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29 अक्टूबर 2025 (भारत बानी ब्यूरो ) : हेल्दी शरीर के लिए ज़रूरी है कि नींद अच्छी आए। अच्छी नींद शरीर और मन को तरोताज़ा महसूस कराती है। लेकिन क्या आप जानते हैं ज़रूरत से ज़्यादा सोना आपको अवसाद में धकेल सकता है। बिल्कुल सही पढ़ रहे हैं आप!  ज़रूरत से ज़्यादा सोना मानसिक तनाव के साथ सेहत के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। इससे मोटापे, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।

अवसाद की वजह बन सकता है ज़्यादा सोना:

नींद न आना अवसाद का एक बहुत ही आम लक्षण है। लेकिन ज़्यादा सोना भी अवसाद के लक्षणों में से एक है। लगभग 15% से 40% लोगों में अवसाद के साथ हाइपरसोम्निया देखा जाता है। हाइपरसोम्निया मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। हाइपरसोम्निया में व्यक्ति अक्सर रात में लंबे समय तक सोता है और फिर भी दिन में बहुत ज़्यादा नींद महसूस करता है और जागने में परेशानी होती है। यह स्थिति चिंता, चिड़चिड़ापन का कारण बनती है। कुछ लोगों के लिए सोना भावनात्मक पीड़ा से बचने का एक तरीका बन जाता है, लेकिन यह एक दुष्चक्र पैदा कर देता है जो अवसाद के लक्षणों को और गहरा कर देता है।

बढ़ सकती हैं ये परेशानियां भी:

  • मोटापा बढ़ना: ज़्यादा सोने से वज़न बढ़ सकता है, क्योंकि ज़्यादा सोने से घरेलिन और लेप्टिन जैसे हार्मोन के संतुलन पर असर पड़ता है। घ्रेलिन भूख बढ़ाता है और लेप्टिन भूख को कम करता है, और इनके संतुलन बिगड़ने से भूख ज़्यादा लग सकती है। ज़्यादा सोने से मेटाबोलिज्म धीमा हो सकता है, जिससे शरीर में फैट जमा होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • ब्लड शुगर बढ़ना: अधिक नींद और अपर्याप्त नींद दोनों ही ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ा सकते हैं, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। नींद की कमी या ज़्यादा नींद दोनों ही हार्मोन असंतुलन और इंसुलिन प्रतिरोध का कारण बन सकते हैं, जिससे शरीर ग्लूकोज को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता है।
  • हृदय रोग का खतरा: बहुत ज़्यादा सोने से हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि प्रति रात 7-8 घंटे की नींद लेना हृदय स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा है, और इससे कम या ज़्यादा सोने से हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

सारांश:
अत्यधिक नींद लेना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिन में 9 घंटे से ज्यादा सोने से शरीर की मेटाबॉलिक एक्टिविटी धीमी हो जाती है, जिससे मोटापा तेजी से बढ़ता है। साथ ही, ज्यादा नींद मानसिक संतुलन पर असर डालकर डिप्रेशन और थकान जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है। हेल्दी रहने के लिए रोजाना 7-8 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है।

Bharat Baani Bureau

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