2 जून 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : Punjab के Gurdaspur जिले में स्थित 152 वर्ष पुरानी एक ऐतिहासिक horticulture unit के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय और प्रशासनिक समर्थन वापस लेने के फैसले के बाद इस प्रतिष्ठित संस्थान के बंद होने की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही यहां संरक्षित प्रसिद्ध ‘My Fair Lady’ गुलाब सहित कई दुर्लभ पौधों और फूलों की किस्मों के संरक्षण पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
यह इकाई लंबे समय से horticulture research, plant conservation और floriculture development का महत्वपूर्ण केंद्र रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक सरकारी संस्थान नहीं बल्कि क्षेत्र की कृषि और बागवानी विरासत का हिस्सा है।
‘My Fair Lady’ नामक गुलाब की किस्म विशेष रूप से इस केंद्र की पहचान मानी जाती है। वर्षों से यहां विभिन्न सजावटी पौधों, गुलाबों और फलदार प्रजातियों का संरक्षण और विकास किया जाता रहा है।
स्थानीय लोगों और horticulture experts का कहना है कि यदि इकाई बंद होती है तो इससे दशकों से संजोई गई जैविक और वनस्पति विरासत को नुकसान पहुंच सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा funding और operational support में कटौती के बाद संस्थान की गतिविधियों पर असर पड़ने लगा है। कर्मचारियों और विशेषज्ञों में भी भविष्य को लेकर अनिश्चितता देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संस्थान केवल पौधों के संरक्षण तक सीमित नहीं होते, बल्कि किसानों, छात्रों और शोधकर्ताओं को भी महत्वपूर्ण जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
Gurdaspur की यह इकाई ब्रिटिश काल से अस्तित्व में रही है और समय के साथ इसने क्षेत्रीय horticulture विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहां तैयार की गई कई पौध प्रजातियां पंजाब और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों तक पहुंची हैं।
स्थानीय किसानों का कहना है कि संस्थान की तकनीकी सलाह और पौध सामग्री ने वर्षों तक खेती और बागवानी को लाभ पहुंचाया है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। कई स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों ने केंद्र सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
विश्लेषकों का कहना है कि heritage institutions को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि उनका ऐतिहासिक, शैक्षणिक और वैज्ञानिक महत्व भी होता है।
Environmental experts ने चेतावनी दी है कि यदि संरक्षण कार्यक्रम प्रभावित होते हैं तो दुर्लभ पौध प्रजातियों के संरक्षण पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई users ने 152 वर्ष पुराने संस्थान को बचाने के लिए अभियान चलाने की मांग की है।
Horticulture professionals का कहना है कि Punjab जैसे कृषि प्रधान राज्य में ऐसे संस्थानों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि यदि केंद्र सरकार सीधे संचालन जारी नहीं रखना चाहती तो राज्य सरकार, कृषि विश्वविद्यालयों या public-private partnership मॉडल के माध्यम से संस्थान को संरक्षित किया जा सकता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक सरकारी कार्यालय नहीं बल्कि क्षेत्र की पहचान और गौरव का प्रतीक है।
कृषि क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और biodiversity loss के दौर में plant conservation centres की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।
इस बीच, कर्मचारियों और समर्थकों को उम्मीद है कि सरकार कोई वैकल्पिक व्यवस्था तलाशेगी जिससे संस्थान का संचालन जारी रह सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘My Fair Lady’ जैसे दुर्लभ गुलाब और अन्य पौध प्रजातियों का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर, Gurdaspur की 152 वर्ष पुरानी horticulture unit पर मंडरा रहा बंदी का खतरा केवल एक संस्थान का मुद्दा नहीं बल्कि कृषि विरासत, जैव विविधता और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण से जुड़ा विषय बन गया है।
