18 जून 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : पंजाब सरकार के एक मंत्री ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री Bhagwant Mann से जुड़े विवादित वीडियो की जांच दो सरकारी प्रयोगशालाओं (लैब) द्वारा की गई थी और दोनों ने उन्हें “फर्जी” या “छेड़छाड़ किए गए” (manipulated) वीडियो बताया है। हालांकि मंत्री ने इन लैबों के नाम सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया।
मंत्री ने कहा कि तकनीकी जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि वीडियो वास्तविक नहीं थे और उनमें कथित रूप से बदलाव किया गया था। उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास इस संबंध में विशेषज्ञों की रिपोर्ट मौजूद है।
हालांकि जब उनसे उन सरकारी लैबों के नाम पूछे गए, जिन्होंने जांच की थी, तो उन्होंने यह जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया। मंत्री का कहना था कि उचित समय आने पर संबंधित विवरण सामने लाए जा सकते हैं।
विपक्षी दलों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि जांच वास्तव में हुई है और रिपोर्ट सरकार के पास मौजूद है, तो पारदर्शिता के हित में लैबों के नाम और रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल युग में वीडियो और ऑडियो सामग्री की सत्यता को लेकर विवाद बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में फोरेंसिक जांच और स्वतंत्र सत्यापन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी वीडियो की प्रामाणिकता की जांच के लिए डिजिटल फोरेंसिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इन जांचों के निष्कर्षों की विश्वसनीयता अक्सर जांच करने वाली संस्था और उसकी रिपोर्ट की सार्वजनिक उपलब्धता पर भी निर्भर करती है।
यह मामला पंजाब की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है और विपक्ष लगातार सरकार से अधिक जानकारी देने की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वीडियो के जरिए मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का प्रयास किया गया।
फिलहाल, कथित लैब रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही संबंधित संस्थानों के नाम बताए गए हैं। ऐसे में विवाद पर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।
