30 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति 35 साल की उम्र में रोज़ाना 30 मिनट पैदल चलना शुरू करता है, तो 40 की उम्र तक उसकी सेहत में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। हाल ही में एक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह साधारण आदत ब्लड शुगर, पाचन तंत्र और स्टैमिना को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

पैदल चलना एक आसान और प्रभावी व्यायाम है, जिसे किसी विशेष उपकरण या ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित वॉकिंग शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रिया को सक्रिय करती है, जिससे ब्लड शुगर स्तर नियंत्रित रहता है। यह विशेष रूप से Type 2 Diabetes के जोखिम को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के अनुसार, रोज़ाना चलने से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। वॉकिंग से आंतों की गतिविधि (गट मोटिलिटी) बेहतर होती है, जिससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं कम हो जाती हैं। इसके अलावा, यह आंतों में अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को भी बनाए रखने में मदद करता है।

डायबेटोलॉजिस्ट ने इस बात की पुष्टि की कि नियमित वॉकिंग इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाती है। इसका मतलब है कि शरीर ग्लूकोज का बेहतर उपयोग कर पाता है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है। यही कारण है कि डॉक्टर अक्सर मधुमेह के मरीजों को रोज़ाना वॉक करने की सलाह देते हैं।

स्टैमिना और ऊर्जा स्तर पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब व्यक्ति नियमित रूप से चलता है, तो उसकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है। इससे थकान कम होती है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 35 की उम्र एक ऐसा समय होता है, जब शरीर में धीरे-धीरे मेटाबॉलिज्म कम होने लगता है और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। ऐसे में अगर इस उम्र में ही स्वस्थ आदतें अपनाई जाएं, तो आगे चलकर कई समस्याओं से बचा जा सकता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल वॉकिंग ही पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन भी उतने ही जरूरी हैं। अगर इन सभी चीजों का ध्यान रखा जाए, तो स्वास्थ्य में और भी बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

वॉकिंग शुरू करने वालों के लिए विशेषज्ञों ने कुछ सुझाव भी दिए हैं। शुरुआत में धीमी गति से चलना चाहिए और धीरे-धीरे समय और गति बढ़ानी चाहिए। आरामदायक जूते पहनना और सही पोस्टर बनाए रखना भी जरूरी है।

इसके अलावा, सुबह या शाम का समय वॉकिंग के लिए बेहतर माना जाता है, क्योंकि उस समय मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल होता है। नियमितता सबसे महत्वपूर्ण है—हर दिन थोड़ा-थोड़ा चलना लंबे समय में बड़ा फर्क डाल सकता है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि जो लोग पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें वॉकिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। इससे किसी भी संभावित जोखिम से बचा जा सकता है।

कुल मिलाकर, यह साफ है कि रोज़ाना 30 मिनट की वॉक एक छोटी लेकिन बेहद प्रभावी आदत है, जो आने वाले वर्षों में आपकी सेहत को बेहतर बना सकती है। 35 की उम्र में शुरू की गई यह आदत 40 तक आपको एक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन दे सकती है।

Summary

विशेषज्ञों के अनुसार 35 की उम्र में रोज़ 30 मिनट चलने से 40 तक ब्लड शुगर, पाचन और स्टैमिना में सुधार होता है, जिससे मधुमेह और अन्य बीमारियों का खतरा कम होता है।

Bharat Baani Bureau

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