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17 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। एक से अधिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए कई दवाएं लेना आज आम बात है, खासकर बुजुर्गों और लंबे समय से किसी बीमारी का इलाज करा रहे लोगों में। लेकिन जब कोई व्यक्ति एक साथ कई प्रिस्क्रिप्शन और बिना प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाएं लेता है, तो दवाओं के बीच संभावित इंटरैक्शन, साइड इफेक्ट और गलत डोज का जोखिम बढ़ सकता है। इसी स्थिति को आम तौर पर पॉलीफार्मेसी (Polypharmacy) कहा जाता है।

पॉलीफार्मेसी अपने आप में हमेशा गलत नहीं होती। कई मरीजों को एक साथ कई दवाओं की चिकित्सकीय रूप से जरूरत हो सकती है। चिंता तब बढ़ती है जब दवाओं की संख्या बढ़ने के साथ उनकी आवश्यकता, डोज, संभावित इंटरैक्शन और मरीज की बदलती स्वास्थ्य स्थिति की नियमित समीक्षा नहीं हो पाती।

पॉलीफार्मेसी क्या है?

आमतौर पर पॉलीफार्मेसी का इस्तेमाल तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से कई दवाएं ले रहा हो। कुछ चिकित्सकीय परिभाषाओं में पांच या उससे अधिक दवाओं के नियमित इस्तेमाल को पॉलीफार्मेसी माना जाता है, जबकि इससे भी अधिक दवाओं के इस्तेमाल को कभी-कभी ‘हाइपर-पॉलीफार्मेसी’ कहा जाता है।

यह स्थिति विशेष रूप से उन लोगों में देखने को मिल सकती है जिन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, गठिया या अन्य दीर्घकालिक बीमारियों के लिए अलग-अलग उपचार की जरूरत होती है।

इसके अलावा, मरीज एक डॉक्टर द्वारा लिखी दवाओं के साथ दूसरे विशेषज्ञ की दवाएं, दर्द निवारक, विटामिन, हर्बल उत्पाद या बाजार से खरीदी गई ओवर-द-काउंटर दवाएं भी ले सकता है। यदि सभी दवाओं की जानकारी एक ही स्वास्थ्य पेशेवर के पास नहीं है, तो संभावित जोखिम बढ़ सकते हैं।

दवाओं की संख्या बढ़ने पर क्या जोखिम होते हैं?

कई दवाएं एक साथ लेने से सबसे महत्वपूर्ण चिंता drug-drug interactions की होती है। एक दवा दूसरी दवा के असर को बढ़ा या घटा सकती है। कुछ दवाएं शरीर में किसी अन्य दवा के अवशोषण, चयापचय या बाहर निकलने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।

कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट भी एक-दूसरे को बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, ऐसी दवाएं जो नींद या चक्कर पैदा करती हैं, यदि साथ ली जाएं तो गिरने का खतरा बढ़ सकता है।

बुजुर्गों में यह समस्या अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ शरीर दवाओं को अवशोषित और बाहर निकालने के तरीके में बदलाव आता है। किडनी या लिवर की कार्यक्षमता में कमी होने पर कुछ दवाओं का शरीर में अधिक समय तक रहना भी संभव है।

गलत दवा या गलत डोज का खतरा

जितनी अधिक दवाएं होंगी, उतना ही मरीज के लिए सही समय पर सही दवा लेना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मिलते-जुलते नाम वाली दवाओं या अलग-अलग ब्रांड नामों से भ्रम भी हो सकता है।

कभी-कभी मरीज एक ही सक्रिय घटक वाली दो अलग-अलग दवाएं अनजाने में ले सकता है। इसी तरह, अस्पताल से छुट्टी मिलने, डॉक्टर बदलने या नई बीमारी का इलाज शुरू होने के बाद पुरानी दवाओं की समीक्षा नहीं होने पर अनावश्यक दवाएं जारी रह सकती हैं।

दवाओं की संख्या बढ़ने के साथ medication adherence, यानी निर्धारित तरीके से दवा लेने में भी कठिनाई आ सकती है।

नियमित ‘मेडिकेशन रिव्यू’ क्यों जरूरी?

पॉलीफार्मेसी के मामले में नियमित medication review महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें डॉक्टर या फार्मासिस्ट मरीज की सभी दवाओं की सूची देखते हैं और यह जांचते हैं कि प्रत्येक दवा अभी भी जरूरी है या नहीं।

समीक्षा में आम तौर पर ये बातें देखी जा सकती हैं:

  • कौन-सी दवा किस बीमारी के लिए ली जा रही है।
  • प्रत्येक दवा की सही डोज और समय।
  • दवाओं के बीच संभावित इंटरैक्शन।
  • दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट।
  • क्या किसी दवा की अब जरूरत नहीं है।
  • क्या किसी दवा को बदलने या बंद करने की आवश्यकता है।
  • मरीज अन्य डॉक्टरों से कौन-कौन सी दवाएं ले रहा है।
  • क्या मरीज विटामिन, सप्लीमेंट या हर्बल उत्पाद भी इस्तेमाल कर रहा है।

खुद से दवा बंद करना भी जोखिम भरा

कई दवाओं के संभावित नुकसान देखकर मरीज यह सोच सकता है कि वह किसी दवा को अपने आप बंद कर देगा। लेकिन यह भी खतरनाक हो सकता है।

कुछ दवाओं को अचानक बंद करने से बीमारी के लक्षण वापस आ सकते हैं या अन्य गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए दवा कम करने, बदलने या बंद करने का निर्णय डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य पेशेवर के साथ चर्चा के बाद ही किया जाना चाहिए।

इसी तरह, किसी नई दवा को शुरू करने से पहले मरीज को अपनी मौजूदा सभी दवाओं की जानकारी डॉक्टर को देनी चाहिए।

मरीज और परिवार की भूमिका

पॉलीफार्मेसी को सुरक्षित तरीके से संभालने में मरीज और उसके परिवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। सभी दवाओं की एक अपडेटेड सूची रखना उपयोगी हो सकता है। इसमें दवा का नाम, डोज, कितनी बार लेनी है और किस कारण से ली जा रही है, जैसी जानकारी शामिल की जा सकती है।

हर डॉक्टर की अपॉइंटमेंट पर यह सूची साथ रखना भी मददगार हो सकता है। अस्पताल में भर्ती होने या किसी नए डॉक्टर से इलाज शुरू करने की स्थिति में भी पूरी जानकारी साझा करनी चाहिए।

दवा लेने के बाद असामान्य चक्कर, अत्यधिक नींद, भ्रम, सांस लेने में परेशानी, एलर्जी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

लक्ष्य दवाएं कम करना नहीं, उपचार सुरक्षित बनाना है

पॉलीफार्मेसी के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ज्यादा दवाएं लेना अपने आप में गलत उपचार का प्रमाण नहीं है। कई जटिल स्वास्थ्य स्थितियों में कई दवाओं की आवश्यकता हो सकती है।

मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज जो भी दवाएं ले रहा है, वे उसके लिए आवश्यक, प्रभावी और यथासंभव सुरक्षित हों। इसके लिए डॉक्टर, फार्मासिस्ट, मरीज और परिवार के बीच नियमित संवाद जरूरी है।

बढ़ती उम्र और कई दीर्घकालिक बीमारियों के साथ दवाओं की संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में नियमित दवा समीक्षा, सही डोज, संभावित इंटरैक्शन पर नजर और किसी भी बदलाव की जानकारी स्वास्थ्य पेशेवर को देना उपचार को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद कर सकता है।

Bharat Baani Bureau

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