चीमा और अमन अरोड़ा की तरह खुड्डियां भी अब उन नेताओं में शामिल हो रहे हैं, जिन्हें मुश्किल परिस्थितियों में संवाद और समाधान की जिम्मेदारी दी जाती है।

पंजाब में विधानसभा चुनावों से पहले नशे, किसानों की मांगों और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में खुड्डियां की भूमिका आने वाले समय में और अहम हो सकती है। हालांकि, किसी भी विवाद का स्थायी समाधान केवल मुलाकातों से नहीं, बल्कि सरकार की ठोस कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की मांगों पर समयबद्ध फैसलों से ही संभव होगा।

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