19 फरवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : सोना और चांदी में उतार-चढ़ाव के बीच ट्रेडिंग करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर लगाए गए एक्स्ट्रा मार्जिन को हटाने का फैसला किया है। यह बदलाव 19 फरवरी, गुरुवार से लागू हो गया है। इस कदम से ट्रेडर्स की लागत कम होगी और बाजार में कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।
इस महीने की शुरुआत में सोना और चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए MCX ने सभी गोल्ड फ्यूचर्स पर 3% और सभी सिल्वर फ्यूचर्स पर 7% एक्स्ट्रा मार्जिन लगाया था। इसी तरह NSE क्लियरिंग लिमिटेड ने भी 4 फरवरी से गोल्ड पर 3% और सिल्वर पर 7% एक्स्ट्रा मार्जिन लागू किया था। यह कदम जोखिम प्रबंधन के तहत उठाया गया था, ताकि अत्यधिक उतार-चढ़ाव की स्थिति में एक्सचेंज और निवेशकों को सुरक्षा मिल सके।
क्यों हटाया गया एक्स्ट्रा मार्जिन?
हाल के सत्रों में कीमती धातुओं की कीमतों में कुछ स्थिरता देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेज उछाल और गिरावट के बाद अब उतार-चढ़ाव में थोड़ी नरमी आई है। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों एक्सचेंजों ने एक्स्ट्रा मार्जिन वापस लेने का फैसला किया। एक्सचेंजों ने अपने क्लियरिंग मेंबर्स को सर्कुलर जारी कर इस बदलाव की जानकारी दे दी है और पोजीशन को नए नियमों के अनुसार समायोजित करने को कहा है।
ट्रेडर्स को क्या मिलेगा फायदा?
एक्स्ट्रा मार्जिन हटने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब फ्यूचर्स ट्रेडिंग के लिए कम पूंजी की जरूरत होगी। पहले बढ़े हुए मार्जिन के कारण ट्रेडर्स को ज्यादा राशि ब्लॉक करनी पड़ रही थी। अब लागत घटने से छोटे और मध्यम निवेशकों के लिए भी ट्रेडिंग आसान हो जाएगी। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मार्जिन कम होने से ट्रेडिंग वॉल्यूम में बढ़ोतरी हो सकती है और बाजार में लिक्विडिटी बेहतर हो सकती है।
बाजार में मौजूदा हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाल ही में सोने में 2% से ज्यादा की तेजी के बाद हल्की गिरावट आई है। स्पॉट गोल्ड 4961 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी हल्की कमजोरी में हैं। चांदी भी करीब 76 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर रही।
सारांश:
सोना और चांदी के ट्रेडर्स के लिए अच्छी खबर है। MCX और NSE ने एक्स्ट्रा मार्जिन की शर्त को हटा दिया है, जिससे अब इस धातु की ट्रेडिंग सस्ती और आसान हो जाएगी। इससे निवेशकों को बेहतर लिक्विडिटी और व्यापार में कम लागत का लाभ मिलेगा।
